लखीसराय जिला के नक्सल प्रभावित चानन थाना क्षेत्र के जंगली एवं पहाडीयों के कन्द्राओं में श्रृंगिरिषी आश्रम अवस्थित है। जहां ऋषि
मुनियों का तपोभुमि हुआ करता था। और धने जंगल में भगवान श्रीराम के मुंहबोली बहनोई श्रृंगिरिषी का आश्रम था ।
जहां भगवान शंकर का विशाल शिवलिंग है। इसलिए इस जंगल में हजारों श्रद्वालु बिना कोई भय के महादेव पर जलाभिषेक कर रहे है।
यहां की प्राकृतिक छटा काफी मनोरम है। पहाडों की कन्द्राओं से निकला अविरल जल स्त्रोत की झरना से बहता पानी में लोग डुबकियां लगाकर लोग प्रफुल्लित होते है।
सबसे बडी खासयित यह है कि यहां की पानी पाचन क्रिया को ठीक रखता है। किसी भी तरह की गरीष्ठ भोजन खाने के बाद भी यहां आधा धण्टा में भुख लग जाती है। यहां लोग सप्ताह भर रहकर जंगल में मंगल मनाते है। और भगवान शिव को जलाभिषेक करते है। ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से इस श्रृंगिरिषी आश्रम का बहुत बडी महत्व है। यहां आने के बाद शान्ति स्नेह और सद्भाव व शकुन महसुश होता है। सावन महिना में यहां प्रतिदिन भीड रहती है। जिला के श्रृंगिऱिषी घाम में आज 30 हजार श्रद्वालुओं ने शिवलिंग पर किया जलाभिषेंक ।
ज्ञात हो कि... बाल्मिकी रामायण और रामचरित्र मानस के अनुसार इस श्रृंगीरिषी आश्रम में त्रेतायुगिन राजा दशरथ के चारो पुत्र श्री राम, लक्षमण, भरत, शत्रुधन का मुंडन संस्कार हुआ था। यहां भगवान श्री राम अपने मुंहबोली बहन शांता के साथ महीनों रहकर इस मनोरम छटा का आनंद लिया था। शांता को राजा दशरथ ने गोद लिया था। और वो अंग राज के प्रतापी ब्राहमण रिषी के श्रृंगिव से विवाह रचाई थी । लखीसराय जिला के चानन थाना क्षेत्र के एक आश्रम में रहती थी। जो आज श्रृंगिरिषी धाम के नाम से प्रसिद्व है।
तुलसी रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ ने राम सहित सभीं राजकुमारों का पुत्रेष्ठी यज्ञोपवित संस्कार मुंडन के लिए इसी रास्ते से भगवान शिव की पुजाकर श्रृंगि रिषि के यहा गये थे जो श्रृंगि रिषि आश्रम लखीसराय से 9 किलोमिटर कि दुरी पर चानन प्रखंड में है। श्रृंगि रिषि की महिमा न्यारी और प्यारी है । इस मंदिर के धर्मस्थल जाने के लिए लखीसराय एवं किउल स्टेशन से रिक्शा, टमटम एवं टेक्सी मिलती है । यह स्टेशन से मात्र 9 किलोमिटर कि दुरी पर स्थित हैं । राजधानी पटना से 125 किलोमिटर पुरब राष्ट्रीय उच्च पथ नेशनल हाईवे 80 पर से लगभग 12 किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित हैं श्रृंगीरिषि आश्रम को रमणिक पर्यटन स्थल के रूप मे बिकसित करे तो यह लखीसराय जिले का प्रसिद्व धार्मिक स्थल के रूप में अच्छा राजस्व देने के साथ देश विदेश के मनाचित्र पर भी आ सकता है ।
जहां भगवान शंकर का विशाल शिवलिंग है। इसलिए इस जंगल में हजारों श्रद्वालु बिना कोई भय के महादेव पर जलाभिषेक कर रहे है। यहां की प्राकृतिक छटा काफी मनोरम है। पहाडों की कन्द्राओं से निकला अविरल जल स्त्रोत की झरना से बहता पानी में लोग डुबकियां लगाकर लोग प्रफुल्लित होते है। सबसे बडी खासयित यह है कि यहां की पानी पाचन क्रिया को ठीक रखता है। किसी भी तरह की गरीष्ठ भोजन खाने के बाद भी यहां आधा धण्टा में भुख लग जाती है। यहां लोग सप्ताह भर रहकर जंगल में मंगल मनाते है। और भगवान शिव को जलाभिषेक करते है। ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से इस श्रृंगिरिषी आश्रम का बहुत बडी महत्व है। यहां आने के बाद शान्ति स्नेह और सद्भाव व शकुन महसुश होता है। सावन महिना में यहां प्रतिदिन भीड रहती है। जिला के श्रृंगिऱिषी घाम में आज 30 हजार श्रद्वालुओं ने शिवलिंग पर किया जलाभिषेंक ।
