BREKING NEWS

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Sunday, 6 October 2013

आस्था की कलश

LAKHISARAI se

Ranjit Kumar ki Report

Slug.. Aastha ka Kalus

Feed from ftp

Date..07.10.2013
Anchor Link... आज जगतजननी जगदम्बा की 3sra पूजा है ! शारदीय नवरात्र शनिवार से शुरू हो गया। प्रथम दिन देवी के शैलपुत्री रूप की पूजा-अर्चना की गई। इस दिन पूजा पंडालों, मंदिरों एवं घरों में कलश की स्थापना की गई। अब नौ दिनों तक दुर्गा सप्तसती के पाठ से क्षेत्र गुंजायमान होगा। 14 अक्टूबर को विजयादशमी है। पूजा को लेकर विभिन्न पूजा समिति एवं घरों में शक्ति की देवी की आराधना पहले ही दिन चरम पर रही।

लखीसराय जिला के सुदुरवर्ती इलाका गोविन्दबिगहा शाम टोला में एक व्यक्ति अपने सीना पर कलश स्थापन कर अनवरत माता की ध्यान में है पुरे गाॅव में इस आस्था की कलश स्थापना की खुब चर्चा है स्वंय तारणी भगत जो अपने छाती पर कलश स्थापना कर रखा है उनका कहना है कि मुझे माता जगतजननी जगदम्बा और खप्परबाली काली सपने में आती थी और मुझ से खुन माॅगती थी एक दिन माॅ ने कहा कि तुम अपने छाती पर नवरात्रा करों तुम्हारा और इस गाॅव का कल्याण होगा और तब से मै प्रण लिया और कलश स्थपना कर लिया है आस्था और विश्वास ने भक्ति को एक नया अयाम दिया है और भक्त माता के नामपर भुखे-प्यासे अपने छातीपर कलश स्थापना कर रखा है

बहीं शहर के बडी दुर्गा स्थान और छोटी दुर्गा स्थान में पारंम्परिक तरीके से वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ जगतजननी जगदम्बा की पुजा पाठ शुरू है। लोग आस्था और विश्वास के साथ माता की दरवार में हाजिरी लगा रहे है। जबकी मुर्तिकार माता की अन्तिम रूप को संवारने जुटा है।

बाईट- तारणी भगत

दशम महाविद्या की अधिष्ठात्री देवी हैं त्रिपुर सुंदरी

Bihar
दशम महाविद्या की अधिष्ठात्री देवी हैं त्रिपुर सुंदरी


Lakhisarai se Ranjit Kumar " Samrat''

Mob N0 : 9955217600
Slug..Tripur bala Sundari Jagdamba Sthan


Date..07.10.13..feed from ftp
Anchorlink..लखीसराय जिले का बडहिया थाना क्षेत्र के जगत जननी जगदम्बा महारानी स्थान में नवरात के अबसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाला त्रिपुर सुंदरी जगत जननी जगदम्बा का विशेष पूजा. अर्चना किया जा रहा है।



बडहिया नगरी में मां की उपासना एक और प्रमुख केंद्र है त्रिपुर सुंदरी देवी का मंदिर। यहां भक्तों को शक्ति की उपासना का सौभाग्य भी मिलता है। नवरात्र में देवी शक्ति जागरण को विशेष अनुष्ठान होता है।मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। इन दिनों मंदिर शक्ति जागरण का विशेष अनुष्ठान चल रहा है। सप्तमी को मां का जागरण होगा जिसके साथ शक्ति जागरण का अनुष्ठान पूर्ण होगा।

