लखीसराय सदर अस्पाताल में डाक्टर साहब हाजिरी बनाकर रफफुचक्कर हो जाते है। और अपना प्राईवेट नर्सिंग होम जाकर डियुटी करते है। अचानक जब कोई मरीज होस्पीटल में पहुंचता है तो वो 2 धण्टा से 3 धण्टा इन्तजार करना पडता है और इस बीच सदर अस्पाताल के थर्डग्रेड के कर्मचारी सलाईन लगाकर मरीज को डाक्टर आने का इन्तजार करवाते है। इस तरह कई मरीज मौत के मुंह में चला जाता है। और काम्पाउंडर जब मोबाईल से डाक्टरों को मरीज आने की खबर देते है। तो वो यहां आकर मरीज को जल्दीबाजी में पटना केपी0एम0सी0एच0 रेफर कर अपना पल्ला झार कर स्वंय स्वतंत्र हो जाते है। प्रतिदिन अक्सर ऐसा ही हमेशा होता है। कभी-कभी थर्डग्रेड के कर्मचारी डाक्टर के रवैया से खिन्न होकर झगड जाते है। यहां 1 सिविल सर्जन , 1 डी0एस0 सहित 11 डाक्टर पदस्थापित है। जिसमें 2 टैक्कनिशियन, 2 दर्जन नर्सेज सहित 12 थर्डग्रेड के कर्मचारी पदस्थापित है। ज्ञात हो कि सिविल सर्जन डा0 शशिभुषण प्र0 सिंह सप्ताह भर में 2 बार हाजिरी बनाकर वो अपने गृहजिला बेगुसराय के निजि नर्सिंग होम रवाना हो जाते है। बाकी डाक्टर का भी वही हाल है। भगवान भरोसे सदर अस्पाताल चल रहा है। आज 2 दिनों से लगातार डाक्टर साहब हाजिरी बनाकर रफफुचक्कर हो जाते है।
लखीसराय सदर अस्पाताल में कहने को तो 100 वेड है। लेकिन व्यवस्था के नामपर कुछ भी सही नहीं है। मरीजो को वेड पर विस्तर रोज बदला नहीं जाता है। मच्छरदानी नहीं है। और तो और दवा की काफी कमी है । हर मरीजों को बाजार के दवा दुकान से दवा लानी पडती है ।सदर अस्पाताल में सिविल सर्जन शशीभुषण सिंह सप्ताह में मात्र 2 दिन ही डियुटी देते है। बाकी दिन वो अपने अबासीय नर्सिंग होम में समय देते है। महिला डाक्टर का अभाव है। नर्स से ही प्रसव कार्य जैसे.तैसे निवटाया जा रहा है। फोर्थ ग्रेड का कर्मचारी मरहम पटटी और अन्य कार्य करते है। एक्सरा मशीन, खुन जांच, दांत जांच आदि तो केबल खानापूर्ति के लिए केबल हाथी का दांत सावित हो रहा है।
स्वस्थ समाज विकसित करने तथा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद विभाग बेखबर है। स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति में सुधार होने का नाम नहीं ले रहा है। रोगी के घंटों इन्तजार के बाद भी दिन के ग्यारह बजे तक एक भी डॉक्टर नहीं आए। प्रतीक्षा कर रहे रोगियों ने चिकित्सक की लापरवाही पर क्षोभ व्यक्त करते हुए विभाग के वरीय पदाधिकारी से चिकित्सा सुविधा में सुधार लाने की मांग की।
आज सुबह एक मरीज का हाल काफी बेहाल था । थर्डग्रेड के कर्मचारीयों ने किसी तरह पटटी लगाकर उसका देखभाल किया लेकिन डाक्टर गायब ही रहा । और वो भी कुछ देर बाद निजि क्लिीनिक रवाना हो गया । जिससे आम लोगों में इस व्यवस्था से काफी आक्रोश है।
जिले के बडहिया रेफरल अस्पाताल का हाल भी बदहाल है। यहां भी डाक्टर समय से नहीं आते है। लोग धण्टों बरामदा पर लेटकर या बैठकर डाक्टर आने का इन्तजार करते रहते है। कई बार इन्तजार करते -करते थक जाते है। और वैरंग दुसरे प्राईवेट डाक्टरों के शरण लेना पडता है। अस्पातालों में लाखों करोडों रू0 की खर्च होने बाद भी एक भी मरीज का सही से ईलाज संभव नहीं हो पा रहा है। डाक्टर समय पर वेतन उठा रहे है। लेकिन समय पर डियुटी नहीं करते है। जिससे लोगों में काफी आक्रोश है।
बाईट- डा0शशिभुषण प्र0 सिंह - सिविल सर्जन
बाईट- गौतम कुमार - मरीज के सहयोगी
बाईट- महेश कुमार - मरीज






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