BREKING NEWS

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Tuesday, 12 November 2013

आतंकी गिरोह का भंडाफोड़

लखीसराय पुलिस को लखीसराय मुख्यालय में आई0 जी0 अनुपमा सदाशिव निलेरकर और डी0 आई0 जी0 सुधांशु कुमार के नेतृत्व में आज प्रमण्डल के सभी जिला पुलिस कप्तान की एक बैठक की गई। जिसमें मुगेंर प्रमण्डल के सभी जिला के एस0 पी0 बैठक में भाग लिये। बैठक का मुख्य उद्वेश्य यह था कि आये दिन बिहार में आतंकवादियों के बढ़ते कद को ठीक करने के लिए किया गया। ज्ञात हो कि आतंकवादियों द्वारा एच0 डी0 एफ0 सी0 बैंक और आई0 सी0 आईसी0 आई0 बैंक के द्वारा करोड़ों रूपयेकी लेन देन आतंकी गति विधि में किया गया। जिसमें पाकिस्तान के आई0 एस0 आई0 एजेंट इब्राहिम खान और मंगलौर के आयशा बानो के निर्देश पर लखीसराय के शातिर मुहम्मद फैजान और मो0 दाउद अंसारी भोले- भाले युवकों को रूपये का लोभ देकर आतंक के जाल में फंसा रहे थे। और जगह -जगह आतंक का बढावा देने की प्रयास करने बाला था । इसी कडी में चार शख्श को गिरफतार कर जेल भेजा जा चुका है। जिसमें सुर्यगढा थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव के गोपाल प्र0 गोयल , निस्ता गांव के विकास कुमार ,सुर्यगढा सदर बाजार प्रमुख व्यवसायी गणेश प्रसाद और लखीसराय शहर के प्रखण्ड कार्यालय के पीछे पवन कुमार गुप्ता गिरफतार कर जेल भेज दिया गया है। जिससे 7 मोबाईल, 10 सीम, 20 0टी0एम0 कार्ड, 30 एच0 डी0एफ0सी0 बैंक के पासबुक , 40 अन्य बैंकों के पासबुक , 30 हजार रू0 नकद , बरामद किया गया ।जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है तथा जो ए.एटी.एम और पासबुक बरामद किये गये है उन पासबुक खाते में पाकिस्तान तथा और अन्य भारत के अलावे बाहरी बैंको से पैसे भेजे गये है। तथा जो मोबाइल बरामद किया गया उन मोबाइल से पाकिस्तान से कई बार बात करने की भी खबर मिल रही है।

इलेक्ट्ोनिक्स सर्विलांश के आधार पर कुल 39 पाकिस्तानी आई0 एस0 आई0 ऐजेन्टों के मोबाईल नम्बर से इनलोगों का सीधा सम्पर्क रहा है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों एवं नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज हो गया है।

इस हाईप्रोफाइल मामले की मॉनीटरिंग राज्य पुलिस मुख्यालय (डीजीपी) स्तर से की जा रही है। मुख्यालय के निर्देश पर मुंगेर लखीसराय पुलिस की एक विशेष टीम झारखंड के धनबाद जिले में भेजी गई है। टीम ने धनबाद से एक और संदिग्ध को हिरासत में लिया है। उसकी निशानदेही पर कई ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

पाकिस्तान में छिपा देश का सबसे बड़ा आतंकी दाउद को पकड़ने के लिए पूरे देश की एजेंसियां काम कर रही है। बावजूद उस डॉन का सुराग नही मिल पाया है। वहीं लखीसराय पुलिस ने आतंकी संगठन को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले जिस गिरोह का भंडाफोड़ किया है। उसका स्थानीय स्तर संचालक भी लखीसराय बड़ी दरगाह निवासी मो. किस्तम अंसारी का पुत्र दाउद अंसारी है। जिसे पकड़ने के लिए लखीसराय पुलिस ही नहीं राज्य पुलिस मुख्यालय भी पसीना बहा रही है। और इस संदर्भ में मोबाईल के टावर लोकेशन के आधार पर बिहार - झारखण्ड , बंगाल, दिल्ली , हैदराबाद सहित कई शहरों में इससे जुडे लोगों के खिलाफ छापेमारी जारी है।

आज इसी धटना के बाद सभी जिला के पुलिस कप्तान के साथ बैठक कर संयुक्त रूप से बिहार में शान्ति व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए आतंकी संगठन से जुडे सभी तत्थों की जांच कर उसपर कार्रवाई करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक किया गया है।

