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Wednesday, 14 August 2013

श्रृंगिरिषी आश्रम

लखीसराय जिला के नक्सल प्रभावित चानन थाना क्षेत्र के जंगली एवं पहाडीयों के कन्द्राओं में श्रृंगिरिषी आश्रम अवस्थित है। जहां ऋषि
मुनियों का तपोभुमि हुआ करता था। और धने जंगल में भगवान श्रीराम के मुंहबोली बहनोई श्रृंगिरिषी का आश्रम था ।
जहां भगवान शंकर का विशाल शिवलिंग है। इसलिए इस जंगल में हजारों श्रद्वालु बिना कोई भय के महादेव पर जलाभिषेक कर रहे है।

यहां की प्राकृतिक छटा काफी मनोरम है। पहाडों की कन्द्राओं से निकला अविरल जल स्त्रोत की झरना से बहता पानी में लोग डुबकियां लगाकर लोग प्रफुल्लित होते है।
 

 सबसे बडी खासयित यह है कि यहां की पानी पाचन क्रिया को ठीक रखता है। किसी भी तरह की गरीष्ठ भोजन खाने के बाद भी यहां आधा धण्टा में भुख लग जाती है। यहां लोग सप्ताह भर रहकर जंगल में मंगल मनाते है। और भगवान शिव को जलाभिषेक करते है। ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से इस श्रृंगिरिषी आश्रम का बहुत बडी महत्व है। यहां आने के बाद शान्ति स्नेह और सद्भाव व शकुन महसुश होता है। सावन महिना में यहां प्रतिदिन भीड रहती है। जिला के श्रृंगिऱिषी घाम में आज 30 हजार श्रद्वालुओं ने शिवलिंग पर किया जलाभिषेंक ।
 

ज्ञात हो कि... बाल्मिकी रामायण और रामचरित्र मानस के अनुसार इस श्रृंगीरिषी आश्रम में त्रेतायुगिन राजा दशरथ के चारो पुत्र श्री राम, लक्षमण, भरत, शत्रुधन का मुंडन संस्कार हुआ था। यहां भगवान श्री राम अपने मुंहबोली बहन शांता के साथ महीनों रहकर इस मनोरम छटा का आनंद लिया था। शांता को राजा दशरथ ने गोद लिया था। और वो अंग राज के प्रतापी ब्राहमण रिषी के श्रृंगिव से विवाह रचाई थी । लखीसराय जिला के चानन थाना क्षेत्र के एक आश्रम में रहती थी। जो आज श्रृंगिरिषी धाम के नाम से प्रसिद्व है।

तुलसी रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ ने राम सहित सभीं राजकुमारों का पुत्रेष्ठी यज्ञोपवित संस्कार मुंडन के लिए इसी रास्ते से भगवान शिव की पुजाकर श्रृंगि रिषि के यहा गये थे जो श्रृंगि रिषि आश्रम लखीसराय से 9 किलोमिटर कि दुरी पर चानन प्रखंड में है। श्रृंगि रिषि की महिमा न्यारी और प्यारी है । इस मंदिर के धर्मस्थल जाने के लिए लखीसराय एवं किउल स्टेशन से रिक्शा, टमटम एवं टेक्सी मिलती है । यह स्टेशन से मात्र 9 किलोमिटर कि दुरी पर स्थित हैं । राजधानी पटना से 125 किलोमिटर पुरब राष्ट्रीय उच्च पथ नेशनल हाईवे 80 पर से लगभग 12 किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित हैं श्रृंगीरिषि आश्रम को रमणिक पर्यटन स्थल के रूप मे बिकसित करे तो यह लखीसराय जिले का प्रसिद्व धार्मिक स्थल के रूप में अच्छा राजस्व देने के साथ देश विदेश के मनाचित्र पर भी आ सकता है ।

 जहां भगवान शंकर का विशाल शिवलिंग है। इसलिए इस जंगल में हजारों श्रद्वालु बिना कोई भय के महादेव पर जलाभिषेक कर रहे है। यहां की प्राकृतिक छटा काफी मनोरम है। पहाडों की कन्द्राओं से निकला अविरल जल स्त्रोत की झरना से बहता पानी में लोग डुबकियां लगाकर लोग प्रफुल्लित होते है। सबसे बडी खासयित यह है कि यहां की पानी पाचन क्रिया को ठीक रखता है। किसी भी तरह की गरीष्ठ भोजन खाने के बाद भी यहां आधा धण्टा में भुख लग जाती है। यहां लोग सप्ताह भर रहकर जंगल में
मंगल मनाते है। और भगवान शिव को जलाभिषेक करते है। ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से इस श्रृंगिरिषी आश्रम का बहुत बडी महत्व है। यहां आने के बाद शान्ति स्नेह और सद्भाव व शकुन महसुश होता है। सावन महिना में यहां प्रतिदिन भीड रहती है। जिला के श्रृंगिऱिषी घाम में आज 30 हजार श्रद्वालुओं ने शिवलिंग पर किया जलाभिषेंक ।

