BREKING NEWS

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Saturday, 20 July 2013

विषाक्त मध्याह्न भोजन योजना

सरकार ने जहां अतिरिक्त वित्तीय साधनों की व्यवस्था कर प्रारंभिक शिक्षा कोष का निर्माण किया तथा छात्रों के लिए मध्याह्न भोजन की व्यवस्था का विस्तार किया है यहां यह बताना लाजमी होगा कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत चलाए जा रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य यही है कि छात्रों के लिए मध्याह्न भोजन योजना की व्यवस्था कर न केवल प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना बल्कि विद्यालयों में उनकी उपस्थिति बनाए रखना है। सर्व शिक्षा अभियान का यह महत्वाकांक्षी एमडीएम कार्यक्रम उद्देश्य से भटक चुकी है।
लखीसराय जिला मुख्यालय के नया बाजार स्थित  श्री दुर्गा मध्य विघालय लखीसराय में मध्यान भोजन में छात्र और छात्रा भेड बकरीयों की तरह  पोष्टिक अहार नहीं देकर सडा हुआ चावल जिसमें कीडा हैं उसी चावल को बनाकर खिलाया जा रहा है।

V.O1..इस संदर्भ में जब मिडिया ने स्कुल प्रबंधन के शिक्षिका बीणा देवी से बात किया तो वो बताई कि हमें विभाग सडा हुआ चावल ही मुहैयया करवाता है। उसे हमलोग फटककर छांटकर बनाते है। और 1300 से1400 छात्र.छात्राओं को निय मित खिलाते है।
बाईट. वीणा देवी. शिक्षिका
 V.O 2..इस बात की शिकायत जब जिला मध्यान्न भोजन के अधिकारी मधुसुन प्रसाद से मिडिया मिलने गया तो वो अपने कार्यालय में ताला लगाकर चल दिया ।
V.0.3..छात्र .छात्राओं ने बताया कि खाना में स्वाद नहीं रहता है। चावल में खाने के समय कीडा मिल जाता है। खाना तितकठ लगता है। मजबुरी बस खाना को हमलोग खा रहे है।
बाईट. छात्र. छात्रा .
सारण जिले के मशरक प्रखंड के धरमासती गंडामन गांव में विषाक्त मध्याह्न भोजन खाने से 23 बच्चों की हुई मौत ने सबको झकझोर दिया है। वहीं सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी। इस दुखद घटना के बाद सूबे में प्रशासन हरकत में आया। जिला पदाधिकारी के आदेश पर आधा दर्जन से अधिक मध्यए प्राथमिक एवं डीपीईपी विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर एमडीएम का जायजा लिया। मध्याह्न भोजन में छात्रों द्वारा कीड़ा निकलने की शिकायत जल्ला एवं कीड़ा युक्त चावल की ग्रामीणों की शिकायत पर जांच की।
बच्चे एमडीएम मध्याह्न भोजन खाकर मौत की नींद नहीं सो रहे हैं। पर यह सच है कि वे घटिया भोजन खाकर मौत के करीब पहुंच रहे हैं।


Thursday, 11 July 2013

परिवार कल्याण पखवाडा

लखीसराय जिला के सदर अस्पाताल में जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार कल्याण पखवाडा कर हम दो हमारे दो फार्मुला के तहत सभी को आम जीवन में लागु करने के उददेश्य से कार्यक्रम की शुरूआत बिधिवत किया । दर्जनों स्टाॅल लगाकर गर्भ निरोधक गोली, काॅपर टी, नि रोध , बन्ध्याकरण जैसे जानकारी दिया  ।सिविल सर्जन डा. शशिभूषण शर्मा ने जिलाधिकारी का स्वागत बुके देकर किया।विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर सदर अस्पताल में 31 जुलाई तक चलने वाले परिवार कल्याण पखवाड़ा का उद्घाटन समारोह को संबंधित कर रहे थे। इस मौके पर अस्पताल परिसर में आमजनों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करने को लेकर स्टाल लगाकर परामर्श दिया गया।

 
V.O..1..लखीसराय जिले के सदर अस्पाताल में जिलाधिकारी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि लगातार बढ़ रही जनसंख्या चिंता का विषय है, इसके नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को गति देकर तथा प्रचार प्रसार कर प्रजनन दर को कम किया जा सकता है। परिवार नियोजन के स्थायी एवं अस्थायी दोनों माध्यमों पर समान रूप से ध्यान देने की जरूरत है। इस अभियान में आशा कार्यकर्ताओं की अहम जिम्मेदारी है।
V.O2... सिविल सर्जन डा. शशिभूषण शर्मा ने आशा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गांवों में जाकर परिवार नियोजन की जानकारी लोगों को दें। डीएम ने सिविल सर्जन को आशा कार्यकर्ताओं को दी जानी वाली हर सुविधा को शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। सिविल सर्जन डा. शर्मा ने आशा कार्यकर्ताओं को घर घर जाकर न्यू बोर्न बच्चों को टीकाकरण दिलवाने, परिवार कल्याण कार्यक्रम की जानकारी लोगों तक पहुंचाने तथा पहले बच्चे के बाद दूसरे बच्चे का अंतर कम से दो वर्ष रहने की जानकारी देने की बात कही।

सबसे मुबारक महीना होता है रमजान

रमजान के दौरान इसान बाहरी आधुनिक दुनिया से अलग हट कर केवल खुदा की इबादत में मशगूल रहता है।

