BREKING NEWS

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Tuesday, 17 September 2013

फेफड़े का कैंसर की सबसे बड़ी वजह धूमपान

फेफड़े के कैंसर के अस्सी फीसदी मामले धूमपान की वजह से होते है। यह सिगरेट या अन्य कोई भी धुंआ हो सकता है। सिगरेट पीने वाले भी सिगरेट पीने वाले के संपर्क में आने से इसका शिकार हो सकते हैं। फेफड़े के कैंसर को प्रारंभ में लोग अस्थमा या टीबी समझते हैं। दोनों के लक्षण एक जैसा होने के कारण ऐसा होता है। तीन-चार माह तक इसी का इलाज कराते हैं। इसके बाद लोग फेफड़े के कैंसर का इलाज प्रारंभ करते हैं। अब यूनाइटेड स्टेट फूड एंड ड्रग एसोसिएशन ने ऐसे मामले में टीसू डायग्नोसिस को जरूरी कर दिया है। इससे फेफड़े के कैंसर को प्रारंभिक दौर में ही पकड़ा जा सकेगा। इससे आसानी से इलाज संभव होगा। यह कहना है फोर्टिस अस्पताल के फेफड़े के वरिष्ठ डाक्टर मनीष सिंघल का। वह 'हैलो जागरण' कार्यक्रम के तहत फेफड़े के कैंसर पर लोगों के सवालों का जवाब देने सेक्टर 62 नोएडा स्थित दैनिक जागरण कार्यालय आए। लोगों की ओर से पूछे गए कुछ सवाल और डा. मनीष के जवाब के प्रमुख अंश :

- मैं फेफड़े के कैंसर से पीड़ित हूं। ट्यूमर फट रहे हैं। खून आता है। क्या उपचार है?

श्रीचंद वर्मा,
डा. - आपका इलाज रेडिएसन और किमोथेरेपी से संभव है। इससे खून आना बंद हो जाएगा। तीस से चालीस हजार का इलाज है। इससे एक साल आराम मिलेगा। एंटीबायटिक का भी इस्तेमाल करें।


- मैं पहले खूब सिगरेट पीता था। दो साल से छोड़ दिया है। अब खांसी रहती है। फेफड़े में बलगम है। क्या इलाज है?

रामवीर

डा. - आपने जो बताया, वह कैंसर के लक्षण नहीं है। आपको छाती विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सिगरेट पीने का असर उसे छोड़ने के बीस साल तक होता है। बीस साल तक फेफड़े के कैंसर की संभावना होती है।

- मेरी बेटी के बाल झड़ रहे हैं। क्या यह कैंसर का लक्षण है?

शर्मिष्ठा गुप्ता,
डा. मनीष - बाल झड़ना कैंसर का लक्षण नहीं है। यह हार्मोन की गड़बड़ी से होता है। एमआरआई करा सकते हैं। शुगर या थाइराइड के डाक्टर से संपर्क करें। फिर भी ठीक हो तो न्यूरो के डाक्टर से मिलें।

- मेरे सीने में दो माह से दर्द है। फेफड़े में इंफेक्शन है। यह फेफड़े का कैंसर है?

इंदू भूषण

डा - आपको मसल या हड्डी से संबंधी समस्या है। इसे मस्कुलर पेन कहते हैं। आपको कैंसर नहीं है। ऐसे दर्द कुछ समय में ठीक हो जाते हैं। गैस्टिक की भी समस्या हो सकती है।

- मुझे चार साल से फेफड़े का कैंसर है। बहुत दर्द है?

चंद्रभान,
डा मॉरफीन दवा से दर्द रूक सकता है। अपने डाक्टर से संपर्क कर इस दवा के लिए फार्म भरवा लीजिए। यह दवा डाक्टर के फार्म भरकर देने के बाद ही चुनिंदा दुकानों में मिल सकती है।

-मुझे 20 दिन बुखार रहा। फेफड़े में इंफेक्शन है। यह कैंसर तो नहीं?

ओम प्रकाश सिंह,

डा - आपकी परेशानी एंटीबायटिक से ठीक हो जानी चाहिए। प्रति माह सिटी स्कैन कराए। आपका लक्षण कैंसर का नहीं है।

- मुझे खांसी नहीं है लेकिन बलगम की शिकायत है। एक माह के इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुआ।

सेक्टर 142 रिंकू भाटी

डा.- आपको\\ कैंसर नहीं है। आप सुबह सैर करें। व्यायाम और योगा करें। चाहे तो सिटी स्कैन भी करा सकते हैं।

-मुझे चार साल पहले फेफड़े का कैंसर हुआ था। इलाज से ठीक हो गया। अब इंफेक्शन हो जाता है?