पुजारी महाराज ने बताया कि त्रिपुर सुंदरी जीवात्मा में भी विद्यमान है। जीवात्मा में इड़ाए पिंगलाए सुषुम्णा रूप में विद्यमान है। ऐसे ही देवताओं में ब्रहमाए विष्णुए महेशए देवियों में महालक्ष्मीए महा सरस्वतीए महाकाली और प्रकृति में सद्ए चित्त और आनंद रूप में विद्यमान है। इन्हें शिव की शक्ति माना जाता है। इन्हीं से शिवलिंग ज्योर्तिमय होते हैं। महाराज ने बताया कि देवी की दशम महाविद्या की अधिष्ठात्री भी त्रिपुर सुंदरी है। देवी साधक शक्ति जागरण के लिए त्रिपुर सुंदरी की उपासना अवश्य करते हैं।मां के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। भगवती की उपासना से धनए वैभवए सुखए शांति की प्राप्ति होती है। शक्ति की देवी दुर्गा की आराधना का अपना महत्व है।

व्रत रखे लोगों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सिद्धपीठों में मां के समक्ष शीश नवाकर आशीष लिया। कुछ अखंड ज्योति जलाकर मां की आराधना में लीन हैं।

लखीसराय जिला के बडहिया गंगा किनारे प्रमुख धार्मिक स्थल माॅ बाला त्रिपुर सुन्दरी जगत जननी जगदम्बा की अद्भुत नवपिण्डी आदिकाल में माता की भक्त श्रीधर ओझा ने गंगा में ध्यान के दरम्यान देवाधिदेव भगवान शिव जब आकाश मार्ग से सती की जलती हुई अवस्था में कैलाश पर्वत ले जाने के दरम्यान उनके शरीर जला हुआ कुछ अंश गंगा में गिरा । वही तेज अग्नि स्वरूपा जगतजननी महारानी जगदम्बा को स्थापित किया किया गया । और उसी दिन से यहां प्रत्येक हिन्दु नवरात्री में महारानी स्थान में विशेष पुजा.अर्चना किया जाता है। ज्ञात हो कि शिव पुराण के अनुसार यही श्रीधर ओझा जम्मुकश्मीर में माता बैष्णों को स्थापित किये थे। आज के दिन से लगातार भक्तों की भीड बढता ही जा रहा है।

बाईट...... पुजारी महाराज

बाईट .... अमरेश कु0 अनीष ....भक्त

दुर्गा मां आरती

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके

शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी जय अम्बे गौरी मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रबदन नीको जय अम्बे गौरी कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै रक्त पुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै जय अम्बे गौरी केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्परधारी सुर नर मुनिजन सेवक, तिनके दुखहारी जय अम्बे गौरी कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति जय अम्बे गौरी शुम्भ निशुम्भ विडारे, महिषासुर घाती धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती जय अम्बे गौरी चण्ड मुण्ड संघारे, शोणित बीज हरे मधुकैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे जय अम्बे गौरी ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी जय अम्बे गौरी चौसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरुं बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु जय अम्बे गौरी तुम हो जग की माता, तुम ही हो भर्ता भक्तन की दु: हरता, सुख-सम्पत्ति करता जय अम्बे गौरी भुजा चार अति शोभित, खड़ग खप्परधारी मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी जय अम्बे गौरी कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति जय अम्बे गौरी श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावै कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै जय अम्बे गौरी

ब्रह्माचारिणी पूजन

नवरात्रि का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों [कुमार, पार्वती और काली], अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों की पूजा करते हैं।

वासन्तिक नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा के उन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है। माता के इन नौ रूपों को नवदुर्गा के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के इन्हीं नौ दिनों पर मां दुर्गा के जिन नौ रूपों का पूजन किया जाता है वे हैं पहला शैलपुत्री, दूसरा ब्रह्माचारिणी, तीसरा चन्द्रघन्टा, चौथा कूष्माण्डा, पांचवा स्कन्द माता, छठा कात्यायिनी, सातवां कालरात्रि, आठवां महागौरी, नौवां सिद्धिदात्री।

माता ब्रह्मचारिणी की पूजा-


नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना का विधान है। देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है। देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है, तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता है।

देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय है। मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से द्वितीय शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी का है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी। यह देवी शांत और निमग्न होकर तप में लीन हैं। मुख पर कठोर तपस्या के कारण तेज और कांति का ऐसा अनूठा संगम है जो तीनों लोको को उजागर कर रहा है। देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला है और बायें हाथ में कमण्डल होता है। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप हैं। इस देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा।