  नूंह की जामा मस्जिद एवं बडे़ मदरसे के मुफ्ती जाहिद हुसैन रमजान के पाक माह में खुद को नेकी से जोड़ने तथा बुराईयों से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि रमजान साल के बारह महीनों में सबसे मुबारक महीना होता है। इस महीने में नेकी का सबाब अन्य दिनों के मुकाबले 7 सौ गुना बढ़ जाता है। यह गमखारी का महीना होता है। जिसमें दूसरों के साथ हमदर्दी, खैरखाही तथा प्यार मोहब्बत के साथ पेश आना चाहिए। रोजा का मतलब होता है 'रोकना'। न केवल खुद को भूख-प्यास से रोकना बल्कि झूठ, गीबत , कीना, हसद, बुरी निगाह, गुनाह, बेहमारी व धोखा आदि से खुद को दूर रखना। इस माह में यतीमों, बेवाओं तथा गरीब व बेसहारा लोगों की मदद की जानी चाहिए। उन्हे अपने खाने जैसा ही खाना मुहैया करना चाहिए। जुल्म व सितम से दूर रहकर तमाम मखलूक (जीव-जंतुओं) के साथ रहम, हमदर्दी व आदर से पेश आना चाहिए।
कष्ट में आनंद की अनुभूति:
रोजेदारों को गर्मी के कारण थोड़ी दिक्कत महसूस होती है। लेकिन इसमें भी एक खास मजे का अहसास होता है। जो मालिक से लौ लगाकर इबादत करते है उनका कष्टों की ओर ध्यान नहीं जाता। बल्कि रोजा रखने की तमन्ना और मजबूत होती है। यह सब्र का महीना है और सब्र का बदला जन्नत होती है।
तालीम कराती है मालिक से मुलाकात:
इस्लाम ने तालीम को सभी के लिए अर्ज किया है। तालीम से सही-गलत, पाक-नापाक तथा जायज-नाजायज की पहचान होती है। चाहे औरत हो या मर्द, तालीम सभी को इसानियत का पाठ पढ़ाती है। तालीम मालिक से मुलाकात की राह दिखाती है। मुल्क की तरक्की के लिए सभी इसानो को तालीम जरूर लेनी चाहिए।
अमन-चैन कायम करे:
रमजान के पाक महीने की कद्र करे। क्षेत्र में अमन व शाति की दुआ मागें। अपने बच्चों को अच्छी तालीम दिलाकर मुल्क ही तरक्की में शरीक हों।

कोलेस्ट्रॉल

कोलेस्ट्रॉल एक तरह का वसायुक्त तत्व है, जिसका उत्पादन लिवर करता है। यह कोशिकाओं की दीवारों, नर्वस सिस्टम के सुरक्षा कवच और हॉर्मोस के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। यह प्रोटीन के साथ मिलकर लिपोप्रोटीन बनाता है, जो फैट को खून में घुलने से रोकता है। हमारे शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं-एचडीएल (हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन, अच्छा कोलेस्ट्रॉल) और एलडीएल (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन, बुरा कोलेस्ट्रॉल)। एचडीएल यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल काफी हलका होता है और यह ब्लड वेसेल्स में जमे फैट को अपने साथ बहा ले जाता है। बुरा कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल ज्यादा चिपचिपा और गाढा होता है। अगर इसकी मात्रा अधिक हो तो यह ब्लड वेसेल्स और आर्टरी में की दीवारों पर जम जाता है, जिससे खून के बहाव में रुकावट आती है। इसके बढने से हार्ट अटैक, हाई ब्लडप्रेशर और ओबेसिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कोलेस्ट्रॉल की जांच के लिए लिपिड प्रोफाइल नामक ब्लड टेस्ट कराया जाता है। किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 200 मिग्रा./डीएल से कम, एचडीएल 60 मिग्रा./डीएल से अधिक और एलडीएल 100 मिग्रा./डीएल से कम होना चाहिए। अगर सचेत तरीके से खानपान में कुछ चीजों को शामिल किया जाए तो बढते कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित किया जा सकता है :