राम किशोर त्यागी साहिबाबाद, गाजियाबाद

डा आप छाती विशेषज्ञ से मिले। अभी कुछ नई दवाएं आई हैं। वह फेफड़े के लिए सुरक्षा कवच का काम करती हैं। म्यूसी नैक से भी आराम मिलेगा। वैकसीन का इस्तेमाल भी फायदेमंद है।

फेफड़े के कैंसर के लक्षण

- खांसी में खून आना।

- थोड़े काम में थकावट और सांस फुलना।

- शरीर का वजन कम होना।

- भूख कम लगना।

- सीना फूलना।

बचाव के तरीके

-धूमपान से दूर रहे।

- धूमपान करने वालों से बचें।

- खाने का धुंआ भी खतरनाक हो सकता है। इससे बचें।

अग्नि-पांच






चीन के हर हिस्से पर वार कर सकती है अग्नि-पांच
 
भारत को पूरे चीन और अधिकांश यूरोप तक मारक क्षमता देने वाली पहली अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल अग्नि-5 का रविवार सुबह हुआ दूसरा परीक्षण भी पूरी तरह कामयाब रहा।

..जानिए अग्नि-पांच की मुख्य विशेषताएं

ओडिशा के ंव्हीलर द्वीप से साढ़े आठ बजे हुई अग्नि-पांच की दूसरी परीक्षण उड़ान ने इसे सेना में शामिल करने के करीब पहुंचा दिया है।

पढ़ें: ..मिसाइल सुपरपावर बना भारत

परमाणु हमले में सक्षम इस प्रक्षेपास्त्र के सहारे भारत 5,000 किमी से अधिक दूरी तक वार कर सकता है।

चिढ़ा चीन बोला, भारत अब भी पीछे

रक्षा अनुसंधान विकास संगठन ने कहा कि यह मिसाइल सभी पैमानों पर खरा उतरी है। डीआरडीओ प्रवक्ता रवि गुप्ता ने कहा कि इस परीक्षण के दौरान तीन चरणों वाली अग्नि-पांच ने निर्धारित लक्ष्य पर सटीक वार किया। उनके मुताबिक अप्रैल, 2012 के बाद हुए इस सफल परीक्षण से प्रक्षेपास्त्र के उत्पादन और सेना में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इस सफलता के लिए रक्षा वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए परीक्षण को अहम उपलब्धि बताया। अभी इसका एक परीक्षण और किया जाना है। इस मिसाइल को 2015 तक सेना में शामिल करने का लक्ष्य है।

अस्सी फीसद से ज्यादा स्वदेशी उपकरणों से बनी इस मिसाइल ने भारत को नाभिकीय बम के साथ सुदूर लक्ष्य पर सटीक वार करने वाली अतिजटिल तकनीक का रणनीतिक रक्षा कवच दिया है। इसके जरिए भारत अपने किसी भी हमलावर को भरोसेमंद पलटवार क्षमता के साथ मुंहतोड़ जवाब दे सकता है। इस प्रक्षेपास्त्र से भारत जरूरत पड़ने पर चीन के किसी भी इलाके में वार कर सकेगा। सतह से सतह पर मार करने वाली यह मिसाइल पूरे एशिया, ज्यादातर अफ्रीका आधे से अधिक यूरोप तथा अंडमान से छोड़ने पर आस्ट्रेलिया तक पहुंच सकती है। यह एक टन तक के परमाणु बम गिरा सकती है। अग्नि-पांच भारत की सबसे तेजी से विकसित मिसाइल है, जिसे महज तीन साल में तैयार किया गया है। इसे बनाने की घोषणा दिसंबर, 2008 में की गई थी।

अग्नि-पांच को अचूक बनाने के लिए भारत ने माइक्रो नेवीगेशन सिस्टम, कार्बन कंपोजिट मैटेरियल से लेकर मिशन कंप्यूटर सॉफ्टवेयर तक ज्यादातर चीजें स्वदेशी तकनीक से विकसित कीं। अग्नि-पांच भारत को ऐसे मुल्कों के प्रतिष्ठित क्लब में जगह दिलाने वाला प्रक्षेपास्त्र है, जिनके पास 5,000 किमी से अधिक दूरी तक मार करने वाले अंतरमहाद्वीपीय प्रक्षेपास्त्र हैं। रक्षा वैज्ञानिकों के मुताबिक इस मिसाइल के जरिए भारत दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट कर सकता है और जरूरत पड़ने पर अपने छोटे उपग्रह लांच कर भी सकता है।