पूजा विधि-

देवी ब्रह्मचारिणी जी की पूजा का विधान इस प्रकार है, सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों योगिनियों को कलश में आमंत्रित किया है उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, मधु से स्नान करायें देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें। इनकी पूजा के पश्चात माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करें।

देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें। इसके पश्चात् देवी को पंचामृत स्नान करायें और फिर भांति भांति से फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें देवी को लाल फूल काफी पसंद है। घी कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करें आवाहनं जानामि जानामि वसर्जनं, पूजां चैव जानामि क्षमस्व परमेश्वरी. ब्रह्मचारिणी की ध्यान- वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।

जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।

धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।

पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ मां का मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। ब्रह्मचारिणी की स्तोत्र पाठ- तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।

ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।

शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥ ब्रह्मचारिणी की कवच- त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी।

अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी कपोलो॥ पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥

षोडशी सदापातु नाभो गृहो पादयो। अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी।

देवी ब्रह्मचारिणी कथा-

माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्‍‌नी बनी। जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता है। जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है।


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Tags: Navratri 2013, Navratri, Navratri Puja, durga puja, brahmacharini mata

Tuesday, 1 October 2013

प्रोफेशनल रिश्ते

प्रोफेशनलिज्म का पहला नियम है कि ऑफिस के रिश्तों को घर तक नहीं ले जाना चाहिए। लेकिन ऑफिस में घंटों साथ बिताने पर रिश्ते निजी स्तर तक आ ही जाते हैं। ऐसे ही रिश्तों को ऑफिस स्पाउस कहते हैं। इन रिश्तों के आपके करियर पर सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं। हम बता रहे हैं कैसे।
आपको क्या पसंद है और क्या नापसंद, आपकी आदतें, आपकी कमजोरियां और आपके गहरे राजों को बखूबी समझने वाला अगर कोई व्यक्ति आपके साथ ज्यादा से ज्यादा समय गुजारे तो नजदीकियां आना स्वाभाविक है। कुछ ऐसे ही होते हैं 'ऑफिस स्पाउस'। ऑफिस के ड्यूटी ऑवर्स के दौरान किसी खास से कुछ ऐसी केमिस्ट्री बन जाती है कि काम करने में और भी ज्यादा मन लगता है।

