BREKING NEWS

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Thursday, 23 January 2014

कजरा थर्मल पावर प्रोजेक्ट


लखीसराय कजरा थर्मल पावर प्रोजेक्ट क्षेत्रीय लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है। बहीं कजरा थर्मल पावर के जमीनदाताओं के लिए अभिशाप बन गया है।

किसानों आरोप लगाया कि जिला प्रशासन जमीन की एल0पी0सी0 और शपथ पत्र लेने के नामपर प्रति लोगों से हजारों रू0  अबैध तरीके से बसुल रही है। जो सभी किसानों के लिए दुखदायी है। एक तो सरकार जमीन ले रही है उसपर उचित दाम भी नहीं दे रही है। और तो और जिला प्रशासन के मिलीभगत से कर्मचारी कागजात के नामपर लुटने में लगी है। खुलेआम किसानों से रूपया लिया जा रहा है। जबकी मात्र 10 रू0 लेकर एल0पी0सी0 सहित सभी कागजात बनाकर किसानों को जमीन की वाजिव मुआवजा दिये जाने के लिए सरकार का आदेश है। फिर भी लुट बदस्तुर जारी है।

स्टींग आपरेशन - हल्का कर्मचारी, अंचलाधिकारी एवं अंचल निरीक्षक अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर भू-स्वामित्व को एल पी सी देना है। यहां 1000 रू0 से लेकर 2000 हल्का कर्मचारी, अंचलाधिकारी एवं अंचल निरीक्षक के द्वारा अबैध बसुली जारी है।

 

कजरा थर्मल पावर प्रोजेक्ट हेतु अधिग्रहण किए गए 1,050 एकड़ भूमि का 745 भू-धारियों के बीच 115 करोड़ रुपए मुआवजा दिसंबर तक वितरित किया जाना था। इसके तहत विशनपुर, महरथपुर, बरियारपुर एवं घोघी के भू-धारियों को रैयती जमीन का मुआवजा दिया जाएगा। प्रमंडलीय आयुक्त ने सूर्यगढ़ा के अंचलाधिकारी को उक्त क्षेत्र में शिविर लगाकर 30 दिसंबर तक हर हाल में उक्त प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण किए गए जमीन का संबंधित भू-धारियों को एलपीसी देने का निर्देश दिया था कि 30 दिसंबर  तक भू-धारियों को मुआवजा राशि का भुगतान किया जा सके। विदित हो कि इसके पूर्व उक्त प्रोजेक्ट हेतु अधिग्रहण की गई जमीन की मुआवजा राशि का भुगतान किए जाने की जानकारी मिलते ही नक्सली संगठन भाकपा (एमएल) विरोध शुरू कर दिया था। इस कारण जिला प्रशासन द्वारा गुप्त तरीके से 300 भू-धारियों के बीच लगभग 40 करोड़ रुपए मुआवजा की राशि वितरित की गई थी। कजरा थर्मल पावर प्रोजेक्ट निर्माण के मद्देनजर अर्जित की जाने वाली भूमि के भू-स्वामी को मुआवजा भुगतान करने को ले भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र निर्गत करने हेतु शिविर की तिथि निर्धारित कर दी गई है।

 

लखीसराय जिला के महिसोना, रामगढ, पिपरिया, सुर्यगढा, हलसी,बडहिया, चानन आदि क्षेत्रों में सरकार करोडों रू0 की लागत से जमीन खरीदी है जो जिला के बिकास को बढावा देने के लिए तत्पर है। कजरा पावर प्लांट, रामगढ खडगबारा पावर प्लांट , के लिए भुदाताओं को सरकारी दर के अनुसार चेक दिया जाना था। लेकिन अधिकारीयों द्वारा प्रति किसानों से 1 लाख रू0 काटकर दिये जाने से लाभान्वित व्यक्तियों के बीच काफी आक्रोश है।