ज्ञात हो कि... बाल्मिकी रामायण और रामचरित्र मानस के अनुसार इस श्रृंगीरिषी आश्रम में त्रेतायुगिन राजा दशरथ के चारो पुत्र श्री राम, लक्षमण, भरत, शत्रुधन का मुंडन संस्कार हुआ था। यहां भगवान श्री राम अपने मुंहबोली बहन शांता के साथ महीनों रहकर इस मनोरम छटा का आनंद लिया था। शांता को राजा दशरथ ने गोद लिया था। और वो अंग राज के प्रतापी ब्राहमण रिषी के श्रृंगिव से विवाह रचाई थी । लखीसराय जिला के चानन थाना क्षेत्र के एक आश्रम में रहती थी। जो आज श्रृंगिरिषी धाम के नाम से प्रसिद्व है।

तुलसी रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ ने राम सहित सभीं राजकुमारों का पुत्रेष्ठी यज्ञोपवित संस्कार मुंडन के लिए इसी रास्ते से भगवान शिव की पुजाकर श्रृंगि रिषि के यहा गये थे जो श्रृंगि रिषि आश्रम लखीसराय से 9 किलोमिटर कि दुरी पर चानन प्रखंड में है। श्रृंगि रिषि की महिमा न्यारी और प्यारी है । इस मंदिर के धर्मस्थल जाने के लिए लखीसराय एवं किउल स्टेशन से रिक्शा, टमटम एवं टेक्सी मिलती है । यह स्टेशन से मात्र 9 किलोमिटर कि दुरी पर स्थित हैं । राजधानी पटना से 125 किलोमिटर पुरब राष्ट्रीय उच्च पथ नेशनल हाईवे 80 पर से लगभग 12 किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित हैं श्रृंगीरिषि आश्रम को रमणिक पर्यटन स्थल के रूप मे बिकसित करे तो यह लखीसराय जिले का प्रसिद्व धार्मिक स्थल के रूप में अच्छा राजस्व देने के साथ देश विदेश के मनाचित्र पर भी आ सकता है ।

रामेश्वरम की शिवलिंग


लखीसराय जिला के नक्सल प्रभावित चानन थाना क्षेत्र के श्रंृगारपुर गांव में पहाडी क्षेत्रों के स्थित खेतों में हल से जुताई के दौरान देवाधि देव महादेव का अद्भुत शिवलिंग निकला ।
 जिसे लोग सक्षात भगवान रामेश्वरम की शिवलिंग से तुलना कर रहे है। लोगों का कहना है। कि यह शिवलिंग ऐतिहासिक एव पौराणिक शिवलिंग है।
 जो त्रेतायुग में राजा दशरथ अपने 4 पुत्रों को इसी रास्ते लेकर श्रंृगिरिषी आश्रम ले गए थे। जहां उनका मुंडन हुआ था। तो जाने के क्रम में इसी रास्ते में सिंगार पुर गांव पडता है।

जहां वो 1 दिन विश्राम किया था। और भगवान शिवलिंग को स्थापित कर पुजा अर्चना किये थें । जो आज यहां रामेश्वरम के नाम से प्रसिद्व हो गया है।

लखीसराय अशोक घाम श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर

लखीसराय अशोक घाम श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर


अशोकधाम के इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का फुलों के लहछों से सजाया गया और फिर मंदिर के विद्वान ब्राहाम्ण के वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रंृगारी पूजा किया गया आज का पूजा का विशेष महत्व है। फिर आम भक्तों के लिए सुबह 5 बजे पट खुला और भक्तों ने भी जलाभिषेक किया । लखीसराय जिले का नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या- 01 में अशोक घाम है, जो आज बिहार का देवघर कहलाता है अशोक घाम श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर सावन में काफी मनमोहक दृश्य देखा जा रहा है। भगवान श्रीराम द्वारा पुजित शिवलिंग आज सुबह 5 बजे से ही श्रावण माह का पूजा-अर्चना में भक्तगण लिन हो गये है वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव के शिवलिंग पर जलाभिषेक कर रहे है । अशोक धाम में भगवान शिव को जलार्पण के लिए लम्बी लाईन लग गई है। पुरे बिहार के साथ-साथ पुरे देश के कावरिया यहा बाबा भेालेनाथ पर जलाभिषेक करने आते है। और बाबा उनकी मुरादे पुरी करते है।