लांग वर्किग ऑवर्स आजकल लगभग हर प्रोफेशन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। और साथ ही बढ़ते जा रहे हैं प्रोफेशनल रिश्तों के दायरे। ऑफिस की चहारदीवारी में पनपते हैं निजी रिश्ते। एक सर्वे के अनुसार एक ही ऑफिस में काम करने वाले स्त्री-पुरुष कई बार इतने करीब हो जाते हैं कि उनमें पति-पत्नी जैसा संबंध विकसित होने लगता है। ऐसे रिश्तों में पार्टनर्स को 'ऑफिस स्पाउस' कहते हैं। हिंदी फिल्मों में इस कॉन्सेप्ट को बखूबी प्रयोग किया गया है। अब्बास-मस्तान की फिल्म 'रेस' में कट्रीना कैफ और सैफ अली खान व अनिल कपूर और समीरा रेड्डी के बीच भी ऐसा ही रिश्ता दिखाया गया है।
क्या होते हैं ऑफिस स्पाउस?
अगर आप भी अपने ऑफिस में विपरीत सेक्स के किसी व्यक्ति पर बेहद भरोसा करते हों, उनसे अपने सबसे खास राज शेयर करते हों, उनके साथ हंसी-मजाक करते हों या उनके बिना आपका ऑफिस का जीवन ठहर सा जाए तो समझिए कि आपके पास भी एक 'ऑफिस स्पाउस' है। ऑफिस के 12-14 घंटों के वर्क प्रेशर के बीच अगर कोई आपके लिए एक शॉक-एब्जॉर्बर का काम करता है। भावनात्मक सहयोग देने के साथ वह आपकी केयर करता है और विपरीत सेक्स का है तो उसके प्रति आकर्षण पनपना स्वाभाविक है। सर्वे की मानें तो ऑफिस स्पाउसेज की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक तो लगभग 32 प्रतिशत कामकाजी लोग ऑफिस स्पाउस की बात मानते हैं। वे मानते हैं कि ऑफिस में उनका अॅपोजिट सेक्स के व्यक्ति के प्रति आकर्षण है। वे मानते हैं कि ऑफिस में उनका एक खास रिश्ता है जो उनके निजी जीवन के इतर उनके जीवन में बेहद अहम जगह रखता है। ऐसे रिश्तों में डेटिंग, हल्का-फुल्का फ्लर्ट और कुछ हद तक सेक्स भी जगह बना लेता है। लेकिन मनोवैज्ञानिक इस कॉन्सेप्ट से उतना इलेफाक नहीं रखते जितनी तेजी से 'ऑफिस स्पाउस' टर्म का प्रयोग प्रचलन में आ रहा है।
मनोवैज्ञानिक समीर पारेख कहते हैं, 'ऑफिस स्पाउस शब्द का प्रयोग अपने आपमें गलत है। स्पाउस शब्द का संबंध कमिटमेंट से होता है।' गौरतलब है कि यहां हम वर्कप्लेस अफेयर की बात नहीं कर रहे। वर्कप्लेस अफेयर और ऑफिस स्पाउस में बेसिक फर्क होता है कि वर्कप्लेस अफेयर आकर्षण के आधार पर होते हैं, जबकि ऑफिस स्पाउस रिलेशंस दो लोगों के बीच की केमिस्ट्री से बनते हैं।
ऑफिस स्पाउस का निजी जीवन पर असर
हिंदी फिल्मों के वे सीन बेहद आम हुआ करते थे जब बॉस की अपनी सेक्रेटरी के साथ नजदीकियां इतनी बढ़ जाती थीं कि ऑफिस का रिश्ता बेडरूम तक चला आता था। जाहिर है, ऐसे रिश्तों से पारिवारिक माहौल पर बुरा असर भी पड़ता था। करियर बिल्डर डॉट कॉम द्वारा कराए गए एक सर्वे के अनुसार 20 प्रतिशत गृहस्थियों में ऑफिस स्पाउस के होने से उलझनें पैदा हो जाती हैं। ऑफिस स्पाउस के साथ नजदीकियां कई बार इतनी बढ़ जाती हैं कि आपके रियल लाइफ पार्टनर के साथ आपकी ट्यूनिंग फीकी पड़ सकती है। ऐसी स्थितियों का घर तोड़ने में बड़ा हाथ होता है। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो रिश्तों में दायरे बनाने की जरूरत यहीं पड़ती है। समीर कहते हैं, 'साथ में ज्यादा समय बिताने से दो लोगों में नजदीकियां आना स्वाभाविक है, लेकिन उन करीबियों को ऑफिस के चहारदीवारी तक सीमित रखना व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है। अपने रिश्ते को काम तक सीमित रखना बेहद जरूरी है। यानी संतुलित जीवन के लिए दायरे बनाना बेहद जरूरी है।'
करियर के लिए भी खतरनाक
ऑफिस स्पाउस होने से आपको मानसिक सुकून और क्रिएटिव स्पेस तो मिलती है लेकिन इससे आपके करियर पर बुरा असर भी पड़ सकता है।
1. संभव है कि आपके दूसरे कलीग्स आपके और आपके ऑफिस स्पाउस के रिश्ते के मामले में उतने सहज न हों और आपके काम में नुकसान पहुंचाने की कोशिश करें।
2. रिश्ते की निजता काम पर अकसर दिख ही जाती है जिसका आपके परफॉर्मेस पर बुरा असर भी पड़ सकता है।
3. अगर आप अपने स्पाउस को काम के मामले में वरीयता देंगे तो आपके कलीग्स इस बात का विरोध कर सकते हैं और आपके खिलाफ हो सकते हैं।
4. अगर आपके और आपके स्पाउस के बीच जूनियर-सीनियर की हायरार्की है तो आपकी छवि पर इसका दुष्प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों में अकसर लोग कहते हैं कि बॉस के साथ निजी संबंध बनाकर तरक्की के रास्ते ढूंढे जा रहे हैं।
5. देखा गया है कि इन रिश्तों का खमियाजा पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों को ज्यादा उठाना पड़ता है। कई बार डिपार्टमेंट से ट्रांसफर कर दिया जाता है और ज्यादा बुरी स्थितियों में कंपनी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।
6. आप और आपके ऑफिस स्पाउस कलीग्स के गॉसिप का केंद्र बन सकते हैं, जिससे आपके लिए काम करने का माहौल खराब हो
सकता है।
7. ऐसे रिश्तों की गॉसिप अकसर परफॉर्मेस पर हावी हो जाती है और लोग आपके काम को कम आंकने लगते हैं।
8. वर्कप्लेस अफेयर और ऑफिस स्पाउस में फर्क होता है लेकिन लोग ऐसे रिश्तों को एक ही निगाह से देखते हैं।
जागरण सखी