ज्ञात हो कि... बाल्मिकी रामायण और रामचरित्र मानस के अनुसार इस श्रृंगीरिषी आश्रम में त्रेतायुगिन राजा दशरथ के चारो पुत्र श्री राम, लक्षमण, भरत, शत्रुधन का मुंडन संस्कार हुआ था। यहां भगवान श्री राम अपने मुंहबोली बहन शांता के साथ महीनों रहकर इस मनोरम छटा का आनंद लिया था। शांता को राजा दशरथ ने गोद लिया था। और वो अंग राज के प्रतापी ब्राहमण रिषी के श्रृंगिव से विवाह रचाई थी । लखीसराय जिला के चानन थाना क्षेत्र के एक आश्रम में रहती थी। जो आज श्रृंगिरिषी धाम के नाम से प्रसिद्व है।
तुलसी रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ ने राम सहित सभीं राजकुमारों का पुत्रेष्ठी यज्ञोपवित संस्कार मुंडन के लिए इसी रास्ते से भगवान शिव की पुजाकर श्रृंगि रिषि के यहा गये थे जो श्रृंगि रिषि आश्रम लखीसराय से 9 किलोमिटर कि दुरी पर चानन प्रखंड में है। श्रृंगि रिषि की महिमा न्यारी और प्यारी है । इस मंदिर के धर्मस्थल जाने के लिए लखीसराय एवं किउल स्टेशन से रिक्शा, टमटम एवं टेक्सी मिलती है । यह स्टेशन से मात्र 9 किलोमिटर कि दुरी पर स्थित हैं । राजधानी पटना से 125 किलोमिटर पुरब राष्ट्रीय उच्च पथ नेशनल हाईवे 80 पर से लगभग 12 किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित हैं श्रृंगीरिषि आश्रम को रमणिक पर्यटन स्थल के रूप मे बिकसित करे तो यह लखीसराय जिले का प्रसिद्व धार्मिक स्थल के रूप में अच्छा राजस्व देने के साथ देश विदेश के मनाचित्र पर भी आ सकता है ।
मुनियों का तपोभुमि हुआ करता था। और धने जंगल में भगवान श्रीराम के मुंहबोली बहनोई श्रृंगिरिषी का आश्रम था ।
जहां भगवान शंकर का विशाल शिवलिंग है। इसलिए इस जंगल में हजारों श्रद्वालु बिना कोई भय के महादेव पर जलाभिषेक कर रहे है।
यहां की प्राकृतिक छटा काफी मनोरम है। पहाडों की कन्द्राओं से निकला अविरल जल स्त्रोत की झरना से बहता पानी में लोग डुबकियां लगाकर लोग प्रफुल्लित होते है।
सबसे बडी खासयित यह है कि यहां की पानी पाचन क्रिया को ठीक रखता है। किसी भी तरह की गरीष्ठ भोजन खाने के बाद भी यहां आधा धण्टा में भुख लग जाती है। यहां लोग सप्ताह भर रहकर जंगल में मंगल मनाते है। और भगवान शिव को जलाभिषेक करते है। ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से इस श्रृंगिरिषी आश्रम का बहुत बडी महत्व है। यहां आने के बाद शान्ति स्नेह और सद्भाव व शकुन महसुश होता है। सावन महिना में यहां प्रतिदिन भीड रहती है। जिला के श्रृंगिऱिषी घाम में आज 30 हजार श्रद्वालुओं ने शिवलिंग पर किया जलाभिषेंक ।