जमीनदाता मुकेश सिंह,नवलकिशोर सिंह,श्यामसुन्दर सिंह,विजय प्रसाद,शिवदानी महतो,गायत्री देवी, पवन कुमार आदि किसानों ने आरोप लगाया कि जिला भु अर्जन पदाधिकारी रामेश्वर पाण्डेय के द्वारा प्रति किसानों की 1 लाख रू0 नाजायज तरीके से रखकर मुआवजा राशि वितरण करते है।

 

 

जिलाधिकारी  की मानें तो कजरा थर्मल पावर प्रोजेक्ट हेतु अधिग्रहण की गई रैयती जमीन का मुआवजा भुगतान हेतु 6,958 रुपए प्रति डिसमिल मूल्य निर्धारित किया गया है। स्वेच्छा से  जमीन देने वाले रैयतों को शपथ पत्र देने के बाद 2.4 गुणा राशि का भुगतान किया जा रहा है। जमीन संबंधी कागजात दिखाने के पश्चात कुल मुआवजा राशि का 80 फीसद भुगतान तुरंत कर दिया जाएगा।हल्का कर्मचारी, अंचलाधिकारी एवं अंचल निरीक्षक अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र देंगे

Wednesday, 1 January 2014

नववर्ष 2014 का जश्न

नववर्ष का जश्न

नवबर्ष को यादगार बनाने के लिए जिले के विभिन्न जगहों पर युवा युवति और बुर्जगों के द्वारा पिकनिक मनाया गया। लखीसराय शहर के लाली पहाडी, अशोक धाम, सूर्यगढा स्थित जीवन ज्योति बाटिका , नक्सल प्रभावित चानन प्रखण्ड के  श्रृंगिरिषी आश्रम, जलल्पा स्थान, कानीमोड जंगल, और नक्सल प्रभावित कजरा थाना क्षेत्र के टाली झरना, छोटकी झरना आदी जगहों पर नववर्ष का जश्न को लेकर उत्साह अपने चरम पर दिखा। नया साल मुबारक हो । हैप्पी न्यू ईयर 2014 की गूंज से जंगली और पहाडी ईलाकों का महौल खुशनुमा बना रहा।