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Web Title: personal and professional relationships in the workplace

नाखूनों को स्वस्थ और मजबूत बनाए

बार-बार पानी लगने से नाखूनों के खराब होने का भय बना रहता है क्योकि पानी सोखने से नाखून जहां फूलते या फैलते है, वहीं पानी के सूख जाने पर वे सिकुड़ने या फटने लगते है। पानी जब नाखून केअंदर-बाहर आता-जाता है तो इससे नाखून कमजोर पड़ने लगते हैं और टूटने लगते है। जैसे-जैसे नाखून मोटा होता जाता है और उसकी वृद्धि धीमी पड़ने लगती है, यह समस्या और बढ़ती जाती है। मौसम भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जाड़े के दिनों में नाखूनों के बढ़ने की गति तो धीमी होती ही है, ठंडी हवा और कम नमी के कारण नाखून सूखने भी लगते है। आइए जानें कुछ ऐसे नुस्खों के बारे में जो आपके नाखूनों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखेंगे-
दस्ताने पहनें: बर्तनों या कपड़ों की धुलाई या सफाई करते समय या पानी के उपयोग वाला कोई भी काम करते समय रबड़ के दस्ताने जरूर पहनें। खासतौर से तब जरूर पहनें जब आप कड़े सॉल्वेंट या डिटर्जेट का इस्तेमाल करती हों।
मॉइस्चराइजर लगाएं: आप जितनी बार हाथ धोएं उतनी बार मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें। नाखूनों और कोनों पर कोल्ड क्रीम से मसाज करे और लगाने के बाद थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। फिर गीली रुई से अपने हाथ पोंछ लें।
फाइलिंग एक तरफ से करे : रेगमाल आदि से नाखूनों की सफाई, फाइलिंग करने से नाखून कमजोर पड़ने लगते है। फाइलिंग के बाद नाखून के किनारे मजबूत करने के लिए बफर का इस्तेमाल करे और वह भी सिर्फ एक तरफ से।
छोटे नाखून रखें : अगर आप सुंदर और अच्छे नाखून चाहती हैं तो उन्हे नियमित रूप से काटती रहे। काटते समय ध्यान रखें कि उनका मूल आकार नष्ट न हो। यानी नाखून अगर चौकोर आकार के है तो उन्हे नुकीला और नुकीले है तो उन्हें चौकोर न बनाएं।
स्नान के बाद ही नाखून काटे: नाखून तब काटे जब वे नम और मुलायम हों। ऐसा आमतौर पर स्नान के बाद ही होता है। सूखे नाखून काटते समय टूटने या फटने का डर होता है।
मॉइस्चराइजर लगाएं : सोने से पहले मॉइस्चराइजर लगाने से नाखून स्वस्थ और मजबूत बने रहते है।
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Web Title: nail care tips

