लखीसराय जिला ग्रामिण क्षेत्रों की बहनों ने करमा धरमा कर अपने भाई को दीर्धायु के लिए भगवान शंकर पार्वती की आराधना किया ।
यह पर्व मुलत आदीबासी क्षेत्र और ग्रामिण परिवेश में होता है जिसमें बहन दिनभर बिना कोईअन्न जल ग्रहण किये उपवास पर रहती है । यह उपवास लगातार 24 धण्टा की होती है।
ज्ञात हो कि लखीसराय जिला के महिसोना गांव की विभिन्न मुहल्लो में अलग-अलग जत्था बनाकर करमा - धरमा पर्व मनाया गया । देर रात 8 बजे मिटटी और बालु की रेत से बने भगवान शंकर पार्वती की पुजा अर्चना किया गया और रात भर जागकर भगवान को गीत सुनाकर झुमती रही । सुबह 8 बजेफिर आरती और दुआ के साथ करमा -धरमा का समापन किया गया । भगवान शंकर पार्वती की मुर्तियों को गंगा नदी में प्रवाहित किये गए । और भाई को कुश पहनाकर प्रसाद खिलाया गया । लखीसराय जिले में पौराणिक आस्था और विश्वास के साथ सैकडों बहनों ने अपने-अपने भाई का लम्बी उम्र की कामना कर विकासोन्मुखी रहने की ईश्वर प्रार्थना किया ।
बाईट- लवली कुमारी
बाईट- कविता कुमारी
यह पर्व मुलत आदीबासी क्षेत्र और ग्रामिण परिवेश में होता है जिसमें बहन दिनभर बिना कोईअन्न जल ग्रहण किये उपवास पर रहती है । यह उपवास लगातार 24 धण्टा की होती है।
ज्ञात हो कि लखीसराय जिला के महिसोना गांव की विभिन्न मुहल्लो में अलग-अलग जत्था बनाकर करमा - धरमा पर्व मनाया गया । देर रात 8 बजे मिटटी और बालु की रेत से बने भगवान शंकर पार्वती की पुजा अर्चना किया गया और रात भर जागकर भगवान को गीत सुनाकर झुमती रही । सुबह 8 बजेफिर आरती और दुआ के साथ करमा -धरमा का समापन किया गया । भगवान शंकर पार्वती की मुर्तियों को गंगा नदी में प्रवाहित किये गए । और भाई को कुश पहनाकर प्रसाद खिलाया गया । लखीसराय जिले में पौराणिक आस्था और विश्वास के साथ सैकडों बहनों ने अपने-अपने भाई का लम्बी उम्र की कामना कर विकासोन्मुखी रहने की ईश्वर प्रार्थना किया ।
बाईट- लवली कुमारी
बाईट- कविता कुमारी



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