प्राकृतिक छटा काफी मनोरम
ऐतिहासिक श्रृंगिरिषी आश्रम की प्राकृतिक छटा काफी मनोरम है। पहाडों की कन्द्राओं से निकला अविरल जल स्त्रोत की झरना से बहता पानी में लोग डुबकियां लगाकर लोग प्रसन्नचित हो रहे थे ।
 सबसे बडी खासयित यह है कि यहां की पानी पाचन क्रिया को ठीक रखता है। किसी भी तरह की गरीष्ठ भोजन खाने के बाद भी यहां आधा धण्टा में भुख लग जाती है। यहां लोग सप्ताह भर रहकर जंगल में मंगल मनाते है।
पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व
ज्ञात हो कि... बाल्मिकी रामायण और रामचरित्र मानस के अनुसार इस श्रंृगीरिषी आश्रम में त्रेतायुगिन राजा दशरथ के चारो पुत्र श्री राम, लक्षमण, भरत, शत्रुधन का मुंडन संस्कार हुआ था। यहां भगवान श्री राम अपने मुंहबोली बहन शांता के साथ महीनों रहकर इस मनोरम छटा का आनंद लिया था। शांता को राजा दशरथ ने गोद लिया था। और वो अंग राज के प्रतापी ब्राहमण के श्रंृगिदेव से विवाह रचाई थी । जो लखीसराय जिला के चानन थाना क्षेत्र के एक आश्रम में रहती थी। आज श्रृंगिरिषी  आश्रम के नाम से प्रसिद्व है। यहां के पौराणिक एवं ऐतिहासिक जगह का प्रमाण स्वरूप को देखकर प्रफुल्लित हो रहे है।
उत्साह अपने चरम पर
 नया साल 2014 के आगमन पर लोगों में उमंग चरम पर है। शहर के लाली पहाडी और काली पहाडी पर हर कोई हिन्दी भोजपुरी गीतों की रसफुहार, गुलाबी मौसम , तो कहीं युवा और युवतियों का अद्भूत नृत्य से मस्ती  में डुबने को तैयार है। सभी  एक दुसरे से मिलकर नया साल का बधाई देने मशगुल है। रंग-विरंगे विभिन्न डिजाइनों के ग्रीटिंगस के माध्यम से अपने मित्रों और प्रियजनो को शुभकामनाऐं देते रहे। खासकर छोटे-छोटे बच्चों को उत्साह अपने चरम पर है। गले से गले मिलकर तो कोइ हाथ से हाथ मिलाकर शुभकामनाऐं देने में जुटे रहे। 
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आतिशबाजी के साथ नवबर्ष का स्वागत
स्थानीय डी एल पी एंड क्लब लखीसराय के द्वारा सामुहिक रूप से नवबर्ष का स्वागत की तैयारी की गई। के0 आर0 के मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  संध्या 5 बजे से नववर्ष 2014 को यादगार बनाने के लिए उत्साह से लबरेज होकर क्लब के सदस्यों ने रंग-विरंगे आतिशबाजी की । आतिशबाजी से आकाश में अद्भुत दृश्य का नाजारा बना रहा । धण्टों तक आतिशबाजी का सिलसिला चलता रहा। और इस क्रम में लोगों ने एक दुसरे से गले मिलकर मिठाईयां खिलाकर नववर्ष की शुभकामनाऐं दी। डीजे साउण्ड पर हिन्दी गीत संगीत नृत्य का दौर शुरू हुआ जहां लोगों ने जमकर थिरके और मजे किये । संध्या 7 बजे से गायिका मंजु भारती के द्वारा गीतों की रसमंजरी सांस्कृतिक कार्यक्रम देर रात तक जारी रहेगा ।
क्लब के संरक्षक शैलेन्द्र कुमार ने सभी जिलाबासीयों को नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि नया साल का जश्न अपने अपने तरीके से जरूर मनाऐं लेकिन यह ध्यान रहे कि सद्भाव का वातावरण बना रहे जिससे आनेवाला दिन किन्तु परन्तु से उपर उठकर देश और समाज में शान्ति और स्नेह का महौल बने। इसी उदाहरण के साथ 2014 को यादगार बनाया जा सके।
 डीएलपी एण्ड क्लब के सदस्यों ने नववर्ष के स्वागत में जमकर आतिशबाजी की तथा डीजे की धुनों पर थिरकते रहे।
 इस मौके पर क्लब के अध्यक्ष नवनीत कुमार , सचिव मि0 मंडे शर्मा, डा0 नबाव, नगरपरिषद उपसभापति अरविन्द पासवान, जिला परिषद अध्यक्ष सुदामा देवी, सहित शहर के सभी राजनैतिक , समाजिक , व्यवसायिक और पत्रकारगण उपस्थित थे।

शराब की खूब बिक्री हुई।

 नववर्ष 2014 का पहला दिन जिला वासियों ने पूरे उत्साह, उमंग और हर्षोल्लास के बीच शांतिपूर्वक मनाया। लजीज खाने और डीजे की धुन पर थिरकते युवा तथा जिले के सभी धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में लोगों ने पूजा-अर्चना कर नए साल के पहले दिन की शुरूआत की। नगर परिषद अंतर्गत प्रसिद्ध श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर में दिनभर लोगों ने भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा-अर्चना की। उधर अपने परिवार, दोस्तों के साथ खूब मस्ती की तथा लजीज खाने का स्वाद लिया। शहर स्थित हसनपुर पहाड़, लाल पहाड़ी पर दोपहर बाद बड़ी संख्या में शहर वासी जमकर पिकनिक मनाया। मीट, मछली और मुर्गा बाजार उदास रहा। लेकिन शराब की खूब बिक्री हुई। बड़ी संख्या में लोगों ने देर शाम तक जाम से जाम टकराकर नए साल का स्वागत किया। श्रृंगीऋषि धाम में भी खूब भीड़ जुटी और स्नान के बाद पूजा और फिर पिकनिक मनाया गया। यहां काफी संख्या में दूर दूर से लोगों ने पहुंचकर कुंड में स्नान किया और फिर शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।

