पौराणिक मान्यता है कि भगवती लक्ष्मी मूलत: भगवान विष्णु की अभिन्न शक्ति हैं। जिस प्रकार सूर्य से तेजस्विता, चंद्रमा से चांदनी, अग्नि से दाहकता, दूध से धवलता को पृथक नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार श्रीहरि से उनकी श्री को दूर नहीं किया जा सकता। 'श्री' भगवती लक्ष्मी का ही एक नाम है। ऋग्वेद में लक्ष्मी जी को समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। सुप्रसिद्ध श्रीसूक्त ऋग्वेद का ही भाग है। श्रीसूक्त में लक्ष्मी महिमा का गुणगान करते हुए उनका आच्चन किया गया है। विष्णु पुराण और जयाख्यसंहिता के मतानुसार, भगवान विष्णु आदिपुरुष हैं और भगवती लक्ष्मी आद्याशक्ति। लोक कल्याण के लिए जब-जब श्रीहरि ने अवतार लिया है, तब-तब उनकी श्री-स्वरूपा लक्ष्मी भी सहयोग देने के लिए अवतरित हुई हैं। श्रीराम अवतार में वे सीताजी तथा कृष्णावतार में रुक्मिणी बनीं। कमला की जयंती-तिथि कार्तिकी अमावस्या ही दीपावली महापर्व के नाम से जानी जाती है। भक्तगण दीपावली हेतु भगवती की प्रतिमा का चयन बड़े चाव से करते हैं।
मान्यता है कि कमलासना, गज पर आरूढ़, गरुड़वाहना लक्ष्मी उलूकवाहना से श्रेष्ठ होती हैं।
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