1. ड्राई फ्रूट्स
बादाम, अखरोट और पिस्ते में पाया जाने वाला फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटमिंस बुरे कोलेस्ट्रॉल को घटाने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाने में सहायक होते हैं। इनमें मौजूद फाइबर देर तक पेट भरे होने का एहसास दिलाता है। इससे व्यक्ति नुकसानदेह फैटयुक्त स्नैक्स के सेवन से बचा रहता है।
कितना खाएं : प्रतिदिन 5 से 10 दाने।
ध्यान रखें: घी-तेल में भुने और नमकीन मेवों का सेवन न करें। इससे हाई ब्लडप्रेशर की समस्या हो सकती है। बादाम-अखरोट को पानी में भिगोकर और पिस्ते को वैसे ही छील कर खाना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। पानी में भिगोने से बादाम-अखरोट में मौजूद फैट कम हो जाता है और इनमें विटमिन ई की मात्रा बढ जाती है। अगर अखरोट से एलर्जी हो तो इसके सेवन से बचें। शारीरिक श्रम न करने वाले लोग अधिक मात्रा में बादाम न खाएं। इससे मोटापा बढ सकता है।
2. लहसुन
लहसुन में कई ऐसे एंजाइम्स पाए जाते हैं, जो एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार साबित होते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के अनुसार लहसुन के नियमित सेवन से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 9 से 15 प्रतिशत तक घट सकता है। इसके अलावा यह हाई ब्लडप्रेशर को भी नियंत्रित करता है।
कितना खाएं : प्रतिदिन लहसुन की दो कलियां छीलकर खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
ध्यान रखें : अगर लहसुन के गुणकारी तत्वों का फायदा लेना हो तो बाजार में बिकने वाले गार्लिक सप्लीमेंट्स के बजाय सुबह खाली पेट कच्चा लहसुन खाना ज्यादा अच्छा रहता है। कुछ लोगों को इससे एलर्जी होती है। अगर ऐसी समस्या हो तो लहसुन न खाएं।
3 ओट्स
ओट्स में मौजूद बीटा ग्लूकॉन नामक गाढा चिपचिपा तत्व हमारी आंतों की सफाई करते हुए कब्ज की समस्या दूर करता है। इसकी वजह से शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल का अवशोषण नहीं हो पाता। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि अगर तीन महीने तक नियमित रूप से ओट्स का सेवन किया जाए तो इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर में 5 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
कितना खाएं: एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 3 ग्राम बीटा ग्लूकॉन की जरूरत होती है। अगर रोजाना एक कटोरी ओट्स या 2 स्लाइस ओट्स ब्रेड का सेवन किया जाए तो हमारे शरीर को पर्याप्त मात्रा में बीटा ग्लूकॉन मिल जाता है।
ध्यान रखें : ओट्स में मौजूद फाइबर और बीटा ग्लूकॉन पेट में जाकर फूलता है। इससे कुछ लोगों को गैस की समस्या हो सकती है। इसलिए जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर हो, उन्हें इससे बचना चाहिए। लैक्टोज इंटॉलरेंस (दूध की एलर्जी) वाले लोगों को नमकीन ओट्स का सेवन करना चाहिए।
4. सोयाबीन और दालें
सोयाबीन, दालें और अंकुरित अनाज खून में मौजूद एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने में लिवर की मदद करते हैं। ये चीजें अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाने में भी सहायक होती हैं।
कितना खाएं : एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 18 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है। इसके लिए एक कटोरी दाल और एक कटोरी रेशेदार सब्जियों (बींस, भिंडी और पालक) के साथ वैकल्पिक रूप से स्प्राउट्स का सेवन पर्याप्त होता है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन सोयाबीन से बनी दो चीजों का सेवन जरूर करना चाहिए। इससे बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर में 5 प्रतिशत तक कटौती की जा सकती है। इसके लिए एक कटोरी उबला हुआ सोयाबीन, सोया मिल्क, दही या टोफू का सेवन किया जा सकता है।
ध्यान रखें: यूरिक एसिड की समस्या से ग्रस्त लोगों के लिए दालों और सोयाबीन में मौजूद प्रोटीन नुकसानदेह साबित होता है। अगर आपको ऐसी समस्या हो तो इन चीजों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
5. नीबू
नीबू सहित सभी खट्टे फलों में कुछ ऐसे घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं, जो स्टमक (खाने की थैली) में ही बैड कोलेस्ट्रॉल को रक्त प्रवाह में जाने से रोक देते हैं। ऐसे फलों में मौजूद विटमिन सी रक्तवाहिका नलियों की सफाई करता है। इस तरह बैड कोलेस्ट्रॉल पाचन तंत्र के जरिये शरीर से बाहर निकल जाता है। खट्टे फलों में ऐसे एंजाइम्स पाए जाते हैं, जो मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया तेज करके कोलेस्ट्रॉल घटाने में सहायक होते हैं।
कितना खाएं : गुनगुने पानी के साथ सुबह खाली पेट एक नीबू के रस का सेवन करें।
ध्यान रखें : चकोतरा बुरे कोलेस्ट्रॉल को घटाने में बहुत मददगार होता है। इसलिए कुछ लोग इसे भी अपनी डाइट में शामिल करते हैं, लेकिन अगर आप पहले से कुछ दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें क्योंकि कुछ दवाओं के साथ इसका बहुत तेजी से केमिकल रिएक्शन होता है, जिसकी वजह से हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
6. ऑलिव ऑयल
इसमें मौजूद मोनो अनसैचुरेटेड फैट कोलेस्ट्रॉल के स्तर को स्थिर रखने में सहायक होता है। यह ऑर्टरी की दीवारों को मजबूत बनाता है। इससे हृदय रोग की आशंका कम हो जाती है। यह हाई ब्लडप्रेशर और शुगर लेवल को भी नियंत्रित रखता है। रिसर्च से यह प्रमाणित हो चुका है कि अगर छह सप्ताह तक लगातार ऑलिव ऑयल में बना खाना खाया जाए तो इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर में 8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
ध्यान रखें : कुकिंग के लिए वर्जिन ऑलिव ऑयल और सैलेड ड्रेसिंग के लिए एक्सट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करना चाहिए। कुछ लोगों को इससे एलर्जी भी होती है, अगर ऐसी समस्या हो तो इसके बजाय फलेक्स सीड या राइस ब्रैन ऑयल का सेवन किया जा सकता है। ऑलिव ऑयल हाई ब्लडप्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा दोनों चीजों का लेवल बहुत कम कर देती है। 

चिंता खतरे का संकेत

छिन गयी है चेतना, क्यों इतना अंतर्नाद हुआ ।
युवा सम्भल जाता, देश क्यों इतना बर्बाद हुआ ।




अकसर हमारे सामने कुछ ऐसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं, जिनकी वजह से हम चिंतित हो जाते हैं। यह हमारे मन की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन समस्या तब आती है, जब कोई व्यक्ति छोटी-छोटी बातों को लेकर हमेशा चिंतित रहने लगे या किसी परेशानी का हल ढूंढ कर उससे बाहर निकलने के बजाय लगातार उसी के बारे में सोचता रहे। यह उसके लिए खतरे का संकेत है।
ज्यादा चिंतित रहने की आदत जीएडी
(जनरलाइज्ड एंग्जॉयटी डिसॉर्डर), ओसीडी (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर) और फोबिया जैसी गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं को जन्म देती है। इसलिए जहां तक संभव हो चिंता को अपने आसपास फटकने नहीं देना चाहिए।
क्यों होता है ऐसा
अपनी इच्छा के अनुकूल कोई कार्य नहीं होने पर चिंतित होना स्वाभाविक है, पर छोटी-छोटी बातों के लिए हमेशा अनावश्यक रूप से चिंतित होना व्यक्ति को मानसिक रूप से सुस्त और निराशावादी बना देता है। आनुवंशिकता की वजह से भी कुछ लोगों को चिंतित रहने की आदत होती है। अगर घर में माता-पिता या परिवार के किसी अन्य सदस्य को चिंतित रहने की आदत हो तो बच्चे के व्यक्तित्व पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पडता है और उसमें भी चिंतित रहने की आदत विकसित हो जाती है। लगातार परेशानी भरे अनुभवों का सामना, आत्मविश्वास में कमी और जिम्मेदारियों का बढता दबाव भी चिंता का प्रमुख कारण है। इसके अलावा सिरोटोनिन हॉर्मोन की कमी की वजह से भी चिंता होती है।
ऐसे रहें चिंतामुक्त
- सबसे पहले शांत मन से विचार करें कि किन बातों की वजह से आपको ज्यादा चिंता होती है।
- अपनी चिंता की सही वजह जानने के बाद सकारात्मक ढंग से समस्या समाधान की ओर कदम बढाएं, पर उसी मुद्दे पर बहुत ज्यादा न सोचें।
- जहां तक संभव हो खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें।
- नियमित रूप से एक्सरसाइज, योगाभ्यास और मॉर्निग वॉक करें। इससे ब्रेन से एंडोर्फिस नामक हॉर्मोन का सिक्रीशन होता है, जो तनाव को दूर करने में सहायक होता है।
- कई बार हमारे सामने ऐसी स्थितियां आती हैं कि हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते। ऐसे में चिंतित होने के बजाय सही समय का इंतजार करें।
- खानपान की आदतों और जीवनशैली में बदलाव लाएं। जंक फूड, चाय-कॉफी, एल्कोहॉल और सिगरेट जैसी चीजें थोडे समय के लिए चिंता से राहत जरूर दिलाती हैं, लेकिन इनकी अधिक मात्रा मस्तिष्क की कार्यक्षमता घटती है।
- सकारात्मक सोच अपनाएं। अच्छी किताबें पढें और खुशमिजाज लोगों के साथ वक्त बिताएं। 

