लखीसराय सांस्कृतिक मंच के तत्वधान में आज स्थानीय क्रान्ति प्रेस में युवा कवि व निर्भिक पत्रकार स्व0 कमल कुमार की 10वीं पुण्यतिथि के अबसर पर समाज की दशा और दिशा को एक नया आयाम स्थापित करने के उददेश्य से एक सेमिनार का आयोजन किया गया। आज जनसरोकार से भटके लक्ष्य पर सेमिनार का मुख्य विषय रखा गया । जिसमें सर्वप्रथम स्वतंत्र निर्भिक पत्रकार कमल कुमार जी के तैल्यचित्र पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हे श्रद्वांजली दिया। और तमाम हिन्दी साहित्य सभा के दर्जनों कवि और लेखकों ने उनके रचना और कार्यशैली की चर्चा किया। साथ ही जनसरोकार से भटके लक्ष्य पर परिचर्चा किया गया।
संस्था के सचिव रणजीत सम्राट ने कहा कि- पत्रकार बन्धु, कवि,कथाकार,व्यंगकार और लेखकों ने अपनी कलम की धार से भटके लक्ष्य को जनसरोकार के हित में आगे बढाने की जरूरत है तभी समाज में शान्ति-स्नेह और सद्भाव का वातावरण पैदा होगी। इस सेमिनार सभा की अध्यक्षता मगही के मुर्धन्य कवि दशरथ जी ने किया ।
कवि दशरथ जी ने कहा कि- शिक्षा से संस्कार और संस्कार से संस्कृति का निर्माण होता है। शिक्षा के लिए केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं बल्कि कल के लाल पन्नों से कल के लिए पुरखों के व्यक्तित्व और कृतित्व निकाल कर समाज के आगे परोसना अति आवश्यक है । आज हम कमल कुमार की 10वीं पुण्यतिथि पर उनसे सीख लें की जिस तरह स्व0 कमल कुमार आजीवन समाज के सजग प्रहरी रहे ठीक उसी तरह अपने जीवनकाल में हम समाज के लिए समर्पित रहे।
हिन्दी साहित्य सम्मेलन के कवि राजेश्वरी प्र0 सिंह ने कहा कि - कमल कुमार हिन्दी साहित्य के धरोहर थे। मेरी मित्रता का कारण हिन्दी के प्रति उनकी आशक्ति को हमने परखा था। समाजिक परिवर्तन धोतक थे, रूढिवादिता समाप्त करना उनका नारा था । समाज की विसंगतियों को दुर करने की जज्वा था । जनसरोकार के सिपाही थे। जो आज हमसभी को होना चाहिए।
कवि सुखदेव मोदी ने कहा कि - सभी को जनता की आम समस्याओं से रूबरू होकर जनमानस के प्रति सजग होकर भटके लक्ष्य को दशा और दिशा दिया जा सकता है।
डा0 सिद्वेश्वर महतों ने कहा कि - कमल की किससे कहुं । समाज की तमाम विसंगतियों को सुधारने की प्रयास किया है। प्रशासण की कार्यशैली जनसरोकार से भटक गया है। उन्हे सुधारने की आवश्यकता है।
इस अबसर पर लखीसराय सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष- अरविन्द कुमार, महासचिव- रणजीत सम्राट , सुबोध कुमार, सीताराम आजाद, राहुल कुमार , रोहित कुमार, कवि राजेश्वरी प्र0 सिंह , सुखदेव मोदी, ओमप्रकाश स्नेही, डा0 सिद्वेश्वर प्र0 महतों आदि लोग उपस्थित थे।
संस्था के सचिव रणजीत सम्राट ने कहा कि- पत्रकार बन्धु, कवि,कथाकार,व्यंगकार और लेखकों ने अपनी कलम की धार से भटके लक्ष्य को जनसरोकार के हित में आगे बढाने की जरूरत है तभी समाज में शान्ति-स्नेह और सद्भाव का वातावरण पैदा होगी। इस सेमिनार सभा की अध्यक्षता मगही के मुर्धन्य कवि दशरथ जी ने किया ।
कवि दशरथ जी ने कहा कि- शिक्षा से संस्कार और संस्कार से संस्कृति का निर्माण होता है। शिक्षा के लिए केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं बल्कि कल के लाल पन्नों से कल के लिए पुरखों के व्यक्तित्व और कृतित्व निकाल कर समाज के आगे परोसना अति आवश्यक है । आज हम कमल कुमार की 10वीं पुण्यतिथि पर उनसे सीख लें की जिस तरह स्व0 कमल कुमार आजीवन समाज के सजग प्रहरी रहे ठीक उसी तरह अपने जीवनकाल में हम समाज के लिए समर्पित रहे।
हिन्दी साहित्य सम्मेलन के कवि राजेश्वरी प्र0 सिंह ने कहा कि - कमल कुमार हिन्दी साहित्य के धरोहर थे। मेरी मित्रता का कारण हिन्दी के प्रति उनकी आशक्ति को हमने परखा था। समाजिक परिवर्तन धोतक थे, रूढिवादिता समाप्त करना उनका नारा था । समाज की विसंगतियों को दुर करने की जज्वा था । जनसरोकार के सिपाही थे। जो आज हमसभी को होना चाहिए।
कवि सुखदेव मोदी ने कहा कि - सभी को जनता की आम समस्याओं से रूबरू होकर जनमानस के प्रति सजग होकर भटके लक्ष्य को दशा और दिशा दिया जा सकता है।
डा0 सिद्वेश्वर महतों ने कहा कि - कमल की किससे कहुं । समाज की तमाम विसंगतियों को सुधारने की प्रयास किया है। प्रशासण की कार्यशैली जनसरोकार से भटक गया है। उन्हे सुधारने की आवश्यकता है।
इस अबसर पर लखीसराय सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष- अरविन्द कुमार, महासचिव- रणजीत सम्राट , सुबोध कुमार, सीताराम आजाद, राहुल कुमार , रोहित कुमार, कवि राजेश्वरी प्र0 सिंह , सुखदेव मोदी, ओमप्रकाश स्नेही, डा0 सिद्वेश्वर प्र0 महतों आदि लोग उपस्थित थे।
No comments:
Post a Comment