बिहार के लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा की आप सभी को मंगलमय बधाई!!
मंगलकामना व आरोग्य के लोक पर्व डाला छठ (सूर्य षष्ठी) के अनुष्ठानों का बुधवार को 'नहाय- खाय के' की रस्म से आरंभ हो गया। बाजारों में बढ़ती भीड़ अहसास जगाने लगी है कि लोक मानस से गहरे तक जुड़ा सूर्य आराधन का पर्व दरवाजे पर आ खड़ा हुआ है। घरों मेंसफाई, घाटों पर स्थान की छेकाई में दिन बीता और पूजन सामग्रियों की खरीदारी पर भी जोर रही।
पर्व की पहली रस्म के अनुसार व्रती महिलाओं ने स्नानादि से निवृत्त होकर विधि विधान से छठ माता का ध्यान किया। व्रत संकल्पों के साथ आहार शुद्धि के निमित्त जीरे से बघारी लौकी की सब्जी के साथ नए चावल का भोग लगाया।
छठ माता का नाम लेकर सिर माथे लगाया और प्रसाद रूप में ग्रहण किया। दूसरे दिन गुरुवार को उपवास के बाद शाम को दाल की पूड़ी व नए गुड़ की बखीर खा कर व्रती महिलाएं 'खरना' (संझवत) की रस्म निभाएंगी। इसके साथ ही कठिन निराजल व्रत का श्रीगणोश हो जाएगा। शुक्त्रवार को व्रत पर्व का पहला अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाएगा। रात भर इंतजार के बाद शनिवार को सूर्य की पहली किरण के साथ पर्व का समापन और पारण होगा।
छठ की पहली रस्म-रिवाज निभाने के साथ ही महिलाएं दिन भर पूजन की तैयारियों में जुटी रहीं। नदी और सरोवरों के किनारे जा कर 'बेदी' छेंकने जैसे कार्य युद्धस्तर पर निबटाये गए।
इसके साथ ही नगर के बाजारों में भी पर्व की रंगत छलकने लगी। इसके लिए धुले गए गेंहू को पिसवाने, सूप-सुपली और दउरी-खांची के साथ ही फल आदि की खरीदारी में लोगों का दिन बीता। बिहार की माटी से पसरे लोक पर्व की रौनक शहर की घनी बस्तियों तक में बिखरी नजर आई।
मंगलकामना व आरोग्य के लोक पर्व डाला छठ (सूर्य षष्ठी) के अनुष्ठानों का बुधवार को 'नहाय- खाय के' की रस्म से आरंभ हो गया। बाजारों में बढ़ती भीड़ अहसास जगाने लगी है कि लोक मानस से गहरे तक जुड़ा सूर्य आराधन का पर्व दरवाजे पर आ खड़ा हुआ है। घरों मेंसफाई, घाटों पर स्थान की छेकाई में दिन बीता और पूजन सामग्रियों की खरीदारी पर भी जोर रही।
पर्व की पहली रस्म के अनुसार व्रती महिलाओं ने स्नानादि से निवृत्त होकर विधि विधान से छठ माता का ध्यान किया। व्रत संकल्पों के साथ आहार शुद्धि के निमित्त जीरे से बघारी लौकी की सब्जी के साथ नए चावल का भोग लगाया।
छठ माता का नाम लेकर सिर माथे लगाया और प्रसाद रूप में ग्रहण किया। दूसरे दिन गुरुवार को उपवास के बाद शाम को दाल की पूड़ी व नए गुड़ की बखीर खा कर व्रती महिलाएं 'खरना' (संझवत) की रस्म निभाएंगी। इसके साथ ही कठिन निराजल व्रत का श्रीगणोश हो जाएगा। शुक्त्रवार को व्रत पर्व का पहला अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाएगा। रात भर इंतजार के बाद शनिवार को सूर्य की पहली किरण के साथ पर्व का समापन और पारण होगा।
छठ की पहली रस्म-रिवाज निभाने के साथ ही महिलाएं दिन भर पूजन की तैयारियों में जुटी रहीं। नदी और सरोवरों के किनारे जा कर 'बेदी' छेंकने जैसे कार्य युद्धस्तर पर निबटाये गए।
इसके साथ ही नगर के बाजारों में भी पर्व की रंगत छलकने लगी। इसके लिए धुले गए गेंहू को पिसवाने, सूप-सुपली और दउरी-खांची के साथ ही फल आदि की खरीदारी में लोगों का दिन बीता। बिहार की माटी से पसरे लोक पर्व की रौनक शहर की घनी बस्तियों तक में बिखरी नजर आई।

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लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के अवसर पर विधि व्यवस्था संधारण हेतु जिला दंडाधिकारी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह एवं पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा के संयुक्त आदेश से जिले के 31 स्थानों के लिए पुलिस बल सहित दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी को प्रतिनियुक्त किया
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