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Tuesday, 17 September 2013

आंखों में ड्राईनेस

इंटरनेट पर सर्फिग, स्मार्ट फोन पर गेम्स या फिर कंप्यूटर के इस्तेमाल टेलीविजन देखने के बाद कभी -कभी आंखों में 'ड्राईनेस' महसूस होती है। स्क्रीन के सामने लंबे समय तक बैठने पर आंखें दुखने लगती हैं। ऐसा क्यों होता है?

कंप्यूटर लैपटॉप, स्मार्टफोन, टेलीविजन आदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर काम करते वक्त आम तौर हम सभी पलकों को जल्दी-जल्दी एक अंतराल पर झपकाते नहींहै। एक मिनट में 10 से 12 बार पलकों को झपकाना चाहिए। ऐसा करने से आपकी आंखें ड्राई हो जाती है और फिर आंखों में तकलीफ का सिलसिला शुरू हो सकता है। जैसे ड्राईनेस से आईस्ट्रेन्स, फिर नेत्रों में किरकिराहट (इरीटेशन), जलन और भारीपन महसूस हो सकता है। इसके अलावा आंखों में लालिमा छा सकती है और सिर गर्दन में भी दर्द संभव है।

कोई यह कैसे जान सकता है कि वह डिजिटल आईस्ट्रेन से ग्रस्त है?

जब किसी व्यक्ति को कंप्यूटर पर काम करते वक्त या फिर टेलीविजन देखने के दौरान आंखों में तकलीफ महसूस हो।

क्या डिजिटल आईस्ट्रेन युवा वर्ग को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है?

अपने अनुभव से मैं यह बात कह सकता हूं कि इन दिनों डिजिटल आई स्ट्रेन की चपेट में युवा पीढ़ी ही नहीं, बल्कि बच्चे भी रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि ये लोग खुलकर इन आधुनिक गैजेट्स का इस्तेमाल करने लगे हैं।

कंप्यूटर मॉनीटर टेलीविजन स्क्रीन के मध्य आंखों की औसतन लगभग दूरी कितनी होनी चाहिए?

कंप्यूटर मॉनीटर और आंखों के मध्य की औसतन-लगभग दूरी 24 इंच होनी चाहिए। वहीं टेलीविजन स्क्रीन और आंखों के मध्य की दूरी औसतन लगभग 7 से 8 फुट होनी चाहिए।

क्या डिजिटल आईस्ट्रेन से नेत्र रोग मायोपिया हो सकता है?

सिर्फ डिजिटल आईस्ट्रेन ही मायोपिया का कारण नहींहो सकता। इस रोग के जेनेटिक कारण भी हैं। अगर किसी व्यक्ति या बच्चे के मां या पिता मायोपिया से ग्रस्त हैं, तो ऐसे लोगों की संतानों में इस रोग के होने का खतरा कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है।

मायोपिया और हाइपरोपिया क्या हैं?

मायोपिया में व्यक्ति की निकट की दृष्टि तो ठीक होती है, लेकिन उसकी दूर की दृष्टि धुंधली या क्षीण हो जाती है। चश्मे का नंबर जितना अधिक होगा, उतनी ही दूर की दृष्टि में कमी होती जाती है। माइनस नंबर का चश्मा लगाकर इस विकार को दूर किया जा सकता है।

वहीं हाइपरोपिया (हायपर मेट्रोपिया) में दूर की दृष्टि काफी अच्छी होती है, लेकिन पास में देखने में दिक्कत होती है। इस शिकायत में 'प्लस नंबर' का उपयुक्त चश्मा पहनने से दृष्टि ठीक हो जाती है। हाइपरोपिया किसी भी आयुवर्ग के व्यक्ति को हो सकता है।

डिजिटल गैजेट्स से आंखों में होने वाली तकलीफों आईस्ट्रेन की रोकथाम कैसे संभव है?

'एक्सेस ऑफ एव्रीथिंग इज बैड' यानी किसी भी वस्तु की अधिकता नुकसानदेह होती है। यह बात डिजिटल गैजेट्स के संदर्भ में भी लागू होती है। स्थिति यह हो गयी है कि बच्चे युवक फुटबाल या अन्य आउटडोर गेम्स खेलने से कहीं ज्यादा वक्त वीडियोगेम्स को दे रहे हैं। डिजिटल गैजेट्स से होने वाली तकलीफों से बचने के लिए हम सभी को 20-20-20 फार्मूले पर अमल करना चाहिए। यानी अगर आप टेलीविजन या कंप्यूटर या किसी अन्य डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 20 मिनट के बाद 20 सेकंड का 'ब्रेक' लें। इस दौरान आंखों को किसी दूर जगह पर फोकस करें। इसके बाद 20 सेकंड के लिए आंखों को बंद कर लें। इसके अलावा इन सुझावों पर अमल करें..

-नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेकर चश्मे का नंबर ठीक कराएं। संतुलित पोषक भोजन ग्रहण करें। ऐसे खाद्य पदार्र्थो को वरीयता दें, जिनमें विटामिन और सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हो। ये दोनों विटामिन आंखों की सेहत के लिए विशेष तौर पर लाभप्रद हैं।

-नेत्रों की मसल्स को सशक्त करने के लिए कुछ व्यायाम होते हैं, जिन्हें कन्वर्जेन्स एक्सरसाइज कहते हैं। नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेकर और इस बाबत जानकारी हासिल कर ये एक्सरसाइज करें।

बदाम के हैं फायदे अनेक

सेहत को लाभ पहुंचाने के मामले में दूसरे सूखे मेवों की तुलना में कहीं आगे है बादाम, क्योंकि इसमें उच्च मात्रा में विटामिन , कैल्शियम फाइबर सहित अन्य जरूरी पोषण तत्व पाए जाते हैं। इसमें पाया जाने वाला फैट मोनो सैचुरेटेड होता है, जो हृदय को स्वस्थ रखता है। यह फैट का वह प्रकार है जो ऑलिव ऑयल में पाया जाता है, जो कि बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने एवं गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। डाइबिटीज के उपचार, ग्लाइसेमिक नियंत्रण को बेहतर करने और डाइबिटीज के फलस्वरूप उत्पन्न परेशानियों को दूर करने में बदाम का सेवन लाभदायक है। इसमें उच्च मात्रा में मौजूद विटामिन और अन्य प्रभावशाली एंटीऑक्सीडेंट्स (बीमारियों से लड़ने वाले प्राकृतिक तत्व) हृदय की बीमारी, डाइबिटीज और कैंसर से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उपरोक्त के अलावा बादाम कई अन्य आवश्यक पोषक तत्वों जैसे फाइबर, पोटेशियम और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है। यह कांबिनेशन ब्लडप्रेशर सामान्य रखने में मदद करता है। यही नहीं फोलिक एसिड से भरपूर होने के कारण यह तंत्रिका कोशिकाओं (नर्व सेल्स) को सुरक्षित रखने, उम्र के असर की गति धीमी करने और हृदय की बीमारियों से बचाव करता है।

जब बादाम के हैं इतने फायदे तो जरूर करें इसे अपने आहार में शामिल, ताकि आप रहें हरदम चुस्त-दुरुस्त।

Tags: Almonds, maintain cholesterol, Blood pressure, nerve cells, health

फेफड़े का कैंसर की सबसे बड़ी वजह धूमपान

फेफड़े के कैंसर के अस्सी फीसदी मामले धूमपान की वजह से होते है। यह सिगरेट या अन्य कोई भी धुंआ हो सकता है। सिगरेट पीने वाले भी सिगरेट पीने वाले के संपर्क में आने से इसका शिकार हो सकते हैं। फेफड़े के कैंसर को प्रारंभ में लोग अस्थमा या टीबी समझते हैं। दोनों के लक्षण एक जैसा होने के कारण ऐसा होता है। तीन-चार माह तक इसी का इलाज कराते हैं। इसके बाद लोग फेफड़े के कैंसर का इलाज प्रारंभ करते हैं। अब यूनाइटेड स्टेट फूड एंड ड्रग एसोसिएशन ने ऐसे मामले में टीसू डायग्नोसिस को जरूरी कर दिया है। इससे फेफड़े के कैंसर को प्रारंभिक दौर में ही पकड़ा जा सकेगा। इससे आसानी से इलाज संभव होगा। यह कहना है फोर्टिस अस्पताल के फेफड़े के वरिष्ठ डाक्टर मनीष सिंघल का। वह 'हैलो जागरण' कार्यक्रम के तहत फेफड़े के कैंसर पर लोगों के सवालों का जवाब देने सेक्टर 62 नोएडा स्थित दैनिक जागरण कार्यालय आए। लोगों की ओर से पूछे गए कुछ सवाल और डा. मनीष के जवाब के प्रमुख अंश :

- मैं फेफड़े के कैंसर से पीड़ित हूं। ट्यूमर फट रहे हैं। खून आता है। क्या उपचार है?