बाईट- सुधांशु कुमार - डी0 आई0 जी0

Sunday, 10 November 2013

आई0 एस0 आई0 ऐजेन्ट गिरफतार

लखीसराय पुलिस को ए.टी.एम मशीन से छेडछाड़ के मामले की शिकायत मिल रही थी। देर रात्री वहीं कहानी दुहराने की कोशिश एक व्यक्ति के द्वारा की जा रही थी। पुलिस को गुप्त सूचना मिला था कि एच.डी.एफ.सी बैंक के सामने एक स्र्कारपियों से एक व्यक्ति उतर कर ए.टी.एम.मशीन से छेडछाड़ कर रहा है तभी पुलिस के द्वारा तुरन्त कारवाई कर एच.डी.एफ.सी बैंक से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया । गिरफ्तार किये गए व्यक्ति से मिली जानकारी के आधार पर फिर तीन लोगोंको हिरासत में लिया गया । जिसके पास से ग्यारह ए0टी0एम0कार्ड 11 विभिन्न बैंक के पासबुक भी जब्त किया गया है। वहीं सुत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है तथा जो ए.एटी.एम और पासबुक बरामद किये गये है उन पासबुक खाते में पाकिस्तान तथा और अन्य भारत के अलावे बाहरी बैंको से पैसे भेजे गये है। तथा जो मोबाइल बरामद किया गया उन मोबाइल से पाकिस्तान से कई बार बात करने की भी खबर मिल रही है।
 
 
 

इलेक्ट्ोनिक्स सर्विलांश के अधार पर पुलिस 6 शख्श को हिरासत में लेकर पुछताछ कर रही है। पाकिस्तानी आई0 एस0 आई0 आतंकीयों से जुडे होने संभावना है। । दर्जनों एटीम और बैंक पासवुक बरामद । पटना में हुए आतंकी हमलावरों कों फंडिग से जुडे होने आशंका है।

लखीसराय पुलिस गुप्त सुचना के आधार पर 2 संदिग्ध स्र्कापियो गाडी में पाकिस्तानी आई0एस0 आई0 ऐजेन्ट के द्वारा फंडिग कारोबार की धन्धा करने शातिर को पकडा गया जिसके बाद लखीसराय जिला के दर्जनों ठिकानों पर पुलिस दिनभर छापेमारी किया । लखीसराय जिला के नगर थाना क्षेत्र के बडी दरगाह में पुलिस कर रही है छापेमारी । जिसमें सुर्यगढा थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव के गोपाल प्र0 गोयल , निस्ता गांव के विकास कुमार ,सुर्यगढा सदर बाजार प्रमुख व्यवसायी गणेश प्रसाद और लखीसराय शहर के प्रखण्ड कार्यालय के पीछे पवन कुमार गुप्ता गिरफतार कर जेल भेज दिया गया है। जिससे 7 मोबाईल, 10 सीम, 20 0टी0एम0 कार्ड, 30 एच0 डी0एफ0सी0 बैंक के पासबुक , 40 अन्य बैंकों के पासबुक , 30 हजार रू0 नकद , बरामद किया गया । इलेक्ट्ोनिक्स सर्विलांश के आधार पर कुल 39 पाकिस्तानी आई0 एस0 आई0 ऐजेन्टों के मोबाईल नम्बर से इनलोगों का सीधा सम्पर्क रहा है। अभी 2 बाहरी शातिर ऐजेन्ट से पुछताछ जारी है। जो एक काला रंग के स्र्कारपियो और दुसरा उजला रंग के स्र्कार पियों से आया था। इससे पहले भी छोटी दरगाह के मो0 फैजान इन लोगों का बोस था । जो मारा गया । बडी दरगाह में पुलिस 3 धण्टा तक मो0 शहंशाह आलम के घर में पुछताछ किया है। और देर रात तक पुलिस अन्य कई आई0 एस0 आई0 ऐजेन्टों को गिरफतार कर कुछ नया खुलाशा कर सकती है। इस संदर्भ में पुलिस मिडिया से कुछ भी बताने से इन्कार करती रही लेकिन अपना कैमरा से लिया गया 4 शातिर ऐजन्टों की तस्बीर जारी कर दिया ।

हालांकि देर रात्री से पुलिस अबतक मिडिया को कुछ कहने को तैयार नही है वहीं अभी अभी कई जगहो पर पुलिस ने छापेमारी भी कर रही है।

Thursday, 7 November 2013

महापर्व छठ पूजा

बिहार के लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा की आप सभी को मंगलमय बधाई!!