पलकों का झपकना बेहद जरूरी

पलकें झपकाना सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि आंखों की तरलता बनाए रखने के लिए पलकों का झपकना बेहद जरूरी है, लेकिन जापानी शोधकर्ताओं के मुताबिक पलकें झपकाने से दिमाग को ताजगी मिलती है क्योंकि पल भर के इसी लमहे में हमारा दिमाग आराम कर लेता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक जाग्रत अवस्था की कुल अवधि में से लगभग दस प्रतिशत हिस्से में हमारी पलकें झपकती हैं। जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि किसी विशेष मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने से पहले हमारा दिमाग खुद को इसी तरह तरोताजा करता है। इससे उसकी सक्रियता बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक दिमाग की ऐसी अवस्था तब होती है जब हम पढ़ने, बोलने या दिमागी मेहनत का कोई अन्य कार्य नहीं कर रहे होते हैं। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमीज ऑफ साइंस जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों के मस्तिष्क की स्कैनिंग की। जिसके अनुसार पलकें झपकाने के दौरान दिमाग के विजुअल कॉरटेक्स और सोमेटोसेंसरी कॉरटेक्स पल भर के लिए सुस्त हो जाते हैं।

Monday, 16 September 2013

शराब के शौकीनों पर बाढ़ एवं सुखाड़ का कोई असर नहीं

लखीसराय एक ओर जहां संपूर्ण जिला बाढ़ एवं सुखाड़ से त्रस्त है। वहीं दूसरी ओर शराब के शौकीन लोगों पर इसका कोई असर नहीं है। शराब के शौकीन लोग बाढ़ एवं सुखाड़ से हो रही तबाही को नजर अंदाज कर छक कर शराब पीने में मशगूल हैं।

यही कारण है कि अगस्त माह में जिले में कोटा से अधिक बियर एवं अंग्रेजी शराब की खपत हुई है। इतना ही नहीं अगस्त 12 से भी अगस्त 13 में अधिक विदेशी शराब बियर की बिक्री हुई है। इससे साफ जाहिर होता है कि शराब के शौकीनों पर बाढ़ एवं सुखाड़ का कोई असर नहीं है।

जबकि देशी मशालेदार शराब अगस्त माह में कोटा से कम खपत हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि गरीब मजदूर वर्ग के लोग देसी एवं मशालेदार शराब का उपयोग करते हैं। बाढ़ एवं राहत से परेशान गरीब मजदूर वर्ग के लोग अपनी हालत देखकर ही शराब पी रहे हैं।

विदेशी शराब का कोटा खपत

अगस्त 2013 - 27,704.00 एलपीएल

खपत - 27,775.00 एलपीएल

अगस्त 2012 - 24,006.24 एलपीएल की खपत

बियर का कोटा खपत

अगस्त 2013 - 38,472.00 बल्क लीटर

खपत - 39,264.14 बल्क लीटर

अगस्त 2012 - 34,435.83 बल्क लीटर की खपत

देशी मशालेदार शराब का कोटा खपत

अगस्त 2013 - 67,030.00 एलपीएल

खपत - 50,756.25 एलपीएल

अगस्त 2012 - 48,272.81 एलपीएल की खपत

V.O1..अधीक्षक उत्पाद पराशर शर्मा की मानें तो विभाग द्वारा निर्धारित कोटा के अनुरूप शराब की बिक्री कर लक्ष्य के अनुरूप माह अगस्त के लक्ष्य के विरूद्ध 80.28 फीसद राजस्व प्राप्त किया गया है। जिला भर के कई दुकानों के बिक्री के आधार पर यह देखा गया कि विगत अगस्त माह में कोटा से 20 प्रतिशत अधिक बिक्री हुआ है हमारे जिला में एक तरफ बाढ और दुसरी तरफ सुखाड रहने के बाद भी पीने वालो पर कोई असर नहीं हुआ है। सितम्बर माह मे भी राजस्व प्राप्त करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

पराशर शर्मा ....अधीक्षक उत्पाद

Byte...वीर बहादुर ...पीने वाल!