Tuesday, 10 December 2013

बालु कटाव के विरोध

लखीसराय जिला के बालुधाट पर बालु की निकासी के बाद भी शहर के अवासीय भु-भाग से सटे किउल नदी किनारे बाला जमीन की खुदाईकर बालु की अबैध निकासी जारी है।

 जबकी बिहार सरकार के बालुनीति के अनुसार शहर किनारे या गांव के किनारे बसे आवासीय भु-भाग बाला क्षेत्र में किसी तरह की बालु निकासी करना वर्जित है। फिर भी कुछ दबंग टाईप के लोग प्रशासन की नियमों का अनदेखी करते हुए लखीसराय शहर केस्थित किउल नदी किनारे बसे आवासीय भु-भाग को टच करते हुए खुदाईकर बालु की अबैध धन्धा धडल्ले से किया जा रहा है। जिला प्रशासन के खनन विभाग के पदाधिकारी मनोज कुमार अम्वष्ठ ने कैमरा के सामने कुछ भी बताने से इन्कार किया ऐसे मौखिक बताया कि पुलिसिया तंत्र नहीं मिल पाता है सहयोगीयों की कमी रहने की रोना रोते है। और किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर पा रहे है।

जबकी स्थानीय लोगों ने इस बालु कटाव के विरोध कर रहा है। अगर इसी तरह से बालु कटाव होता रहा तो आने बाला बरसात में सैकडों धर किउल नदी केआगोस में समा जायेगा। और करोडों रू0 की जान-माल की क्षति होगी। फिर इसका जिम्मेदार कौन होगा ।

भारतीय खादय निगम पर अनियमितता का आरोप

लखीसराय जिले के सभी 32 मिलों में जिलाप्रशासन पैक्स अध्यक्ष के द्वारा किसानों से धान खरीदकर स्थानीय मिलों में चावल मुहैयया कराने के लिए कुल 2600 मैट्कि टन चावल सरकार को देने का लक्ष्य था जिसमें मात्र मिलों द्वारा 1600 मैट्कि टन चावल दिया गया है। और बाकी चावल कागजों पर दर्शाकर राज्य सरकार रूपया की बन्दरबांट कर लिया है।

जिसमें दर्जनों मिल मालिक और पैक्स अध्यक्ष ने भारतीय खादय निगम के अधिकारीयों पर अनियमितता का आरोप लगाया है। लेकिन कैमरा के सामने प्रशासन से दुश्मनी नहीं मोल लेना चाहते है। क्योकि इनलोगों ने सरकार के नियमों के अनुसार एग्रीमेन्ट कर चुके है।
 फिर भी प्रति टैक्टर उठाव में जिला के पदाधिकारी नजायज तरीके से 20 हजार रू0 ले रहे है। जब अधिकारीयों से बात किया गया तो बात गोल-मटोल कर इसे मिडिया मे नहीं दिखाने का आग्रह किया ।

जनसरोकार से भटके लक्ष्य पर सेमिनार

लखीसराय सांस्कृतिक मंच के तत्वधान में आज स्थानीय क्रान्ति प्रेस में युवा कवि व निर्भिक पत्रकार स्व0 कमल कुमार की 10वीं पुण्यतिथि के अबसर पर समाज की दशा और दिशा को एक नया आयाम स्थापित करने के उददेश्य से एक सेमिनार का आयोजन किया गया। आज जनसरोकार से भटके लक्ष्य पर सेमिनार का मुख्य विषय रखा गया । जिसमें सर्वप्रथम स्वतंत्र निर्भिक पत्रकार कमल कुमार जी के तैल्यचित्र पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हे श्रद्वांजली दिया। और तमाम हिन्दी साहित्य सभा के दर्जनों कवि और लेखकों ने उनके रचना और कार्यशैली की चर्चा किया। साथ ही जनसरोकार से भटके लक्ष्य पर परिचर्चा किया गया।