Tuesday, 25 June 2013

गंगा दशहरा

रंजित सम्राट


                            आज गंगा दशहरा  के  दिन मेरा जन्मदिन है  आज का दिन बड़ा ही शुभ् है


हिंदू धर्म में गंगा स्नान का विशेष महत्व है। जिस प्रकार संस्कृत भाषा को देववाणी कहा जाता है, उसी प्रकार गंगाजी को देव नदी कहा जाता है। गंगा भारत की ही नहीं बल्कि विश्व की परम पवित्र नदी है। इस तथ्य को भारतीय तो मानते ही है, विदेशी विद्वान भी इसे स्वीकार करते है।

प्रचलित मान्यता

ऐसा माना जाता है कि गंगा जी स्वर्गलोक से ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को पृथ्वी पर उतरी थीं। इसी दिन सूर्यवंशी राजा भगीरथ की पीढि़यों का परिश्रम और तप सफल हुआ था। उनके घोर तप के फलस्वरूप गंगाजी ने शुष्क तथा उजाड़ प्रदेश को उर्वर तथा शस्य श्यामल बनाया और भय-ताप से दग्ध जगत के संताप को मिटाया। उसी मंगलमय सफलता की पुण्य स्मृति में गंगा पूजन की परंपरा प्रचलित है।

भारतीय संस्कृति और गंगा

गंगा, गीता और गौ को भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व दिया गया है। प्रत्येक आस्तिक भारतीय गंगा को अपनी माता समझता है। गंगा में स्नान का अवसर पाकर कृत-कृत्य हो जाता है। गंगा दशहरा के दिन गंगा के प्रति अपनी सारी कृतज्ञता प्रकट की जाती है। ऐसा माना जाता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान और पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते है। गंगा दशहरा के दिन यदि संभव हो तो गंगा स्नान अवश्य करना चाहिए अथवा किसी अन्य नदी, जलाशय में या घर के ही शुद्ध जल से स्नान करें, पर गंगा जी का स्मरण और पूजन करे।

गंगा पूजन के साथ उनको भूतल पर लाने वाले राजा भागीरथ और उद्गम स्थान हिमालय का भी पूजन नाम मंत्र से करना चाहिए। इस दिन गंगा जी को अपनी जटाओं में समेटने वाले भगवान शिव की भी पूजा करनी चाहिए। संभव हो तो इस दिन दस फूलों और तिल आदि का दान भी करना चाहिए।

पौराणिक कथा

प्राचीन ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार अयोध्या के सूर्यवंशी राजा सगर ने एक बार अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान किया। यज्ञीय अश्व की रक्षा के लिए उनके साठ हजार पुत्र उसके पीछे-पीछे चले। इंद्र ने ईष्र्यावश यज्ञ के अश्व को पकड़वा कर कपिल मुनि के आश्रम में बंधवा दिया। सागर पुत्र जब अश्व को खोजते हुए कपिल मुनि के आश्रम में गए, तो वहां यज्ञ के घोड़े को देखकर ऋषि को भला-बुरा कहा। ऋषि को इंद्र के षड्यंत्र का पता था अतएव उन्हे भी क्रोध आया और उन्होंने हुंकार से राजकुमारों को भस्म कर दिया।

जब बहुत दिन बीत गए और कोई भी राजकुमार लौट कर नहीं आया तो राजा सगर ने अपने नवयुवक पौत्र अंशुमान को उनका पता लगाने के लिए भेजा। उसने घोड़े का पता लगाया और अपने पूर्वजों की दुर्दशा भी देखी। उसे गरुड़ द्वारा यह भी ज्ञात हुआ कि भस्म हुए राजकुमारों का उद्धार तभी हो सकता है, जब स्वर्गलोक से गंगा जी को पृथ्वी पर लाया जाए और इन सबकी भस्मी का स्पर्श गंगाजल से कराया जाए। अंशुमान ने वैसा ही किया। इसके बाद इसी वंश में आगे चल कर राजा दिलीप के पुत्र भगीरथ परम प्रतापी तथा धर्मात्मा राजा हुए। वह गंगा जी को लाने केलिए गोकर्ण तीर्थ में जाकर कठोर तप करने लगे। उन्होंने अपनी कठोर तपस्या से देवताओं को भी विचलित कर दिया। देवों ने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की कि वे भगीरथ को संतुष्ट करे। इसके बाद ब्रह्मा जी देवताओं के साथ राजा के पास गए और उनसे अभीष्ट वरदान मांगने को कहा। भगीरथ ने गंगावरतण की प्रार्थना की। ब्रह्माजी ने प्रार्थना स्वीकार कर ली, किंतु यह भी कहा कि गंगा जी की वेगवती धारा को भूतल पर संभालने का प्रबंध तुम्हे करना पड़ेगा। इसके लिए राजा ने घोर तप करके शिवजी को प्रसन्न किया और उन्होंने गंगा की वेगवती धारा को संभालने का कार्य अंगीकार कर लिया। उसके बाद शंकर जी ने अपनी जटा से गंगा जी को रोका और बाद में अपनी जटा को निचोड़ कर बिंदु के रूप में गंगा जी को बाहर निकाला। वह बिंदु शिवजी के निवास स्थान कैलास पर्वत के पास बिंदु सरोवर में गिरा। वहां पर तत्काल गंगाजी सात धाराएं हो गई और वे अलग-अलग दिशाओं में फैल गई।