हुजूर ! घर से बेदखल कर दिया गया है।

लखीसराय जिला मुख्यालय के बालिका विद्यापीठ स्थित पार्वती देवी को उसका बडा बेटा जबरदस्ती कई मामलों के बांछिंत व ईनामी अपराधी अरूण सिंह के सहारा लेकर घर से किया बेदखल । पार्वती देवी अपने छोटा बेटा के साथ धर के बाहर जहां तहां इन्साफ के लिए दर - बेदर की ठोकर खा रही है। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन भी इन अपराधी के भय से मर्माहत है


जबकी यह जमीन नहीं बल्कि बालिका विद्यापीठ स्थित एन0 एच0-80 पर 2 मंजिला मकान बना हुआ है। यह मकान पार्वती देवी के नाम से निबंधित है। और इस करोडों रू0 की मकान को अपराधी अरूण सिंह कौडी के भाव में बाई जबरदस्ती पार्वति देवी से अपने नाम रजिस्टर करवाना चाहता है। जो पार्वती देवी को मंजुर नहीं था। उसे घर से बाहर कर दिया गया । उसके छोटा बेटा आनन्द कुमार अपराधी का विरोध किया तो उसे भी घर निकाल दिया गया है। जबकी बडा बेटा से अपराधी अरूण सिंह ने एक स्टांप पेपर हस्ताक्षर करवा लिया है। और उस मकान को कब्जा कर अपना हक जमा लिया है।

इधर आनन्द अपनी मां पार्वती देवी , पत्नी रिंकी कुमारी और 2 छोटे बच्चों के साथ इन्साफ की गुहार लगा रहा है। लेकिन इस सुशासन में कोई सुनने बाला नहीं है।

लखीसराय समाहरणालय कक्ष में जिला पदाधिकारी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने जनता दरबार लगाकर लोगों की फरियाद सुनी। पार्वती देवी की छोटा बेटा आनन्द कुमार ने कहा हुजूर ! घर से बेदखल कर दिया गया है। जिससे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। डी0एम0 का जनता दरवार में भी मदद नहीं मिला । लेकिन जिले में अबतक यह जनता दरबार अभियान सिर्फ कागजी बनकर रह गया है। नहीं सुनते अधिकारी--आम जनता परेशान है

Byte....अमरेन्द्र प्रसाद सिंह.... जिला पदाधिकारी

V.O 2 ...एस0 पी0 राजीव मिश्रा ने बताया कि यह झगडालु जमीनी विवाद है। इसमें उसके बडे भाई ने उस अपराधी को लिखा है। छोटा भाई झारखण्ड में रहता है। एस0पी0 ने कहा जमीन बेच दिया गया है। देखता हंु क्या कर सकता हुं।


एस0 पी0 भी ईनामी अपराधी अरूण सिंह से दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहते है। क्योंकि ये अपराधी जद यु के एक बडे सांसद के करीबी है। ज्ञात हो कि अरूण सिंह पर बिहार सरकार के पुलिस ने 50 हजार रू0 का ईनाम भी रखा है। और तब एक जद यु0 सांसद के ईशारे पर वो विगत 16 अगस्त को कोर्ट में आत्मसर्मपण भी कर दिया। और चार से पाॅच दिनों के अन्दर ही बेल करवाकर फिर रंगदारी और अबैध कब्जा जमाने की काम खुलेआम कर रहा है। पुलिस इस कुछ भी बोलन से साफ-साफ मना कर रही है।

बाईट - राजीव मिश्रा ..एस0 पी0


बाईट - आनन्द कुमार- छोटा बेटा

बाईट- रिंकी कुमारी - छोटी बहु

विद्युतकर्मीयों का कलमबन्द हडताल

लखीसराय जिला मुख्यालय के जिला विद्युत कार्यालय के समक्ष विद्युतकर्मीयों ने काला विल्ला लगाकर कलमबन्द हडताल किया । बिजली विभाग का सारे काम काज ठप्प दिया है।


ज्ञात हो कि इस तरह की कलमबन्द के साथ -साथ हर तरह का फयुज काॅल, विद्युत आपूर्ति में किसी भी तरह की गडबडीयों की अनदेखी कर विरोध का सर्मथन किया जा रहा है।

जिलाभर के सभी विद्युतकर्मीयों ने पटना में पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में काला विल्ला लगाकर काम काज को बन्दकर दिया है। जिससे पुरे शहर में बिजली आपूर्ति ठप्प हो गया है।

बाईट- संजय कुमार - प्रदर्शकारी विद्युत कर्मी

बाईट- मो आले रसुल - प्रधान सहायक कार्यपालक अभियंता विद्युत विभाग