लखीसराय जिला के इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर अशोकधाम में 80 हजार भक्तों ने जलाभिषेक किया। शिव भक्तों का 1 किलोमीटर की लम्बी लाईन लगा है। भक्तों का आना जारी है । आज सवान की तीसरा सोमवारी के अबसर पर लाखों भक्तों के द्वारा शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का अनुमान है।
V.O 1..जिलाधिकारी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया की लगभग 1 महीने तक चलने वाले इस श्रावणी मेले की तैयारीया पुरी है। सुरक्षा के इस बार पुख्ता इंतजाम है। जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं। जगह-जगह लाईट व्यवस्था, स्वागत के लिए तोरणद्वार, पीने के लिए दर्जनों चापाकल लगाया गया है।
बाईट - अमरेन्द्र प्रसाद सिंह.. जिलाधिकारी सह अध्यक्ष मंदिर ट्स्ट
V.O2..लखीसराय पुलिस अधिक्षक राजीव मिश्रा ने कहा की बोधगया मंदिर आतंकी हमले के बाद यहां भी पुलिस ने हाईअर्लट कर रखा है। मंदिर में भक्तों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति कर दिया गया है। और अशोक धाम में एक चैकी भी शीध्र खोले जाने का प्रस्ताव है।
बाईट - राजीव मिश्रा ....लखीसराय पुलिस अधिक्षक
V.O3...यह मंदिर ऐतिहासिक और काफी पौराणिक धरोहर की मिशाल है यहाॅ त्रेता में भगवान श्रीराम द्वारा पुजा किया गया था तुलसी रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ ने राम सहित सभीं राजकुमारों का पुत्रेष्ठी यज्ञोपवित संस्कार मंुडन के लिए इसी रास्ते से भगवान शिव की पुजाकर श्रृंगि रिषि के यहा गये थे जो श्रृंगि रिषि आश्रम लखीसराय से 9 किलोमिटर कि दुरी पर चानन प्रखंड में है इसलिए श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव का महत्त्व भी है लेकिन अशोकधाम की महिमा न्यारी और प्यारी है

Saturday, 10 August 2013

बिन व्याही मां

लखीसराय जिला के नक्सल प्रभावित चानन थाना क्षेत्र के पचाम गांव में लिबु मलिक की एकलौती बेटी रिंकु कुमारी को गांव के ही विपिन भगत घर में घुसकर  जबरदस्ती बलात्कार किया । बिरोध करने और समाज में हल्ला करने पर उसने शादी का प्रलोभन का आश्वासन दिया। तब उसके परिजनों ने उसे छोड दिया । बस फिर क्या थी तब वो रोज  व रोज उसके घर आना-जाना शुरू हो गया । गांव के लोग भी समझ गए । इनसे अब रिश्ता बन गया है। ठीक नौ महिना के बाद रिंकु ने एक शिशु को जन्म दिया । बच्चे का जन्म होने के बाद विपिन शादी करने से मना कर दिया । अब वो इन्साफ के लिए साल भर से दर-बे-दर की ठोकरें खाती फिर रही है। इस संदर्भ में उसने कई बार चानन थाना गई परन्तु वहां केश दर्ज नहीं किया गया । फिर एस0पी0 से न्याय की गुहार लगाई ।
तब जा के एस0 पी0 के आदेश पर अनुसुचित जन जाति थाना में मामला दर्ज किया गया । जिसका केश संख्या 03 - 2013 है। पुलिस जांच की बात कहकर 6 महीना से पिडिता को दौडा रही है। वो बिन व्याही मां बनकर अपने गोद में लाडले को लेकर न्याय की गुहार लगा रही है। लेकिन उसे न्याय नहीं मिला है। उसके बच्चे को बाप का नाम चाहिए । वो समाज में भी मुंह दिखाने लायक नहीं है। वो शरम से जी-जी कर मर रही है। बिन व्याही मां बनकर दर बेदर की ठोकर खाती रिंकु कभी थाना  तो कभी कोर्ट तो कभी समाज से न्याय की  भीख मांग रही है। बच्चे भुख रहते है। भुखी पेट बच्चा चिल्लाता रहता है। कोई देखने वाला नहीं है। आखिर ये क्या कर सकती है।
V.O 1...पिडिता रिंकु कुमारी ने बताई की सरस्वती पुजा के समय उसे बाई जबरदस्ती विपिन भगत उससे बलात्कार किया । और शादी का लोभ देकर हमारा रोज शारीरिक शोषण करता रहा । और बच्चा हो गया तो वो भाग गया है। शादी नहीं किया ।   बिन व्याही मां बन गई हुं ।
बाईट- रिंकु कुमारी - पिडिता  बिन व्याही मां
V.O 2...जब इस संदर्भ में विपिन भगत से मिडिया ने बात किया तो उसने बताया कि यह आरोप निराधार है।  रिंकु कुमारी नक्सली लडकी है। बाहर के होटलों में जाकर शरीर बेचती है। मै इसे कुछ नहीं किया हंु।
बाईट- विपिन भगत
V.O 3...गांव के सरपंच रामचन्द्र यादव ने बताया कि रिंकु कुमारी बन्धु बगिचा की मुल निवासी है। उसके परिजन यहां सब्जी और मुली बेचकर जीवन यापन के लिए आई थी । जो सिंगारी मंदिर के पास रहती है। इस संदर्भ में हम लोगो ने पंचायत किया था। कि शादी किया है। तो बच्चा रखेगा । परन्तु वो नहीं मान रहा है।
बाईट- रामचन्द्र यादव -गांव के सरपंच 

