शहीद्व नीरज को नही मिला न्याय !
लखीसराय जिले के सिंगारपुर गांव की कहानी है जहां कई सेना के जवान अपने देश पे मर मिटने की कहानी लिखी है कई ऐसे युवक है जो आज भी अपने देश के लिए मर मिटने के लिए सेना मेंतैनात है । पर उन सेनाओं के साथ भारत सरकार काफी धोखा दिया है जिन्होने अपने वतन को लेकर अपनी जान की कुर्बानी कर दिया है। ऐसा ही एक शहीद्व कारगिल युद्व में नीरज की कहानी है जो 12 दिसम्बर 1999 में देश के लिए जान दे दिया । इस द्यटना के बाद कई बिहार के मत्रियों ने इनके परिवार को अश्वासन बडे शब्दो में दिया था पर आज नीरज के परिवार मेंसही भोजन खाने-पीनेको ललायित है । नीरज की शादी 1994 में हुआ था तीन साल के बाद अपने विवाहित पत्नी राधा को अपने घर लाने के एक साल बाद प्रथम पुत्री शीलु के जन्म के बाद ही यह अपने देश की रक्षा के लिए शहीद्व हो गये है लेकिन इनकी पत्नी को क्या मालुम था कि नीरज से दुबारा मिलना न गवारा हुआ । ......................................................
ज्ञात हो कि पिछले बिहार सरकार के द्वारा इन परिवार को कई छोटे मोटे लाभ मिलना शुरू हो गया लेकिन बिहार सरकार के द्वारा कई विकास घोषना के बाद भी आज तक न ही सिंगारपुर गांव में शहीद्व द्वार को पुरा किया गया और न ही शहीद्व भवन को निर्माण किया गया रही बात नीरज के नाम पर स्कुल का संचालन करने की बात तो स्कुल का संचालन किया गया पर शहीद्व नीरज के नाम पर स्कुल का नामांकन नही किया गया।
लखीसराय जिले के सिंगारपुर गांव की कहानी है जहां कई सेना के जवान अपने देश पे मर मिटने की कहानी लिखी है कई ऐसे युवक है जो आज भी अपने देश के लिए मर मिटने के लिए सेना मेंतैनात है । पर उन सेनाओं के साथ भारत सरकार काफी धोखा दिया है जिन्होने अपने वतन को लेकर अपनी जान की कुर्बानी कर दिया है। ऐसा ही एक शहीद्व कारगिल युद्व में नीरज की कहानी है जो 12 दिसम्बर 1999 में देश के लिए जान दे दिया । इस द्यटना के बाद कई बिहार के मत्रियों ने इनके परिवार को अश्वासन बडे शब्दो में दिया था पर आज नीरज के परिवार मेंसही भोजन खाने-पीनेको ललायित है । नीरज की शादी 1994 में हुआ था तीन साल के बाद अपने विवाहित पत्नी राधा को अपने घर लाने के एक साल बाद प्रथम पुत्री शीलु के जन्म के बाद ही यह अपने देश की रक्षा के लिए शहीद्व हो गये है लेकिन इनकी पत्नी को क्या मालुम था कि नीरज से दुबारा मिलना न गवारा हुआ । ......................................................
ज्ञात हो कि पिछले बिहार सरकार के द्वारा इन परिवार को कई छोटे मोटे लाभ मिलना शुरू हो गया लेकिन बिहार सरकार के द्वारा कई विकास घोषना के बाद भी आज तक न ही सिंगारपुर गांव में शहीद्व द्वार को पुरा किया गया और न ही शहीद्व भवन को निर्माण किया गया रही बात नीरज के नाम पर स्कुल का संचालन करने की बात तो स्कुल का संचालन किया गया पर शहीद्व नीरज के नाम पर स्कुल का नामांकन नही किया गया।
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