फूलों का जादू


फूलों में है ऐसा सौंदर्य, जिसकी ओर खिंचे चले आते हैं हम सभी। यही कारण है कि दुनियाभर में छाई है इसके प्रति दीवानगी। परिधानों की बात करें तो इस सीजन में फ्लोरल में सॉफ्ट पेस्टल के साथ ही चटख रंगों का है
बोलबाला तो अब आपको यह तय करना है कि अपनी ड्रेस में आप किस तरह का आकर्षण जोड़ना चाहती हैं। वैसे यहां भी हैं स्मार्ट ड्रेसिंग के कुछ रूल्स। वन पीस ड्रेस में तो ओवर ऑल फ्लोरल प्रिंट अच्छा लगता है। हां, अगर सलवार-कमीज पहन रही हैं तो टॉप या बॉटम दोनों में कोई एक ही फ्लोरल प्रिंट में हो तो जंचेगा। यही रूल लागू होता है स्कर्ट-टॉप या जींस-टीशर्ट के पहनावे पर। आजकल तो फ्लोरल प्रिंट में लेगिंग्स भी हो रही हैं खूब पापुलर। अगर फ्लोरल प्रिंट आपके स्टाइल और मिजाज से मैच नहीं करता, पर आपका दिल कर रहा है इसे अपनाने का तो आप चुन सकती हैं फ्लोरल प्रिंट या डिजाइन की एक्सेसरीज जैसे पर्स, नेकलेस, ईयरिंग्स, ब्रेसलेट या हेयर एक्सेसरीज इत्यादि। फ्लोरल डिजाइन से सजे मोबाइल कवर भी हैं लाजवाब। यही नहीं इन दिनों होम डेकोर से लेकर अन्य जरूरी चीजों जैसे बेडशीट, सोफा कवर, बाथरुम एक्सेसरीज इत्यादि तक में छाया है इसका जादू। अब देर क्यों करें, जब फूलों की सुंदरता को अपने व्यक्तित्व और घर-संसार में सहेजने के मौजूद हैं इतने विकल्प।

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एक्सरसाइज से लंबे समय तक युवा रहा जा सकता है

