लखीसराय निजी कोचिंग संस्थानों की मनमानी और उसकी चालाकी से सरकार संस्थानों की आधारभूत संरचना एवं पठन-पाठन की हर गतिविधि के प्रति लापारवाह हो चुकी है। प्रत्येक कोचिंग संस्थानों द्वारा शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, अध्यापन कार्य का अनुभव, शिक्षण शुल्क के अलावे बेंच-डेस्क, प्रयोगशाला, क्लास रूम में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था, शौचालय, कर्मचारियों की संख्या नादारत रहने के बाबजुद 20 हजार 25 हजार रू0 प्रति छात्रों से लिया जा रहा है। सरकार इस शिक्षा व्यवस्था के प्रति लापारवाह हो चुकी है।छात्र और अविभावकों की जेब से मोटी रकम की लुट हो रही है। रसायण विज्ञान की पुरा कोर्सकरने पर 10,000 रू0, जीव विज्ञान और वनस्पति विज्ञान की पुरा कोर्सकरने पर 12,000 रू0 ,भौतिकी विज्ञान की पुरा कोर्सकरने पर 15,000 रू0,गणित शास्त्र की पुरा कोर्सकरने पर 20,000 रू0, बिषयबार मोटी रकम की लुट किया जा रहा है।
इसी तरह अन्य सभी विषय की तैयारी के लिए अलग-अलग चार्ज देने के बाद ही बच्चों की भविष्य सुनिश्चत किया जा सकता है। बिहार की शिक्षा व्यवस्था चैपट हो गया है। सरकारी स्कुलों और काॅलेजों में पढाई के नामपर खानापूर्ति हो रहा है। बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने में विफल है। लखीसराय जिला में सैकडों अबैध निजि कोचिंग शिक्षण संस्थान कुकुरमुत्ते की तरह खुल गया है। जो किसभी कैरेटेरिया को नही पुरा कर सकता है। लेकिन छात्र और अविभावकों का जेब का आॅपरेशन किया जा रहा है। अविभावक मजबुरी बस छात्र को पढा रहे है। और अबैध कोचिंग संचालक छात्रों और अविभावकों का बदस्तुर शोषण एवं दोहन कर रहे है।
बाईट- बसंत कुमार- जिला शिक्षा पदाधिकारी
बाईट- ओम प्रकाश - अविभावक
बाईट- नीतेश कुमार- छात्र
बाईट- सुजीत टिबडेबाल- अविभावक
बाईट- डा0 दिनानाथ गुप्ता- अविभावक
बाईट- धुपेन्द्र साहा - अविभावक
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