संस्था के सचिव रणजीत सम्राट ने कहा कि- पत्रकार बन्धु, कवि,कथाकार,व्यंगकार और लेखकों ने अपनी कलम की धार से भटके लक्ष्य को जनसरोकार के हित में आगे बढाने की जरूरत है तभी समाज में शान्ति-स्नेह और सद्भाव का वातावरण पैदा होगी। इस सेमिनार सभा की अध्यक्षता मगही के मुर्धन्य कवि दशरथ जी ने किया ।

कवि दशरथ जी ने कहा कि- शिक्षा से संस्कार और संस्कार से संस्कृति का निर्माण होता है। शिक्षा के लिए केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं बल्कि कल के लाल पन्नों से कल के लिए पुरखों के व्यक्तित्व और कृतित्व निकाल कर समाज के आगे परोसना अति आवश्यक है । आज हम कमल कुमार की 10वीं पुण्यतिथि पर उनसे सीख लें की जिस तरह स्व0 कमल कुमार आजीवन समाज के सजग प्रहरी रहे ठीक उसी तरह अपने जीवनकाल में हम समाज के लिए समर्पित रहे।

हिन्दी साहित्य सम्मेलन के कवि राजेश्वरी प्र0 सिंह ने कहा कि - कमल कुमार हिन्दी साहित्य के धरोहर थे। मेरी मित्रता का कारण हिन्दी के प्रति उनकी आशक्ति को हमने परखा था। समाजिक परिवर्तन धोतक थे, रूढिवादिता समाप्त करना उनका नारा था । समाज की विसंगतियों को दुर करने की जज्वा था । जनसरोकार के सिपाही थे। जो आज हमसभी को होना चाहिए।

कवि सुखदेव मोदी ने कहा कि - सभी को जनता की आम समस्याओं से रूबरू होकर जनमानस के प्रति सजग होकर भटके लक्ष्य को दशा और दिशा दिया जा सकता है।

डा0 सिद्वेश्वर महतों ने कहा कि - कमल की किससे कहुं । समाज की तमाम विसंगतियों को सुधारने की प्रयास किया है। प्रशासण की कार्यशैली जनसरोकार से भटक गया है। उन्हे सुधारने की आवश्यकता है।

इस अबसर पर लखीसराय सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष- अरविन्द कुमार, महासचिव- रणजीत सम्राट , सुबोध कुमार, सीताराम आजाद, राहुल कुमार , रोहित कुमार, कवि राजेश्वरी प्र0 सिंह , सुखदेव मोदी, ओमप्रकाश स्नेही, डा0 सिद्वेश्वर प्र0 महतों आदि लोग उपस्थित थे।



 

 


लगातार कांबिंग एवं सर्च ऑपरेशन

लखीसराय प्रतिबंधित संगठन माओवादी नक्सली संगठन के सदस्यों ने बीते 5 दिसंबर से पीएलजीए सप्ताह मनाए जाने को लेकर नक्सल क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई है। तथा क्षेत्र में लगातार कांबिंग एवं सर्च ऑपरेशन जारी है

Sunday, 8 December 2013

सर्च अभियान

लखीसराय सूबे के औरंगाबाद एवं मुंगेर जिले के जमालपुर में नक्सलियों द्वारा बड़ी घटना को अंजाम देने बाद रेड एंड सर्च अभियान तेज है। एसपी राजीव मिश्रा के निर्देश पर एएसपी अभियान राजीव कुमार की अगुवाई में सीआरपीएफ एवं पुलिस जवानों ने पीरी बाजार थाना क्षेत्र के जंगलों में पूरे दिन रेड एंड सर्च अभियान चलाया।