हम चाहते तो है सुंदर और जवां दिखना, लेकिन उसके लिए प्रयास कम करते है। अगर शुरू से ही सौंदर्य की सही देखभाल और एक्सरसाइज की जाए तो लंबे समय तक युवा रहा जा सकता है।
हर कोई लंबे समय तक जवां दिखना और रहना चाहता है। खास तौर पर स्त्रियां अपनी बढ़ती उम्र को जाहिर नहीं होने देना चाहती है। लेकिन त्वचा की कितनी ही अच्छी देखभाल की जाए और सौंदर्य प्रसाधनों पर कितना ही पैसा खर्च करें, जीवन में एक समय ऐसा जरूर आता है, जब त्वचा का कुदरती लचीलापन खत्म होने लगता है। इसके कई कारण हो सकते है-मसलन अचानक वजन घटना, आपकी जीवनशैली, उम्र
का प्रभाव, आहार में पोषक तत्वों की कमी और गर्भावस्था आदि। इन सभी कारणों से यह पता चलता है कि आपकी त्वचा का लचीलापन कैसे कम होता है और कैसे आपकी त्वचा में कसाव आएगा।
त्वचा के कोश उम्र के साथ निस्तेज और निष्क्रिय हो जाते है, लेकिन उचित व्यायाम से ये कोश दोबारा सक्रिय और जीवित हो उठते है। जैसे चेहरे और गले की झुर्रियां सही व्यायाम से दूर हो सकती है। लेकिन उसकी उचित देखभाल के लिए उसे सही पोषण देना जरूरी होता है। एक्सरसाइज से आप त्वचा में कसाव कैसे ला सकती है, बता रही है मुंबई की वेलनेस एक्सपर्ट एंड क्लिनिकल एक्सरसाइज स्पेशलिस्ट नमिता जैन।
यहां दी गई कुछ एक्सरसाइज डबल चिन, गले की ढीली त्वचा और झुर्रियों को दूर करने में मददगार साबित होंगी। इतना ही नहीं यह त्वचा की मांसपेशियों की टोनिंग भी करेगी।
गर्दन के लिए : जमीन या कुर्सी पर सीधी बैठ जाएं। सिर पीछे ले जाकर आसमान की ओर देखें। अपने होंठ बंद रखें और मुंह इस प्रकार चलाएं जैसे च्यूइंगम चबा रही है। आप महसूस करेगी कि आपके गले की और उसके आसपास की मांसपेशियां काम कर रहीं हैं। उनमें खिंचाव महसूस करेगी। इस क्रिया को बीस बार दोहराएं। ऐसा करने से गर्दन की त्वचा में कसाव आएगा।
डबल चिन के लिए : अपने सिर को पीछे की ओर ले जाएं। आसमान की ओर देखें और मुंह खोलें व बंद करे। आपको ठोढ़ी के पास खिंचाव महसूस होगा। ऐसा 11-16 बार करने से चिन अच्छी हो जाती है।
चेहरे पर कसाव लाने के लिए
1. अपने चेहरे पर ध्यान केंद्रित करके उसे कसने की कोशिश करे। फिर आराम की मुद्रा में आएं। ऐसा कम से कम सात बार करे। यह चेहरे की पूरी मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करेगी और आपकी त्वचा में कसाव लाएगी।
2. सीधी बैठ जाएं अपना चेहरा सामने रखें। होंठ खोलते हुए दांतों को एक-दूसरे पर सटाकर रखें और जबड़ों को फैलाएं ताकि आपके दांत जबड़ों से अलग होते हुए महसूस हो। एक बार जबड़े को फैलाएं और फिर जबड़ों को सिकोड़ने की कोशिश करे।
जॉ लाइन के लिए : कुर्सी पर सीधी बैठ जाएं। अपना सिर पीछे की ओर ले जाएं और आसमान की ओर देखें। अपने होंठों को बंद रखें और आराम की मुद्रा में रहे। बहुत ज्यादा खिंचाव या कसाव न महसूस करे। अब अपने होंठों को इस तरह सिकोड़े और फिर खींचें जैसे आप आसमान को चूमना चाहती है। अपने होंठों को सिकोड़ कर मन में दस तक गिनें, फिर आराम की मुद्रा में आएं और अपना सिर वापस सीधा करे। ऐसा पांच बार करे।
माथा, ठोढ़ी और गर्दन के लिए :
बेड पर सीधी लेट जाएं। अपना सिर बेड के किनारे पर जमीन की ओर लटकाएं। अब धीरे-धीरे अपना सिर ऊपर उठाएं और दस तक गिनते हुए अपने पंजों को देखने की कोशिश करे। फिर आराम की मुद्रा में आएं और अपना सिर फिर उसी अवस्था में लाएं। इस प्रक्रिया को पांच बार दोहराएं।
आंखों के लिए
आंखों के आसपास की ढीली त्वचा, सूजी आंखों और लटकी हुई पलकों को कुछ व्यायाम की सहायता से ठीक कर सकती है।