मंगलकामना आरोग्य के लोक पर्व डाला छठ (सूर्य षष्ठी) के अनुष्ठानों का बुधवार को 'नहाय- खाय के' की रस्म से आरंभ हो गया। बाजारों में बढ़ती भीड़ अहसास जगाने लगी है कि लोक मानस से गहरे तक जुड़ा सूर्य आराधन का पर्व दरवाजे पर खड़ा हुआ है। घरों मेंसफाई, घाटों पर स्थान की छेकाई में दिन बीता और पूजन सामग्रियों की खरीदारी पर भी जोर रही।
 
 


पर्व की पहली रस्म के अनुसार व्रती महिलाओं ने स्नानादि से निवृत्त होकर विधि विधान से छठ माता का ध्यान किया। व्रत संकल्पों के साथ आहार शुद्धि के निमित्त जीरे से बघारी लौकी की सब्जी के साथ नए चावल का भोग लगाया।

छठ माता का नाम लेकर सिर माथे लगाया और प्रसाद रूप में ग्रहण किया। दूसरे दिन गुरुवार को उपवास के बाद शाम को दाल की पूड़ी नए गुड़ की बखीर खा कर व्रती महिलाएं 'खरना' (संझवत) की रस्म निभाएंगी। इसके साथ ही कठिन निराजल व्रत का श्रीगणोश हो जाएगा। शुक्त्रवार को व्रत पर्व का पहला अ‌र्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाएगा। रात भर इंतजार के बाद शनिवार को सूर्य की पहली किरण के साथ पर्व का समापन और पारण होगा।

छठ की पहली रस्म-रिवाज निभाने के साथ ही महिलाएं दिन भर पूजन की तैयारियों में जुटी रहीं। नदी और सरोवरों के किनारे जा कर 'बेदी' छेंकने जैसे कार्य युद्धस्तर पर निबटाये गए।

इसके साथ ही नगर के बाजारों में भी पर्व की रंगत छलकने लगी। इसके लिए धुले गए गेंहू को पिसवाने, सूप-सुपली और दउरी-खांची के साथ ही फल आदि की खरीदारी में लोगों का दिन बीता। बिहार की माटी से पसरे लोक पर्व की रौनक शहर की घनी बस्तियों तक में बिखरी नजर आई।
 

Sunday, 3 November 2013

दीपावली

दीपावली की रात दीया-बाती के बाद एक अलग दीया बारने और उसे घंट (घंटे की आकृति का माटी का पात्र) से ढककर पवित्र काजल पारने की एक पुरानी प्रथा काशी और उसके आसपास के क्षेत्रों में आज भी बदस्तूर निभाई जा रही है।

हालांकि 'आई लाइनर' के युग में काजल का पूछनहार कौन है मगर इसे 'अखंड ज्योति' का शुभ और मांगलिक उपहार मान कर साल भर कजरौटे में सहेजे रखने की मान्यता इस रिवाज को अब भी जिलाए हुए है। दुनिया भर की मनाहियों के बाद भी हर घर में बबुआ-बबुनी (शिशुओं) के गाल और भाल पर डिठौना लगाने की रस्म आज भी जिंदा है। जो इस पवित्र काजल के बिना संभव ही नहीं है। दूल्हे राजा सूट में हों या शेरवानी में परिछन के समय मां और भाभियां बगैर काजर पारे भला छोड़ेंगी क्या? बनारस में अब भी विवाह के बाद वर-वधू जब गंगा पुजइया के लिए निकलते हैं तो बहू के हाथ में सिन्होरे (सिंदूरदान) के बाद दूसरा मंगल प्रतीक दीपावली की रात में पारे गए पवित्र काजल का कजरौटा ही होता है।

कैसे पारते हैं काजल - दीपावली की रात दीपदान के बाद घर की बुजुर्ग महिलाओं की अगुवाई में बहुएं पूजन वेदिका के सामने एक बड़े दीये और मोटी बाती वाला अखंड दीप जलाती हैं। इस दीपक में प्राय: घी या कड़ुआ तेल का उपयोग किया जाता है। दीपक के पूजन के बाद उसे घंट से ढक दिया जाता है। सुबह होने तक घंट में शुद्ध काजल की कई पर्ते उतर चुकी होती हैं। बाद में इसे कजरौटे में भर दिया जाता है।

कालरात्रि का यंत्र भी मंत्र भी-

लोकाचारों से गहरे तक जुड़ा दीपावली का काजल आध्यात्मिक दृष्टि से यंत्र भी है और मंत्र भी क्यों कि यह तीन विशिष्ट रात्रियों महारात्रि, मोहरात्रि और कालरात्रि में से सबसे सिद्ध कालरात्रि(दीपावली) का उपहार है। पहले जब लोग काजल लगाते थे तब उसके पीछे मूल भाव यह हुआ करता था कि दीपावली के दीयों की ज्योति की तरह उनकी नेत्र ज्योति भी हमेशा दप-दप रहे। अब जब काजल लगाने को ले कर तरह-तरह के तर्क हैं तब भी मंगल प्रतीक के रूप में ही सही इस रस्म को जिंदा रखना इस लिए जरूरी है कि आने वाली पीढ़ी कम से कम '' से काजल और '' से कजरौटे को तो पहचान सके।

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