सीआरपीएफ, एसटीएफ, सैप बीएमपी के जवान इसमें शामिल थे। 131 बटालियन सीआरपीएफ कैंप बन्नू बगीचा के सहायक कंपनी कमांडर धर्मेन्द्र कुमार के अनुसार सीआरपीएफ की दो टुकड़ियां कछुआ बासबुंड की तरफ से जंगल की ओर बढ़ रही है


जबकि एसटीएफ बीएमपी के जवान महुलिया मननपुर गांव की ओर से चेहरोन कोड़ासी के रास्ते जंगल की ओर अभियान में शामिल है। पीरी बाजार क्षेत्र के घोघी कोड़ासी, लठिया, लहसोरवा, खुद्दीवन, बरियासन, बलुआही, कटहरा, बंगाली बांध में रेड एंड सर्च अभियान चला। जबकि चानन के थानाध्यक्ष पवन कुमार सिंह ने कहा कि कछुआ, बासकुंड, सतघरवा, महुलिया, चेहरौन, कोड़ासी, मननपुर नीमियां टांड आदि इलाकों में आरएएसओ चलाया गया।


नक्सल प्रभावित चानन थाना क्षेत्र के जंगली पहाड़ी इलाकों में सर्च अभियान चलाया गया। जिसमें 131 बटालियन सीआरपीएफ कैंप बन्नू बगीचा के इंस्पेक्टर आरआर सिंह, चानन थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष पवन कुमार सिंह, एसआई ओम प्रकाश कुमार के अलावा सैप बीएमपी के जवान शामिल है।

सर्च अभियान नक्सल प्रभावित क्षेत्र कछुआ, बासकुंड, महुलिया, मननपुर, सतघरवा, महजनवा, बासकुंड डैम जंगल में चलाया गया। नक्सलियों से निपटने के लिए हर संभव पूरी तैयारी है। सूत्रों ने यह भी बताया कि जंगलों से नक्सलियों के आने जाने के हरेक रास्तों पर सीआरपीएफ एम्बुस लगाए बैठे रहते हैं।

 उधर एएसपी अभियान ने बताया कि क्षेत्र में शांति रखने को लेकर क्षेत्र में गश्ती सर्च अभियान चलाकर सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

Byte....एसपी ......राजीव मिश्रा

Friday, 6 December 2013

कांबिंग आपरेशन

लखीसराय जिला के नक्सल प्रभावित इलाका में माओवादीयों की धर-पकड के लिए शीतला कोडासी, हनुमान गढ, कानीमोड,जल्लपा स्थान के पहाडी एवं जंगली क्षेत्रों में पुलिस की कांम्बिंग आपरेशन जारी । छतिसगढ से आए महिला गुरिल्ल मारक दस्ता की छिपे होने की सुचना । साहिबगंज-दानापुर इंटरसिटी ट्रेन पर नक्सली हमले के बाद लखीसराय में पुलिस की सघन कांबिंग आपरेशन की गई।
 जिले में कजरा, पीरी बाजार एवं चानन थानों की पुलिस ने जंगल एवं पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कांबिंग की। इस अभियान का नेतृत्व एएसपी (अभियान) राजीव कुमार एवं लखीसराय के एसडीपीओ एस के विश्वास ने किया।
Byte...एस के विश्वास ... एस डी पी ओ 

Thursday, 5 December 2013

वर्किंग जर्नलिस्ट रेगुलेशन

केबल टेलीविज़न नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट 1995 की धारा 20 के अंतर्गत न्यूज़ चैनलों को उनका लाइसेंस
पत्रकार यह पढ़कर जानें उनकी नौकरी कितनी पक्की-कच्ची है
Category: सुख-दुख...
पूर्णत पत्रकारिता के पेशे में जीवनयापन करने वाले पत्रकारों के लिए भारत सरकार ने कई ऐसे नियम बनाए हैं जिससे वे सरकारी कर्मचारी की तरह निश्चिंत होकर काम कर सकते हैं। काम और वेतन दोनों केन्द्रीय कर्मचारी के समान होगा।