1. अपनी आंखों की मांसपेशियों को इस प्रकार टोन करे- अपनी दो अंगुलियों को सिर के इधर-उधर यानी माथे के दोनों किनारों पर रखकर दबाएं और आंखों को तेजी के साथ खोलें-बंद करे। ऐसा कम से कम दस बार करे।
2. जमीन या कुर्सी पर सीधी बैठ जाएं। आंखें बंद करके आराम की मुद्रा में रहे। जब आप अपनी आंखों को बंद करे तो सबसे पहले जितना संभव हो, नीचे देखें और फिर जितना संभव हो ऊपर देखने की कोशिश करे। ऐसा दस बार करे।
3. सीधी बैठें। आंखों को बंद करके आराम की मुद्रा में आएं। अब अपनी भौंहों को जितना संभव हो ऊपर की ओर खींचें और पलकों को नीचे की ओर खींचें। इसी स्थिति में रहकर पांच तक गिनें फिर आराम की अवस्था में आएं। यह प्रक्रिया पांच बार दोहराएं।
4. आराम की मुद्रा में सीधी बैठें और आंखें खुली रखें। अपनी आंखों को आधा बंद करें। निगाहे जमीन की ओर रखें और भौंहों को जितना संभव हो, ऊपर की ओर खींचें। फिर आंखें खोल कर पलकों को इतना फैलाएं कि आंखों का ज्यादा से ज्यादा सफेद भाग नजर आए।
5. आंखें बंद करें। फिर अपनी हथेलियों को रगड़कर आंखों पर रखें। ऐसा पांच बार करने से आंखों को आराम मिलता है और उनकी सूजन भी दूर हो जाती है।
भौंहों के लिए
भौंहों के बीच के हिस्से व माथे पर झुर्रियां जल्दी ही नजर आने लगती हैं। इसके लिए करे यह एक्सरसाइज:
1. भौंहों को जितना संभव हो सिकोड़े यानी चढ़ाएं जैसे कि आप गुस्सा जाहिर कर रही है। इतना सिकोड़े कि आपकी भौंहे आपकी आंखों के ऊपर चढ़ी हुई प्रतीत हों। अब जितना संभव हो सके आंखें खोलें और अपनी भौहों को जितना संभव हो सके ऊपर की ओर खींचें या फैलाएं। यह प्रक्रिया पांच बार दोहराएं।
2. बेड पर लेटकर किनारे की ओर अपनी गर्दन को लटकाएं (सिर को जमीन की तऱफ झुकाएं)। फिर भौंहों को आंखों के ऊपर झुकाएं। इस दौरान अपनी नाक को जितना संभव हो सिकोडें़, जबकि नाक के छेद को फैलाएं। इस अवस्था पर दस तक गिनते हुए रुकें। आराम की मुद्रा में आएं और यह प्रक्रिया पांच बार दोहराएं।
हाथों के लिए
हाथों की झुर्रियां दूर करने के लिए हाथों को कसकर एक दूसरे से पकड़े और फिर हलका छोड़ें। ऐसा 7-11 बार करे।
अपने रूप और लावण्य को अधिक समय तक कायम रखने के लिए एक माह के लिए यह एक्सरसाइज नियमित रूप से करने पर बेहतर परिणाम मिलेंगे। साथ ही, चेहरे पर चमक और त्वचा का लचीलापन बरकरार रखने के लिए आप बाद में यह एक्सरसाइज हफ्ते में तीन बार भी कर सकती है। यह व्यायाम सिर्फ प्रौढ़ स्त्री के लिए ही नहीं है, बल्कि इसे युवतियां भी कर सकती है। इससे उनके चेहरे पर उम्र का असर काफी समय बाद होगा। 

Lakhisarai Se Breaking News..01.10.13

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1 लखीसराय : किऊल-मोकामा रेलखंड के मनकठा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों ने जमकर बवाल काटते हुए पथराव किया। यात्रियों ने स्टेशन के कम्प्यूटर समेत कई सामानों को पटक कर तोड़ दिया। हंगामे के बाद रेल परिचालन बाधित

2 लखीसराय : चानन व कजरा थाना क्षेत्र की सीमा रेखा पर सिंघौल-तेतरिया गांव के बीच स्थित राम कोलिया ठाकुरबाड़ी में हथियार बंद अपराधियों ने प्रवेश कर पुजारी को बंधक बनाकर मंदिर से तीन अष्टधातु मूर्ति की चोरी
3 लखीसराय में सर्व शिक्षा अभियान द्वारा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नसीम अहमद ने खुलासा किया है। बाल मजदूरों, विद्यालय से बाहर रहने वाले बच्चों व विकलांग बच्चों को शिक्षित करने के लिए उन्नयन केंद्र एवं उत्प्रेरण केंद्र चलाए बिना वित्तीय वर्ष 2009-10 में तीन स्वयंसेवी संस्थाओं ने 10,50,000 रुपए का गबन कर लिया है।