लखीसराय जिले के जगत जननी बड़ी दुर्गा मंदिर स्थान में देर रात्रि कालरात्रि पूजन, महानिशा पूजा के बाद भगवती की प्राण प्रतिष्ठा की गई। प्राण प्रतिष्ठा, महा निशा पूजन के बाद देवी के पट भक्तों के दर्शन
के लिए खोल दिए गए देवी का पट खुलते ही यहां पूजा एवं दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई।
माता
सीता ने भगवान श्रीराम को वर रूप में प्राप्त करने के लिए महागौरी की पूजा की थी।
यह देवी अखंड सौभाग्य व अखंड सुख देने वाली हैं।नवरात्र के आठवें दिन
मां भगवती के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा आराधना की जाती है। यह देवी पूरी
तरह से गौरवर्ण की हैं। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है। इनके वस्त्र आभूषण सभी
श्वेत वर्ण के हैं। महागौरी की चार भुजाएं हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनकी मुद्रा अत्यंत
शांत है। माता धन, यश, बुद्धि व सुख देने वाली हैं।
अपने पार्वती के रूप में भगवान शंकर को वर रूप में प्राप्त करने के
लिए कठोर तपस्या करने के कारण इनका वर्ण काला पड़ गया था। तब भगवान शंकर ने प्रसन्न
होकर गंगाजल से इन्हें स्नान कराया, तब इनका वर्ण अत्यंत गोरा हो गया। तभी से इनका
नाम महागौरी पड़ गया।
त्रेता युग में भगवान राम को वर रूप में प्राप्त करने के लिए माता
सीता ने इन्हीं महागौरी की पूजा करके राम को वर रूप में प्राप्त किया था। यह माता
अखंड सौभाग्य व अखंड सुख देने वाली हैं।
बुधवार को माता के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि का विधि विधान से
पूजन किया गया। मंदिरों दिन भर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। बाबा जानकीदास मंदिर में
दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया।

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