ज्ञात हो कि... बाल्मिकी रामायण और रामचरित्र मानस के अनुसार इस श्रृंगीरिषी आश्रम में त्रेतायुगिन राजा दशरथ के चारो पुत्र श्री राम, लक्षमण, भरत, शत्रुधन का मुंडन संस्कार हुआ था। यहां भगवान श्री राम अपने मुंहबोली बहन शांता के साथ महीनों रहकर इस मनोरम छटा का आनंद लिया था। शांता को राजा दशरथ ने गोद लिया था। और वो अंग राज के प्रतापी ब्राहमण रिषी के श्रृंगिव से विवाह रचाई थी । लखीसराय जिला के चानन थाना क्षेत्र के एक आश्रम में रहती थी। जो आज श्रृंगिरिषी धाम के नाम से प्रसिद्व है।
तुलसी रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ ने राम सहित सभीं राजकुमारों का पुत्रेष्ठी यज्ञोपवित संस्कार मुंडन के लिए इसी रास्ते से भगवान शिव की पुजाकर श्रृंगि रिषि के यहा गये थे जो श्रृंगि रिषि आश्रम लखीसराय से 9 किलोमिटर कि दुरी पर चानन प्रखंड में है। श्रृंगि रिषि की महिमा न्यारी और प्यारी है । इस मंदिर के धर्मस्थल जाने के लिए लखीसराय एवं किउल स्टेशन से रिक्शा, टमटम एवं टेक्सी मिलती है । यह स्टेशन से मात्र 9 किलोमिटर कि दुरी पर स्थित हैं । राजधानी पटना से 125 किलोमिटर पुरब राष्ट्रीय उच्च पथ नेशनल हाईवे 80 पर से लगभग 12 किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित हैं श्रृंगीरिषि आश्रम को रमणिक पर्यटन स्थल के रूप मे बिकसित करे तो यह लखीसराय जिले का प्रसिद्व धार्मिक स्थल के रूप में अच्छा राजस्व देने के साथ देश विदेश के मनाचित्र पर भी आ सकता है ।
जहां भगवान शंकर का विशाल शिवलिंग है। इसलिए इस जंगल में हजारों श्रद्वालु बिना कोई भय के महादेव पर जलाभिषेक कर रहे है। यहां की प्राकृतिक छटा काफी मनोरम है। पहाडों की कन्द्राओं से निकला अविरल जल स्त्रोत की झरना से बहता पानी में लोग डुबकियां लगाकर लोग प्रफुल्लित होते है। सबसे बडी खासयित यह है कि यहां की पानी पाचन क्रिया को ठीक रखता है। किसी भी तरह की गरीष्ठ भोजन खाने के बाद भी यहां आधा धण्टा में भुख लग जाती है। यहां लोग सप्ताह भर रहकर जंगल में मंगल मनाते है। और भगवान शिव को जलाभिषेक करते है। ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से इस श्रृंगिरिषी आश्रम का बहुत बडी महत्व है। यहां आने के बाद शान्ति स्नेह और सद्भाव व शकुन महसुश होता है। सावन महिना में यहां प्रतिदिन भीड रहती है। जिला के श्रृंगिऱिषी घाम में आज 30 हजार श्रद्वालुओं ने शिवलिंग पर किया जलाभिषेंक ।
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तुलसी रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ ने राम सहित सभीं राजकुमारों का पुत्रेष्ठी यज्ञोपवित संस्कार मुंडन के लिए इसी रास्ते से भगवान शिव की पुजाकर श्रृंगि रिषि के यहा गये थे जो श्रृंगि रिषि आश्रम लखीसराय से 9 किलोमिटर कि दुरी पर चानन प्रखंड में है। श्रृंगि रिषि की महिमा न्यारी और प्यारी है । इस मंदिर के धर्मस्थल जाने के लिए लखीसराय एवं किउल स्टेशन से रिक्शा, टमटम एवं टेक्सी मिलती है । यह स्टेशन से मात्र 9 किलोमिटर कि दुरी पर स्थित हैं । राजधानी पटना से 125 किलोमिटर पुरब राष्ट्रीय उच्च पथ नेशनल हाईवे 80 पर से लगभग 12 किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित हैं श्रृंगीरिषि आश्रम को रमणिक पर्यटन स्थल के रूप मे बिकसित करे तो यह लखीसराय जिले का प्रसिद्व धार्मिक स्थल के रूप में अच्छा राजस्व देने के साथ देश विदेश के मनाचित्र पर भी आ सकता है ।






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