लखीसराय जिला के बालुधाट पर बालु की निकासी के बाद भी शहर के अवासीय भु-भाग से सटे किउल नदी किनारे बाला जमीन की खुदाईकर बालु की अबैध निकासी जारी है।
जबकी बिहार सरकार के बालुनीति के अनुसार शहर किनारे या गांव के किनारे बसे आवासीय भु-भाग बाला क्षेत्र में किसी तरह की बालु निकासी करना वर्जित है। फिर भी कुछ दबंग टाईप के लोग प्रशासन की नियमों का अनदेखी करते हुए लखीसराय शहर केस्थित किउल नदी किनारे बसे आवासीय भु-भाग को टच करते हुए खुदाईकर बालु की अबैध धन्धा धडल्ले से किया जा रहा है। जिला प्रशासन के खनन विभाग के पदाधिकारी मनोज कुमार अम्वष्ठ ने कैमरा के सामने कुछ भी बताने से इन्कार किया ऐसे मौखिक बताया कि पुलिसिया तंत्र नहीं मिल पाता है सहयोगीयों की कमी रहने की रोना रोते है। और किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर पा रहे है।
जबकी स्थानीय लोगों ने इस बालु कटाव के विरोध कर रहा है। अगर इसी तरह से बालु कटाव होता रहा तो आने बाला बरसात में सैकडों धर किउल नदी केआगोस में समा जायेगा। और करोडों रू0 की जान-माल की क्षति होगी। फिर इसका जिम्मेदार कौन होगा ।
जबकी बिहार सरकार के बालुनीति के अनुसार शहर किनारे या गांव के किनारे बसे आवासीय भु-भाग बाला क्षेत्र में किसी तरह की बालु निकासी करना वर्जित है। फिर भी कुछ दबंग टाईप के लोग प्रशासन की नियमों का अनदेखी करते हुए लखीसराय शहर केस्थित किउल नदी किनारे बसे आवासीय भु-भाग को टच करते हुए खुदाईकर बालु की अबैध धन्धा धडल्ले से किया जा रहा है। जिला प्रशासन के खनन विभाग के पदाधिकारी मनोज कुमार अम्वष्ठ ने कैमरा के सामने कुछ भी बताने से इन्कार किया ऐसे मौखिक बताया कि पुलिसिया तंत्र नहीं मिल पाता है सहयोगीयों की कमी रहने की रोना रोते है। और किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर पा रहे है।
जबकी स्थानीय लोगों ने इस बालु कटाव के विरोध कर रहा है। अगर इसी तरह से बालु कटाव होता रहा तो आने बाला बरसात में सैकडों धर किउल नदी केआगोस में समा जायेगा। और करोडों रू0 की जान-माल की क्षति होगी। फिर इसका जिम्मेदार कौन होगा ।
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