अथक भागीरथ प्रयत्न

गंगा जी की कृपा से भारत का मानचित्र ही बदल गया है। गंगावतरण के प्रमुख साधक भगीरथ की साधना, तप और अति विकट परिश्रम ने यह अमृत फल प्रदान किया है। उनके इस कठिन प्रयत्न की वजह से ही भगीरथ प्रयत्न एक मुहावरा बन गया है और गंगा जी का एक नाम भागीरथी पड़ गया। गंगावतरण की तिथि गंगा दशहरा के दिन हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी में गंगा स्नान, गंगा पूजन और दान का विशेष महत्व है।

Monday, 24 June 2013

केंद्रीय विद्यालय के लिए दस एकड़ भूमि की दरकार

लखीसराय में 1987 में तत्कालीन सांसद व केंद्रीय मंत्री कृष्णा शाही के प्रयास से केंद्रीय विद्यालय खुला था। स्थापना काल से ही श्री दुर्गा बालक उच्च विद्यालय के निचले भवन में विद्यालय संचालित हो रहा है। विद्यालय को स्थायी भवन एवं आधारभूत संरचना के विकास के लिए दस एकड़ भूमि की दरकार है। इतने लंबे सफर के बावजूद सत्ता के भागीदार रहे मंत्री, सांसद एवं विधायक की इच्छाशक्ति के अभाव एवं जिला प्रशासन की उदासीनता से विद्यालय के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं सकी। अब केंद्रीय विद्यालय संगठन ने विद्यालय के स्थानीय प्रबंधन को पहली कक्षा में नामांकन बंद करने का नोटिस थमा दिया है। इससे विद्यालय के भविष्य पर तलवार लटकने लगी है।
विद्यालय सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दे रखा है, बिना भूमि व भवन के कोई भी केंद्रीय विद्यालय संचालित नहीं होगा। इस कारण लखीसराय समेत राज्य के 14 केंद्रीय विद्यालयों में संगठन ने नामांकन पर रोक लगा दिया है। विद्यालय प्रबंधन ने नामांकन पर रोक लगा देने संबंधित जानकारी विद्यालय के चेयरमैन व जिलाधिकारी, लखीसराय को दे दी है।
                            लखीसराय केंद्रीय विद्यालय लखीसराय में नए शैक्षिक सत्र में केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा नामांकन पर रोक लगाने तथा अबतक विद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण विद्यालय बंद होने की आशंका को लेकर शहर के प्रबुद्धजन, शिक्षा प्रेमी, विद्यालय के छात्र-छात्राओं में घोर निराशा है तथा हर कोई इसके लिए सरकार व प्रशासन को दोषी मान रहा है। राजनीतिक दिग्गजों का क्षेत्र रहने के बावजूद जमीन खोजने में पहल नहीं करने को लेकर लोगों में काफी क्षोभ है।

क्या इसलिए उत्तराखंड में हुई तबाही?

क्या इसलिए उत्तराखंड में हुई तबाही?

उत्तराखंड में हुई तबाही के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? एक सवाल और यहां पर रह-रहकर उठ रहा है कि जब केदारघाटी में सभी कुछ तबाह हो गया तो फिर केदारनाथ मंदिर कैसे अपनी जगह पर मजबूती के साथ खड़ा रहा? इन सवालों के जवाब में फिर से कई सवाल खड़े हो जाते हैं। गौरतलब है कि इस मंदिर में मौजूद पांडवों की मूर्ति भी यहां आई बाढ़ में बह गई, लेकिन यहां पर मौजूद शिवलिंग जस का तस बना रहा।

नहीं संभले तो खुलेगा शिव का तीसरा नेत्र


अब ऐसे तथ्य निकलकर सामने आ रहे हैं जिन्हें यदि स्वीकार नहीं किया जा सकता है तो नकारा भी नहीं जा सकता है। दरअसल उत्तराखंड में श्रीनगर स्थित धारी देवी को राज्य के लोगों एवं पर्यटकों की रक्षक माना जाता है। लेकिन श्रीनगर विद्युत परियोजना के तहत यहां पर लगी धारी देवी की मूर्ति को 16 जून को हटा दिया गया था, जिसके बाद हमें यह विनाशलीला देखने को मिली है।

संत समाज ने इस मंदिर की मूर्ति को वहां से हटाने का विरोध भी किया था, लेकिन उनके विरोध को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने मूर्ति हटने की सूरत में यहां पर आपदा आने की आशंका जताई थी। मूर्ति हटा दी गई और इसके बाद जो कुछ हुआ वह सभी ने देखा। इस बाढ़ में बिजली का वह प्रोजेक्ट भी बह गया जिसके लिए धारी देवी की मूर्ति हटाई गई थी।

इससे पहले वर्ष 1882 में भी एक राजा ने मंदिर के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी और उस समय भी इसी तरह का विनाश देखा गया था। उत्तराखंड में आई तबाही के बाद से यहां पर अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों की तादाद में लोग अभी लापता हैं। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि यहां होने वाली तबाही एक सामान्य प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक देवी का अभिशाप है।

