लखीसराय जिला के बडहिया गंगाधाट किनारे बसने बाली महादलित डोम जाति का हाल-बेहाल है। गंगाघाट में पानी नहीं रहने से श्यमशान घाट भी अब सुना हो गया है। कोई भी व्यक्ति यहां अंतिम संस्कार के लिए नहीं आता है। क्योंकि यहां घाट पर अपराधीयों का जमावडा रहता है।
जबकी कभी यहां प्रतिदिन सैकडों लाश का अंतिम संस्कार हुआ करता था जिसमें यहां प्रतिदिन 50,000 रू0 की कमाई होती थी । अब तो यहां के लोग दाने-दाने को मयस्सर है। बिहार सरकार महादलितों की दशा और दिशा को सम्भालने के लिए कई योजना चला रही है।फिर भी इनका हाल.बेहाल है।
जबकी जीवन यापन के लिए बास की कराची फाडकर सुप,मौनी, दौरा, सहित अन्य समान बनाकर गुजर बसर करने को मजबुर है।
नगर पंचायत बडहिया के अन्र्तगत यह गंगाधाट आता है। जिसका प्रतिबर्ष टेंडर भी होता था। अब वो भी नहीं होता है। जिससे गंगाधाट की स्थिति खराब हो गया है। कोई नेता देखने बाला नहीं है। दबंग नेताओं और अपराधीयों के डर से महादलित परिवार भय और आतंक के महौल में जी रहे है।
Byte 1...महादलित
Byte 2...महादलित
जबकी कभी यहां प्रतिदिन सैकडों लाश का अंतिम संस्कार हुआ करता था जिसमें यहां प्रतिदिन 50,000 रू0 की कमाई होती थी । अब तो यहां के लोग दाने-दाने को मयस्सर है। बिहार सरकार महादलितों की दशा और दिशा को सम्भालने के लिए कई योजना चला रही है।फिर भी इनका हाल.बेहाल है।
जबकी जीवन यापन के लिए बास की कराची फाडकर सुप,मौनी, दौरा, सहित अन्य समान बनाकर गुजर बसर करने को मजबुर है।
नगर पंचायत बडहिया के अन्र्तगत यह गंगाधाट आता है। जिसका प्रतिबर्ष टेंडर भी होता था। अब वो भी नहीं होता है। जिससे गंगाधाट की स्थिति खराब हो गया है। कोई नेता देखने बाला नहीं है। दबंग नेताओं और अपराधीयों के डर से महादलित परिवार भय और आतंक के महौल में जी रहे है।
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