लखीसराय जिले के सदर अस्पाताल में राष्ट्ीय स्वास्थ्य ग्रामिण मिशन के अन्र्तगत मिलने बाली सरकारी राशि नहीं दिये जाने के खिलाफ जमकर धेराव किया ।
आशा कार्यकताओं की विगत 1 बर्षो से प्रतिमाह मिलने बाली राशि नहीं मिल रहा है। वो भुखे-प्यासे दिन दिनभर और रात भर सेवा करने के बाद भी कोई ध्यान नहीं है। विभाग के लोग आशा को निराशा करके छोड दिया है। आशा की कार्यकताओं ने इस विरोध के स्वर को सिविल सर्जन दवाना चाहा ।
आज सारी समस्या को जिलाधिकारी को सुनाया ।
लखीसराय जननी बाल सुरक्षा योजना का लाभ नही मिल रहा है। --सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिये जाने के उद्देश्य से चलाई जा रही जननी बाल सुरक्षा योजना अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। विदित हो कि सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव व संस्थागत प्रसव का बढ़ावा देने के उद्देश्य से जननी बाल सुरक्षा योजना लागू की थी। इसके लिए सरकार के निर्देशानुसार गांव स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं की बहाली की गई थी। संस्थागत प्रसव के दौरान प्रसूता को 1400 की राशि दी जाती है। जबकि आशा को चार सौ। इसके लिए मरीज को अस्पताल लाने के लिए दो सौ रुपये बतौर किराया के रूप में दिया जाता है। प्रसव के बाद प्रोत्साहित राशि के लिए अधिकारियों के पीछे-पीछे दोड़ना पड़ता है। अनेक अस्पतालों में कई वर्षो से फर्जी प्रसव का इंट्री कराकर राशि की बंदरबाट भी की जा रही है।
अभी विगत कई महीनों से प्रसव कराने आई महिलाओं को भी 1400रू0 नहीं दिया गया है। विभागीय गडवड झाला है। इस पर कोई कुछ नहीं बोलना चाहता है। प्रसव कराने आई महिला को पहले जमीन पर धण्टो लेटा कर छोड दिया जाता है। जब ज्यादा दर्द या परेशानी होती है तब उसे विना चादर के वेड पर लिटा दिया जाता है। जबकी यह राशि 48 धण्टा के अन्दर प्रसव की महिला को मिल जानी चाहिए । और आशा को भी तुरन्त मिलनी चाहिए परन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। यह अस्पताल भगवान भरोसे चल रहा है।
बाईट- अमरेन्द्र प्र0 सिंह- जिलाधिकारी
बाईट- विन्दु देवी - आशा कार्यकर्ता
बाईट- प्रेमलता - आशा कार्यकर्ता 1
बाईट- चन्द्रकला -आशा कार्यकर्ता 2
बाईट- डा0 अशोक कु0 सिंह - चिकित्सक
आशा कार्यकताओं की विगत 1 बर्षो से प्रतिमाह मिलने बाली राशि नहीं मिल रहा है। वो भुखे-प्यासे दिन दिनभर और रात भर सेवा करने के बाद भी कोई ध्यान नहीं है। विभाग के लोग आशा को निराशा करके छोड दिया है। आशा की कार्यकताओं ने इस विरोध के स्वर को सिविल सर्जन दवाना चाहा ।
आज सारी समस्या को जिलाधिकारी को सुनाया ।
लखीसराय जननी बाल सुरक्षा योजना का लाभ नही मिल रहा है। --सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिये जाने के उद्देश्य से चलाई जा रही जननी बाल सुरक्षा योजना अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। विदित हो कि सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव व संस्थागत प्रसव का बढ़ावा देने के उद्देश्य से जननी बाल सुरक्षा योजना लागू की थी। इसके लिए सरकार के निर्देशानुसार गांव स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं की बहाली की गई थी। संस्थागत प्रसव के दौरान प्रसूता को 1400 की राशि दी जाती है। जबकि आशा को चार सौ। इसके लिए मरीज को अस्पताल लाने के लिए दो सौ रुपये बतौर किराया के रूप में दिया जाता है। प्रसव के बाद प्रोत्साहित राशि के लिए अधिकारियों के पीछे-पीछे दोड़ना पड़ता है। अनेक अस्पतालों में कई वर्षो से फर्जी प्रसव का इंट्री कराकर राशि की बंदरबाट भी की जा रही है।
अभी विगत कई महीनों से प्रसव कराने आई महिलाओं को भी 1400रू0 नहीं दिया गया है। विभागीय गडवड झाला है। इस पर कोई कुछ नहीं बोलना चाहता है। प्रसव कराने आई महिला को पहले जमीन पर धण्टो लेटा कर छोड दिया जाता है। जब ज्यादा दर्द या परेशानी होती है तब उसे विना चादर के वेड पर लिटा दिया जाता है। जबकी यह राशि 48 धण्टा के अन्दर प्रसव की महिला को मिल जानी चाहिए । और आशा को भी तुरन्त मिलनी चाहिए परन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। यह अस्पताल भगवान भरोसे चल रहा है।
बाईट- अमरेन्द्र प्र0 सिंह- जिलाधिकारी
बाईट- विन्दु देवी - आशा कार्यकर्ता
बाईट- प्रेमलता - आशा कार्यकर्ता 1
बाईट- चन्द्रकला -आशा कार्यकर्ता 2
बाईट- डा0 अशोक कु0 सिंह - चिकित्सक






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