लोगों का मानना है कि धारी देवी उत्तराखंड के सभी धामों की रक्षक हैं। इसके अलावा वह यहां आने वाले श्रद्धालुओं की भी रक्षा करती हैं। लेकिन बांध बनाने के लिए धारी देवी को उस स्थान से हटा दिया गया जहां वे बरसों से देवभूमि की रक्षा कर रही थीं। मान्यता ये भी है कि हर दिन माता यहां तीन रूप में नजर आती हैं। इसमें पहला रूप कुमारी कन्या, दूसरा रूप युवती का और तीसरा वृद्ध माता का है।

बताया जाता है कि माता के सिर पर छत लगाने की कई कोशिशें की गई लेकिन कभी लगाया नहीं जा सका। वर्तमान मंदिर के स्वरूप में भी माता की मूर्ति के ऊपर छत नहीं है। कहा ये भी जाता है कि जिस दिन धारी देवी को मूल स्थान से हटाया जा रहा था उस दिन भी भयानक तूफान आया था।

Saturday, 15 June 2013

कांबिंग आपरेशन


लखीसराय जिला के नक्सल प्रभावित चानन थाना क्षेत्र के कुन्दर हाल्ट के पास आज  घटना के तीसरे दिन भी लखीसराय, जमुई व मुंगेर पुलिस की संयुक्त छापामारी जारी ! दानापुर रेल मंडल के किऊल-झाझा रेलखंड अंतर्गत कुंदर रेलवे हॉल्ट के पास चलती ट्रेन को हाइजैक कर नक्सलियों द्वारा गोलियों व बमों की बारिश करने की घटना के बाद महकमा की नींद खुली है
नक्सलियों के सेफजोन से दूर रहा कांबिंग ऑपरेशन राज्य मुख्यालय के आदेश पर शुरू हुआ कांबिंग आपरेशन नक्सलियों के सेफजोन तक नहीं पहुंच सका।
लखीसराय, जमुई एवं मुंगेर के पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में सीआरपीएफ कोबरा एवं जिला पुलिस बल की गठित अलग-अलग टीम घटना के बाद जंगली एवं पहाड़ी इलाकों में सघन छापामारी जरूर शुरू की। घटना के दूसरे...तीसरे दिन भी पुलिस की टीम घटना स्थल का दौरा कर नक्सलियों के छिपे स्थान का सुराग ढूंढने में ही लगी रही। लेकिन बारिश के कारण छापामारी दल जंगलों में प्रवेश नहीं कर सका।

Friday, 14 June 2013

ग्राउंड जीरो पर नक्सल आॅपरेशन

लखीसराय जिला के नक्सल प्रभावित चानन थाना क्षेत्र के कुन्दर हाल्ट के पास आज धटना स्थल का मुआयना करने के लिए दानापुर के डी0आर0एम0, ए0डी0जी0 रेल प्रशासन, लखीसराय जिलाधिकारी , एस0पी0 और जमुईके जिला प्रशासन सहित 131 , 256, 115 के सी0आर0पी0एफ0 बटालियन और जी0आर0पी0, आर0पी0एफ0 के जवान ने संयुक्त रूप से ग्राउंड जीरो पर नक्सल आॅपरेशन चलाया जा रहा है।


 धटना स्थल पर डर और भय के कारण एक भी यात्री नहीं दिखा। ट्ेन के अन्दर यात्री भय के कारण यात्रा नहीं कर रहे थे। जो लोग यात्रा कर भी रहे थे वो भगवान को यादकर कुन्दर हाल्ट जल्दी से पार हो जाने की कामना कर रहा था। ग्राउंड जीरो पर बिल्कुल सुना-सुना सा महौल था।
हर तरफ मायुसी छाया था। इसी बीच वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी ग्राउंड जीरो पर पहुंचा ।


बाईट- डी0आर0एम0- दानापुर संभाग
बाईट- यात्री

Thursday, 13 June 2013

नक्सल ताडंव

लखीसराय जिला के  नक्सल प्रभावित चानन थाना क्षेत्र के कुन्दर हाल्ट के पास नक्सलीयो ने धनवाद इन्टरसिटी एक्सप्रेस को बनाया बन्धक। नक्सलीयों ने सैकडों राउड गोलीबारी और दर्जनों बमबाजी किया । ये लोग 200 की संख्या में थे जिसमें कई हार्डकोर महिला मारक दस्ता के नक्सली थे ।