कजरा थाना का हाल बेहाल

लखीसराय जिले के कजरा थाना का हाल बेहाल है।नक्सल प्रभावित कजरा थाना के भवन बिल्कुल जर्जर है काॅग्रेस के किराये की भवन में चल रहा है। जिसका छत खप्पडैल का है दिवार सन 1950 0 में मिटटी से बना हुआ है जो कभी भी धराशाही हो सकता है।उसी जर्जर भवन में पुलिस रहने से लेकर खाना-पीना तक करते है। जब कभी अपराधी को थाना में लाया जाता है। तो उसे पेड से बाॅधकर रखा जाता है। काफी परेशानीयों के बीच यहां के पुलिस डियुटी कर रहे है। गर्मी में धुप, बरसात में पानी और संसाधन की कमी के कारण पुलिस विवस है। जिला पुलिस कप्तान का जरा भी ध्यान नही है। पूर्व के इतिहास के गलियारे में जाने के बाद भी पुलिस सोया है।आमलोगों की सुरक्षा की भरोसा दिलाकर थाना प्रभारी और सभी पुलिसकर्मी स्वंय को असुरक्षित महसुस कर रहे है। इस भवन का स्थिति ठिक नहीं रहने के कारण कई तरह के रोगों का भी शिकार होना पडता हैं। नकसली, अपराधी, सर्प और विच्छु जैसे खतरनाक डर के साये में पुलिस का डियुटी करना मजबुरी हो गया है।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखा जाय तो इसमें भी कजरा थाना कमजोर है। 3 साल पहले कानीमोह के जंगल में हुई मुठभेड़ में एसआइ भूलन प्रसाद यादव समेत सात पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे।इनमें बीएमपी-10 के हवलदार नर्वदेश्वर सिंह, सिपाही सतीश कुमार, राम बाबू मिस्त्री, शैलेश कुमार, कन्हैया प्रसाद सिंह एवं मोहजीदन अंसारी शामिल हैं। चार अन्य जवानों को नक्सलियों ने बंधक बना लिया था। इस दौरान नक्सली जवानों के 30 हथियार भी अपने साथ ले गए थे। चार दिनों बाद बंधक बीएमपी के अवर निरीक्षक लुकस टेटे की भी हत्या नक्सलियों ने कर दी थी। तीन अन्य बंधकों एसआइ अभय प्रसाद यादव, पीएसआइ रूपेश कुमार सिन्हा एवं बीएमपी के हवलदार मु. एहसान खान नौंवे दिन मुक्त हुए थे। कजरा में पुलिस और नक्सलियों के बीच देश भर में सुर्खियों में रही इस मुठभेड़ वर्ष 2010 में 29 अगस्त को हुई मुठभेड़ में शामिल नक्सली एक-एक कर जेल से छूट रहे हैं। इस घटना के बाद नक्सलियों का मनोबल इतना बढ़ा कि पुलिस को चुनौती देते हुए सामानांतर शासन चला रहे हैं।जेल से जमानत पर छूटे नक्सली धड़ल्ले से ठेकेदारों से लेवी वसूल रहे हैं। पहाड़ और जंगल खनन पर भी इनका शासन है। जिला मुख्यालय स्थित पुलिस केंद्र को टारगेट कर धमकी भरा पर्चा हाल के दिनों में भी फेंका गया। ऐसे में नक्सलियों के विरुद्ध पुलिस की सुस्त कार्रवाई से संगठन का विस्तार तेजी से हो रहा है। फिर भी कजरा थाना आज काॅग्रेस कार्यालय के किराये के मकान में जैसे-तैसे चल रही है। थाना का हाल बेहाल है।

बाईट-पवन कुमार झा- कजरा थानाअध्यक्ष