श्रीचंद वर्मा,
डा. - आपका इलाज रेडिएसन और किमोथेरेपी से संभव है। इससे खून आना बंद हो जाएगा। तीस से चालीस हजार का इलाज है। इससे एक साल आराम मिलेगा। एंटीबायटिक का भी इस्तेमाल करें।


- मैं पहले खूब सिगरेट पीता था। दो साल से छोड़ दिया है। अब खांसी रहती है। फेफड़े में बलगम है। क्या इलाज है?

रामवीर

डा. - आपने जो बताया, वह कैंसर के लक्षण नहीं है। आपको छाती विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सिगरेट पीने का असर उसे छोड़ने के बीस साल तक होता है। बीस साल तक फेफड़े के कैंसर की संभावना होती है।

- मेरी बेटी के बाल झड़ रहे हैं। क्या यह कैंसर का लक्षण है?

शर्मिष्ठा गुप्ता,
डा. मनीष - बाल झड़ना कैंसर का लक्षण नहीं है। यह हार्मोन की गड़बड़ी से होता है। एमआरआई करा सकते हैं। शुगर या थाइराइड के डाक्टर से संपर्क करें। फिर भी ठीक हो तो न्यूरो के डाक्टर से मिलें।

- मेरे सीने में दो माह से दर्द है। फेफड़े में इंफेक्शन है। यह फेफड़े का कैंसर है?

इंदू भूषण

डा - आपको मसल या हड्डी से संबंधी समस्या है। इसे मस्कुलर पेन कहते हैं। आपको कैंसर नहीं है। ऐसे दर्द कुछ समय में ठीक हो जाते हैं। गैस्टिक की भी समस्या हो सकती है।

- मुझे चार साल से फेफड़े का कैंसर है। बहुत दर्द है?

चंद्रभान,
डा मॉरफीन दवा से दर्द रूक सकता है। अपने डाक्टर से संपर्क कर इस दवा के लिए फार्म भरवा लीजिए। यह दवा डाक्टर के फार्म भरकर देने के बाद ही चुनिंदा दुकानों में मिल सकती है।

-मुझे 20 दिन बुखार रहा। फेफड़े में इंफेक्शन है। यह कैंसर तो नहीं?

ओम प्रकाश सिंह,

डा - आपकी परेशानी एंटीबायटिक से ठीक हो जानी चाहिए। प्रति माह सिटी स्कैन कराए। आपका लक्षण कैंसर का नहीं है।

- मुझे खांसी नहीं है लेकिन बलगम की शिकायत है। एक माह के इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुआ।

सेक्टर 142 रिंकू भाटी

डा.- आपको\\ कैंसर नहीं है। आप सुबह सैर करें। व्यायाम और योगा करें। चाहे तो सिटी स्कैन भी करा सकते हैं।

-मुझे चार साल पहले फेफड़े का कैंसर हुआ था। इलाज से ठीक हो गया। अब इंफेक्शन हो जाता है?

राम किशोर त्यागी साहिबाबाद, गाजियाबाद

डा आप छाती विशेषज्ञ से मिले। अभी कुछ नई दवाएं आई हैं। वह फेफड़े के लिए सुरक्षा कवच का काम करती हैं। म्यूसी नैक से भी आराम मिलेगा। वैकसीन का इस्तेमाल भी फायदेमंद है।

फेफड़े के कैंसर के लक्षण

- खांसी में खून आना।

- थोड़े काम में थकावट और सांस फुलना।

- शरीर का वजन कम होना।

- भूख कम लगना।

- सीना फूलना।

बचाव के तरीके

-धूमपान से दूर रहे।

- धूमपान करने वालों से बचें।

- खाने का धुंआ भी खतरनाक हो सकता है। इससे बचें।

अग्नि-पांच






चीन के हर हिस्से पर वार कर सकती है अग्नि-पांच
 
भारत को पूरे चीन और अधिकांश यूरोप तक मारक क्षमता देने वाली पहली अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल अग्नि-5 का रविवार सुबह हुआ दूसरा परीक्षण भी पूरी तरह कामयाब रहा।

..जानिए अग्नि-पांच की मुख्य विशेषताएं

ओडिशा के ंव्हीलर द्वीप से साढ़े आठ बजे हुई अग्नि-पांच की दूसरी परीक्षण उड़ान ने इसे सेना में शामिल करने के करीब पहुंचा दिया है।