 यह कुन्दर हाल्ट -देवाचक- और भलुई हाल्ट के पास 2 धण्टा तक ताडंव मचाता रहा ।


 जिसमें वो 3 लोगों की हत्या कर दिया । और 2 पुलिसकर्मीको अगवा भी कर लिया है।

Wednesday, 12 June 2013

कागजी जनता दरबार

सी.एम की नहीं सुनते अधिकारी--आम जनता है परेशान.......कागजी जनता दरबार

सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  न्याय के साथ विकास की गाड़ी को आगे बढ़ाने तथा जनकल्याणकारी एवं विकासात्मक कार्यो को सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में गांव की ओर कार्यक्रम को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू की गई है।
   -सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पटना स्थित संवाद कक्ष से भी सभी जिलों के अधिकारीयों को निर्देश दिया गया था जनता दरबार को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू की ।
   -सीएम ने पटना सहित बिहार के अन्य जिलों के डीएम औऱ एसपी वहाँ के जनप्रतिनिधियों को एक साथ मिलकर जनता दरबार लगाने की दिया था आदेश.....लेकिन नहीं हो रहा है आदेश का पालन।
        नए डीएम अमरेन्द्र प्रसाद सिंह  ने जनता दरवार के बारे में कैमरा के सामने कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया । और कहा है कि मै अभी ही आया हुं। इसके पहले कौन क्या किया मुझे मालुम नहीं है। हलांकी बैठक कर कुछ नया करने की बात कर रहे थे।
           लखीसराय : नव पदस्थापित जिलाधिकारी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने अधिकारियों के साथ समीक्षा उपरांत जिले के सभी प्रखंड और अंचलों में जाकर जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याओं को सुनने का निर्णय लिया है। प्रखंड स्तर पर इस जनता दरबार में जिलाधिकारी के साथ पुलिस अधीक्षक भी शामिल रहेंगे। नए जिलाधिकारी की इस पहल से जिले के सुदूर ग्रामीण अंचलों से न्याय की गुहार लगाने के लिए जिला मुख्यालय आने वाले फरियादियों को राहत मिलेगी। जिलाधिकारी के अनुसार प्रखंडों में जनता दरबार के माध्यम से लोगों की समस्या का समाधान होगा तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उनं तक पहुंच पा रहा है या नहीं इसपर भी नजर रह सकेगी। विदित हो कि सरकार ने प्रखंड स्तर पर बीडीओ, थाना स्तर पर थानाध्यक्ष को भी जनता दरबार लगाने का आदेश पूर्व से दे रखा है। यहां तक प्रत्येक बुधवार को ग्राम विकास शिविर का आयोजन कर जनता की समस्या को सुनकर उसके समाधान की जिम्मेदारी प्रखंड के पदाधिकारियों को दी गई है।
                        लेकिन जिले में अबतक यह अभियान सिर्फ कागजी बनकर रह गया है। अब देखना है कि नए डीएम की इस पहल पर जनता को कहां तक लाभ मिल पाता है।

Tuesday, 11 June 2013

अतिपिछडा महासंघ संवाद सम्मेलन

लखीसराय पुराना बाजार धर्मशाला में भारतीय अतिपिछडा महासंघ  संवाद सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली से आए राष्ट्ीय अध्यक्ष कैलाश पाल कहा कि देशभर के सभी राजनीतिक दलों ने अतिपिछडा समाज को केबल ठगने का काम किया है। हम 35 प्रतिशत है फिर भी सभी पार्टी हमें अलग-थलग करके छोड दिया है।
 इसलिए हम इस संवाद में देश के सभी राजनैतिक पार्टीयों में टिकट की हिस्सेदारी के लिए मांग करेगें। अगर वोहमे इससे दुर रखने का प्रयास करेगी तो हम सभी अत्यंत पिछडावर्ग अगामी लोकसभा चुनाव में नेताओं का बहिष्कार करेगें। इस अबसर पर दर्जनों पिछडा वर्ग के नेताओं ने उनके बातों का सर्मथन किया । और आगामी 1 जुलाई को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाॅल में सुबे बिहार के सभी दलो से संबधित अत्यंत पिछडावर्ग के लोग  देश के सभी राजनैतिक पार्टीयों में टिकट की हिस्सेदारी के लिए मांग करेगें।

बाईट- कैलाश पाल- राष्ट्ीय अध्यक्ष- अतिपिछडा महासंघ  

सुरक्षा में अनदेखी

नक्सल प्रभावित क्षेत्र ........   सुरक्षा में अनदेखी

लखीसराय   जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र है जिसमें चानन थाना, कजरा थाना, और शहर के कबैया थाना में में नक्सलीयों ने कईबार अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुकी है।
1- 2008 ई0 में चानन थाना क्षेत्र कुन्दर में एक एक्सप्रेस रेल में नक्सलीयों का तांडव ।
2-- 2009 ई0 में कबैया थाना क्षेत्र के जिला समाहरणालय, एस0पी0 कार्यालय, जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में नक्सलीयों ने हमलाकर हार्डकोर एरिया कमांडर नक्सली मिसिर बेसरा को पुलिस के चंगुल से अजाद करवा कर दिन-दहाडे दर्जनों राउंड गोलीबारी,बमबाजी कर 6 लोगों को धायल किया था।
3-- 2010 ई0 में कजरा थाना क्षेत्र के पहाडी और जंगली क्षेत्र में पुलिस पर हमला 12 पुलिस की हत्या, 1 दारोगा की हत्या और दारोगा को 4 को अगवा किया । और 7 दिनों तक बिहार सरकार को चैंलेज करने के बाद 1 जवान लुकस टेटे की हत्या करने बाद रिहा किया ।
ज्ञात हो कि आए दिन इन तीनो थाना क्षेत्र में नक्सली अक्सर धुमते नजर आते है। और अपनी मांग पोस्टर चिपकाकर सरकार और अधिकारीयों चैंलेज देते रहते है। फिर सुरक्षा में अनदेखी बदस्तुर जारी है।


Saturday, 8 June 2013

मनरेगा मजदुरों के प्रदर्शन

आज लखीसराय जिला के शहीद द्वार से माले के सैकडों सर्मथकों ने बिहार सरकार नीतीश कुमार और सुशील मोदी के खिलाफ चक्का जाम और बाजार में घुम-धुमकर बन्द करवा कर  बिरोध प्रदर्शन किया ।
 मनरेगा के मजदुरों ने लाठी डन्डा, कुदाल और बटटा लेकर प्रदर्शन किया । सी0ए0जी0 रिर्पोट के अनुसार 35 हजार करोड रू0 की फर्जीनिकासी व घोटाला और लखीसराय जिला प्रशासन के द्वारा मनरेगा मजदुरों को मजदुरी में कटौती बापस लेने,न्युनतम मजदुरी 168 रू0 करने,प्रतिदिन मजदुरी देने, 100 दिनों की देने और नहीं दिये जाने पर उस दिन का बेरोजगारी भता देने की मांग प्रदर्शन के माध्यम से किया गया ।
बाईट- संजय अनुरागी- माले नेता

वट सावित्री व्रत

आज बटबृक्ष के नीचे हजारों सुहागिनों ने अपने पति की दीर्धायु के लिए किया व्रत।
 आज बटबृक्ष के नीचे हजारों सुहागिन महिलाओं ने पारम्परिक परिधान  से सुज्जित होकर शान्ति.स्नेह और सद्भाव के साथ बटसावित्री पुजा किया। जिसमें बट बृक्ष के चारों ओर कच्चा धागा बान्धकर अपने पति की दीर्धायु होने की कामना किया।
 बहीं ब्राहम्णों के द्वारा वट सावित्री  के कथा सुना और उनके द्वारा किये गए पति वर्त धर्म की नियमानुकुल तरीकों से पुजा बिधि को किया । सुबह 8 बजे से लगातार बटबृक्ष के नीचे महिलाओं की जुटना जारी है।

