इंटरनेट पर सर्फिग, स्मार्ट फोन पर गेम्स या फिर कंप्यूटर के इस्तेमाल व टेलीविजन देखने के बाद कभी -कभी आंखों में 'ड्राईनेस' महसूस होती है। स्क्रीन के सामने लंबे समय तक बैठने पर आंखें दुखने लगती हैं। ऐसा क्यों होता है?
कंप्यूटर व लैपटॉप, स्मार्टफोन, टेलीविजन आदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर काम करते वक्त आम तौर हम सभी पलकों को जल्दी-जल्दी एक अंतराल पर झपकाते नहींहै। एक मिनट में 10 से 12 बार पलकों को झपकाना चाहिए। ऐसा न करने से आपकी आंखें ड्राई हो जाती है और फिर आंखों में तकलीफ का सिलसिला शुरू हो सकता है। जैसे ड्राईनेस से आईस्ट्रेन्स, फिर नेत्रों में किरकिराहट (इरीटेशन), जलन और भारीपन महसूस हो सकता है। इसके अलावा आंखों में लालिमा छा सकती है और सिर व गर्दन में भी दर्द संभव है।
कोई यह कैसे जान सकता है कि वह डिजिटल आईस्ट्रेन से ग्रस्त है?
जब किसी व्यक्ति को कंप्यूटर पर काम करते वक्त या फिर टेलीविजन देखने के दौरान आंखों में तकलीफ महसूस हो।
क्या डिजिटल आईस्ट्रेन युवा वर्ग को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है?
अपने अनुभव से मैं यह बात कह सकता हूं कि इन दिनों डिजिटल आई स्ट्रेन की चपेट में युवा पीढ़ी ही नहीं, बल्कि बच्चे भी आ रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि ये लोग खुलकर इन आधुनिक गैजेट्स का इस्तेमाल करने लगे हैं।
कंप्यूटर मॉनीटर व टेलीविजन स्क्रीन के मध्य आंखों की औसतन लगभग दूरी कितनी होनी चाहिए?
कंप्यूटर मॉनीटर और आंखों के मध्य की औसतन-लगभग दूरी 24 इंच होनी चाहिए। वहीं टेलीविजन स्क्रीन और आंखों के मध्य की दूरी औसतन लगभग 7 से 8 फुट होनी चाहिए।
क्या डिजिटल आईस्ट्रेन से नेत्र रोग मायोपिया हो सकता है?
सिर्फ डिजिटल आईस्ट्रेन ही मायोपिया का कारण नहींहो सकता। इस रोग के जेनेटिक कारण भी हैं। अगर किसी व्यक्ति या बच्चे के मां या पिता मायोपिया से ग्रस्त हैं, तो ऐसे लोगों की संतानों में इस रोग के होने का खतरा कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है।
मायोपिया और हाइपरोपिया क्या हैं?
मायोपिया में व्यक्ति की निकट की दृष्टि तो ठीक होती है, लेकिन उसकी दूर की दृष्टि धुंधली या क्षीण हो जाती है। चश्मे का नंबर जितना अधिक होगा, उतनी ही दूर की दृष्टि में कमी होती जाती है। माइनस नंबर का चश्मा लगाकर इस विकार को दूर किया जा सकता है।
वहीं हाइपरोपिया (हायपर मेट्रोपिया) में दूर की दृष्टि काफी अच्छी होती है, लेकिन पास में देखने में दिक्कत होती है। इस शिकायत में 'प्लस नंबर' का उपयुक्त चश्मा पहनने से दृष्टि ठीक हो जाती है। हाइपरोपिया किसी भी आयुवर्ग के व्यक्ति को हो सकता है।
डिजिटल गैजेट्स से आंखों में होने वाली तकलीफों व आईस्ट्रेन की रोकथाम कैसे संभव है?
'एक्सेस ऑफ एव्रीथिंग इज बैड' यानी किसी भी वस्तु की अधिकता नुकसानदेह होती है। यह बात डिजिटल गैजेट्स के संदर्भ में भी लागू होती है। स्थिति यह हो गयी है कि बच्चे व युवक फुटबाल या अन्य आउटडोर गेम्स खेलने से कहीं ज्यादा वक्त वीडियोगेम्स को दे रहे हैं। डिजिटल गैजेट्स से होने वाली तकलीफों से बचने के लिए हम सभी को 20-20-20 फार्मूले पर अमल करना चाहिए। यानी अगर आप टेलीविजन या कंप्यूटर या किसी अन्य डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 20 मिनट के बाद 20 सेकंड का 'ब्रेक' लें। इस दौरान आंखों को किसी दूर जगह पर फोकस करें। इसके बाद 20 सेकंड के लिए आंखों को बंद कर लें। इसके अलावा इन सुझावों पर अमल करें..
-नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेकर चश्मे का नंबर ठीक कराएं। संतुलित व पोषक भोजन ग्रहण करें। ऐसे खाद्य पदार्र्थो को वरीयता दें, जिनमें विटामिन ए और सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हो। ये दोनों विटामिन आंखों की सेहत के लिए विशेष तौर पर लाभप्रद हैं।
-नेत्रों की मसल्स को सशक्त करने के लिए कुछ व्यायाम होते हैं, जिन्हें कन्वर्जेन्स एक्सरसाइज कहते हैं। नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेकर और इस बाबत जानकारी हासिल कर ये एक्सरसाइज करें।
कंप्यूटर व लैपटॉप, स्मार्टफोन, टेलीविजन आदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर काम करते वक्त आम तौर हम सभी पलकों को जल्दी-जल्दी एक अंतराल पर झपकाते नहींहै। एक मिनट में 10 से 12 बार पलकों को झपकाना चाहिए। ऐसा न करने से आपकी आंखें ड्राई हो जाती है और फिर आंखों में तकलीफ का सिलसिला शुरू हो सकता है। जैसे ड्राईनेस से आईस्ट्रेन्स, फिर नेत्रों में किरकिराहट (इरीटेशन), जलन और भारीपन महसूस हो सकता है। इसके अलावा आंखों में लालिमा छा सकती है और सिर व गर्दन में भी दर्द संभव है।
कोई यह कैसे जान सकता है कि वह डिजिटल आईस्ट्रेन से ग्रस्त है?
जब किसी व्यक्ति को कंप्यूटर पर काम करते वक्त या फिर टेलीविजन देखने के दौरान आंखों में तकलीफ महसूस हो।
क्या डिजिटल आईस्ट्रेन युवा वर्ग को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है?
अपने अनुभव से मैं यह बात कह सकता हूं कि इन दिनों डिजिटल आई स्ट्रेन की चपेट में युवा पीढ़ी ही नहीं, बल्कि बच्चे भी आ रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि ये लोग खुलकर इन आधुनिक गैजेट्स का इस्तेमाल करने लगे हैं।
कंप्यूटर मॉनीटर व टेलीविजन स्क्रीन के मध्य आंखों की औसतन लगभग दूरी कितनी होनी चाहिए?
कंप्यूटर मॉनीटर और आंखों के मध्य की औसतन-लगभग दूरी 24 इंच होनी चाहिए। वहीं टेलीविजन स्क्रीन और आंखों के मध्य की दूरी औसतन लगभग 7 से 8 फुट होनी चाहिए।
क्या डिजिटल आईस्ट्रेन से नेत्र रोग मायोपिया हो सकता है?
सिर्फ डिजिटल आईस्ट्रेन ही मायोपिया का कारण नहींहो सकता। इस रोग के जेनेटिक कारण भी हैं। अगर किसी व्यक्ति या बच्चे के मां या पिता मायोपिया से ग्रस्त हैं, तो ऐसे लोगों की संतानों में इस रोग के होने का खतरा कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है।
मायोपिया और हाइपरोपिया क्या हैं?
मायोपिया में व्यक्ति की निकट की दृष्टि तो ठीक होती है, लेकिन उसकी दूर की दृष्टि धुंधली या क्षीण हो जाती है। चश्मे का नंबर जितना अधिक होगा, उतनी ही दूर की दृष्टि में कमी होती जाती है। माइनस नंबर का चश्मा लगाकर इस विकार को दूर किया जा सकता है।
वहीं हाइपरोपिया (हायपर मेट्रोपिया) में दूर की दृष्टि काफी अच्छी होती है, लेकिन पास में देखने में दिक्कत होती है। इस शिकायत में 'प्लस नंबर' का उपयुक्त चश्मा पहनने से दृष्टि ठीक हो जाती है। हाइपरोपिया किसी भी आयुवर्ग के व्यक्ति को हो सकता है।
डिजिटल गैजेट्स से आंखों में होने वाली तकलीफों व आईस्ट्रेन की रोकथाम कैसे संभव है?
'एक्सेस ऑफ एव्रीथिंग इज बैड' यानी किसी भी वस्तु की अधिकता नुकसानदेह होती है। यह बात डिजिटल गैजेट्स के संदर्भ में भी लागू होती है। स्थिति यह हो गयी है कि बच्चे व युवक फुटबाल या अन्य आउटडोर गेम्स खेलने से कहीं ज्यादा वक्त वीडियोगेम्स को दे रहे हैं। डिजिटल गैजेट्स से होने वाली तकलीफों से बचने के लिए हम सभी को 20-20-20 फार्मूले पर अमल करना चाहिए। यानी अगर आप टेलीविजन या कंप्यूटर या किसी अन्य डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 20 मिनट के बाद 20 सेकंड का 'ब्रेक' लें। इस दौरान आंखों को किसी दूर जगह पर फोकस करें। इसके बाद 20 सेकंड के लिए आंखों को बंद कर लें। इसके अलावा इन सुझावों पर अमल करें..
-नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेकर चश्मे का नंबर ठीक कराएं। संतुलित व पोषक भोजन ग्रहण करें। ऐसे खाद्य पदार्र्थो को वरीयता दें, जिनमें विटामिन ए और सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हो। ये दोनों विटामिन आंखों की सेहत के लिए विशेष तौर पर लाभप्रद हैं।
-नेत्रों की मसल्स को सशक्त करने के लिए कुछ व्यायाम होते हैं, जिन्हें कन्वर्जेन्स एक्सरसाइज कहते हैं। नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेकर और इस बाबत जानकारी हासिल कर ये एक्सरसाइज करें।

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