पढ़ें: ..मिसाइल सुपरपावर बना भारत

परमाणु हमले में सक्षम इस प्रक्षेपास्त्र के सहारे भारत 5,000 किमी से अधिक दूरी तक वार कर सकता है।

चिढ़ा चीन बोला, भारत अब भी पीछे

रक्षा अनुसंधान विकास संगठन ने कहा कि यह मिसाइल सभी पैमानों पर खरा उतरी है। डीआरडीओ प्रवक्ता रवि गुप्ता ने कहा कि इस परीक्षण के दौरान तीन चरणों वाली अग्नि-पांच ने निर्धारित लक्ष्य पर सटीक वार किया। उनके मुताबिक अप्रैल, 2012 के बाद हुए इस सफल परीक्षण से प्रक्षेपास्त्र के उत्पादन और सेना में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इस सफलता के लिए रक्षा वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए परीक्षण को अहम उपलब्धि बताया। अभी इसका एक परीक्षण और किया जाना है। इस मिसाइल को 2015 तक सेना में शामिल करने का लक्ष्य है।

अस्सी फीसद से ज्यादा स्वदेशी उपकरणों से बनी इस मिसाइल ने भारत को नाभिकीय बम के साथ सुदूर लक्ष्य पर सटीक वार करने वाली अतिजटिल तकनीक का रणनीतिक रक्षा कवच दिया है। इसके जरिए भारत अपने किसी भी हमलावर को भरोसेमंद पलटवार क्षमता के साथ मुंहतोड़ जवाब दे सकता है। इस प्रक्षेपास्त्र से भारत जरूरत पड़ने पर चीन के किसी भी इलाके में वार कर सकेगा। सतह से सतह पर मार करने वाली यह मिसाइल पूरे एशिया, ज्यादातर अफ्रीका आधे से अधिक यूरोप तथा अंडमान से छोड़ने पर आस्ट्रेलिया तक पहुंच सकती है। यह एक टन तक के परमाणु बम गिरा सकती है। अग्नि-पांच भारत की सबसे तेजी से विकसित मिसाइल है, जिसे महज तीन साल में तैयार किया गया है। इसे बनाने की घोषणा दिसंबर, 2008 में की गई थी।

अग्नि-पांच को अचूक बनाने के लिए भारत ने माइक्रो नेवीगेशन सिस्टम, कार्बन कंपोजिट मैटेरियल से लेकर मिशन कंप्यूटर सॉफ्टवेयर तक ज्यादातर चीजें स्वदेशी तकनीक से विकसित कीं। अग्नि-पांच भारत को ऐसे मुल्कों के प्रतिष्ठित क्लब में जगह दिलाने वाला प्रक्षेपास्त्र है, जिनके पास 5,000 किमी से अधिक दूरी तक मार करने वाले अंतरमहाद्वीपीय प्रक्षेपास्त्र हैं। रक्षा वैज्ञानिकों के मुताबिक इस मिसाइल के जरिए भारत दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट कर सकता है और जरूरत पड़ने पर अपने छोटे उपग्रह लांच कर भी सकता है।

पलकों का झपकना बेहद जरूरी

पलकें झपकाना सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि आंखों की तरलता बनाए रखने के लिए पलकों का झपकना बेहद जरूरी है, लेकिन जापानी शोधकर्ताओं के मुताबिक पलकें झपकाने से दिमाग को ताजगी मिलती है क्योंकि पल भर के इसी लमहे में हमारा दिमाग आराम कर लेता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक जाग्रत अवस्था की कुल अवधि में से लगभग दस प्रतिशत हिस्से में हमारी पलकें झपकती हैं। जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि किसी विशेष मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने से पहले हमारा दिमाग खुद को इसी तरह तरोताजा करता है। इससे उसकी सक्रियता बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक दिमाग की ऐसी अवस्था तब होती है जब हम पढ़ने, बोलने या दिमागी मेहनत का कोई अन्य कार्य नहीं कर रहे होते हैं। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमीज ऑफ साइंस जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों के मस्तिष्क की स्कैनिंग की। जिसके अनुसार पलकें झपकाने के दौरान दिमाग के विजुअल कॉरटेक्स और सोमेटोसेंसरी कॉरटेक्स पल भर के लिए सुस्त हो जाते हैं।