बाईट. रागिनी देवी. श्रद्वालु महिला
बाईट. श्रद्वालु महिला
बाईट. रामरतन मिश्र. पंडित जी

Friday, 7 June 2013

बेशकिमती मुर्तियों की अनदेखी

बेशकिमती मुर्तियों की अनदेखी
लखीसराय थाना की पुलिस के गिरफत में है भगवान। दर्जनों बेशकिमती मुर्तियों को थाना के बाहर रख दिया गया है । जिनकी कभी पुजा-पाठ तक नहीं होती है । कहने को तो यह चोरों से बरामद की गई है यहां इसे लेजाने बाला कोई जमानतदार तक नहीं है । इसे ना तो थाना का मालखाना नसीव हुआ और नहीं कोई मंदिर । मजबुरी बस लखीसराय थाना की पहरेदारी करते है भगवान । रहना है तो कुछ करना ही पडेगा ।
लखीसराय में पालकालीन वेशकीमती मूर्तियों की अनदेखी हो रही है लखीसराय में 18वीं सदी के पालवंश कालिन सैकडों बेशकिमती काले पत्थर से बना देवी-देवताओं की मुर्ति जहाॅ -तहाॅ बिखरी पडी है।इस शहर में एक अदद् संग्रहालय तक नहीं है । नतीजतन समय-समय पर इस शहर और जिले के अन्य हिस्सों से मिलनेवाली दुर्लभ मूर्तियाॅ जहाॅ-तहाॅ विखरी पडी है । ऐसी मूर्तियों में से कई तो चोरी भी हो चुकी है ।लखीसराय शहर के साथ ही इस जिले के कई अन्य ग्राम ऐतिहासिक अवशेषों से भरे पडे है ।

बौद्व, सनातन,एवं जैन धर्म के संगम स्थल के रूप में अपने प्राचीन अवशेष और स्मृति पाषाण चिन्हों से अलंकृत इस शहर के रजौनाएवं चैकी ग्राम अपनी ऐतिहासिकता को आज भी स्पष्ट कर रहे है । वर्ष 1977 ई0 में चैकी ग्राम से प्राप्त विशाल शिवलिंग अब यहाॅ सुप्रसिद्व श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर का रूप ले चुका है ।इन ग्रामों में से समय-समय पर प्राप्त असंख्य दुर्लभ मूर्तियों में से कई चोरी का शिकार हो चुकी है । और इस चोरी के मामले लखीसराय थाना में दर्ज है । जो मूर्तियाॅ बची हुई है उनमें से कुछ को मंदिर कमिटी ने सहेजकर सुरक्षित कर रखा है । तो कुछ अब जहाॅ -तहाॅ बिखरी पडी हैं ।

 शहर का कवैया मुहल्ला,कालीपहाडी,लाली पहाडी,बालगुदर ग्राम,एवं जिले के कई अन्य ग्राम भी इतिहास के सुनहरे पन्नों में कैद हैं। यहा से भी यदा-कदा बेशकीमतीमूर्तिया मिलती रही है । इनमें से किसी को भी सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है ।
                   लखीसराय के ऐतिहासिकता को देखते हुए बर्ष 1981 में यहा एक किराये के मकान में संग्रहालय की स्थापना की गई थी । दो बर्षों के बाद इसे यहा से हटाकर जमुई ले जाया गया । राज्य के कला और संस्कृति विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार लखीसराय संग्रहालय कर्मियों के वेतन, किराये एवं अन्य मद में विभाग द्वारा प्रति वर्ष चार लाख रूपयों से अधिक की राशि मुहैया करायी जा रही है । विभागीय अधिकारी लखीसराय में जमीन या कोई भवन उपलब्ध कराये जाने के लिए समय -समय पर जिले के आलाधिकारीयों से सम्पर्क साधते रहे है ,  ताकि यहाॅ संग्रहालय चालू किया जा सकें , परन्तु अभीतक यह संभव न हो पाने के कारण प्राचीन दुर्लभ मूर्तियां जहां-तहां राम भरोसे बिखरी पडी है । लखीसराय  राजा इंद्रदमन के शासन काल में बसाया गया लखीसराय अपनी धरोहरों को बचाये रखने में भी अक्षम साबित हो रहा है. यहां के प्रबुद्धजनों ने पुरातत्व विभाग व जिला प्रशासन से धरोहरों को बचाने की गुहार लगायी है.
यहां उत्तर में गंगा नदी, पूरब में किऊल नदी, पश्चिम उत्तर कोने पर हरूहर नदी स्थित है. बाबा श्रृंगी ¬षि धाम से निकले मोरवे, महावीर की जन्मभूमि लछुवाड़ के जंगलों से निकली सोमे नदी, भूरहा नदी, बड़हिया टाल के 14 सोते और लखीसराय के 52 तालाब हैं.
लखीसराय जिले के पौराणिक स्थलों का स्थाई रूप से नामकरण या पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोई पहल राजनीतिक या प्रशासनिक तौर पर नहीं की जा रही है.
नहीं है संग्रहालय
यहां बर्बाद हो रही मूर्तियों के लिए एक संग्रहालय तक नहीं है. इस शहर को मुंगेर जिला से 03 जुलाई 1994 को बिहार सरकार की अधिसूचना जिला पुनर्गठन शाखा संख्या 123 के तहत जिला बनाया गया
  जिले में संग्रहालय की स्थापना के संबंध में ने बताया कि -फिलहाल जिला प्रशासन के पास इसका कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है । उन्होने बताया की, जहाॅ-तहाॅ पडी मूर्तियों की सुरक्षा के प्रबंध जिला प्रशासन करेगा