तीन साल बाद नौकरी पक्की: श्रमजीवी पत्रकार और अन्य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा शर्त) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम 1955 की धारा 5 के तहत यह प्रावधान है कि एक ही समाचार पत्र में तीन साल की सेवा देने वाले पत्रकार को अनुशासनात्मक कार्यवाही छोड़कर किसी भी तरह से नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। यदि किसी कारणवश पत्रकार नौकरी छोड़ता है या कोई अन्य कारण है तो वह ग्रेच्युटी पाने का अधिकारी है।

वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955, औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 का विस्तार रूप है। औद्योगिक अधिनियम की धारा 3 (1) से श्रमजीवी पत्रकारों के सम्बन्ध में वे सब उपबंध लागू किये गए हैं जो औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में कर्मकारों (वर्कमैन)पर लागू होते हैं। किन्तु धारा 3 (2) के जरिये पत्रकारों की छंटनी के विषय में यह सुधार किया गया है।

छंटनी का नियम: जर्नलिस्ट एक्ट 1955 की धारा 3(2) के तहत किसी पत्रकार को संस्थान से निकालने के पूर्व 6 माह व संपादक को तीन माह पहले सूचना देनी पड़ती है। या फिर इसके आधे माह का एक मुश्त वेतन देना पड़ता है। धारा 5 के तहत मृत्यु, सेवानिवृत्ति, दस वर्ष की सेवा देने के बाद या किसी कारण वर्ष नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारी (जो तीन साल सेवा दें चुके हो) को सेवाकाल के हर पूरे किए वर्ष या उसके छह मास से अधिक के किसी भाग पर, 15 दिन के औसत वेतन के बराबर धनराशि दी जाएगी। स्वेच्छा से इस्तीफा देने वाले श्रमजीवी पत्रकार को अधिकाधिक साढ़े 12 माह के औसत वेतन के बराबर ग्रेच्युटी मिलेगा।

काम का समय: धारा 6 के तहत काम के समय का प्रावधान है। चार सप्ताहों में 144 घंटों से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकता। सात दिन में एक दिन (24 घंटे) का विश्राम। दो प्रकार की छुट्टियां हैं पहली उपार्जित छुट्टी और चिकित्सा छुट्टी। उपार्जित छुट्टी काम पर व्यतीत अवधि की 1/11 से कम नहीं होगी और यह पूरी तनख्वाह पर मिलेगी। चिकित्सा प्रमाण-पत्र पर चिकित्सा छुट्टियाँ कार्य पर व्यतीत अवधि की 1/18 से कम नहीं होंगी। यह आधी तनख्वाह पर दिया जाएंगा। मतलब एक माह की उपार्जित छुट्टी व चार सप्ताह की मेडिकल छुट्टी (आधे वेतन पर)।

वैसे धारा 7 के तहत काम के घंटों का प्रावधान संपादक पर लागू नहीं होता। लेकिन श्रमजीवी पत्रकारों से दिन की पारी में 6 घंटे से ज्यादा व रात्रि की पारी में साढ़े पांच घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकता। दिन में चार घंटे में एक घंटे का विश्राम व रात्रि में तीन घंटे में आधे घंटे का विश्राम दिया जायेगा। एक पत्रकार वर्ष में 10 सामान्य छुट्टियों का अधिकारी है। लेकिन यदि किसी कारणवश छुट्टी के दिन भी कार्य करना पड़ता है तो मालिक व पत्रकार की सहमति से किसी अन्य दिन छुट्टी ले सकता है। 11 माह में एक माह की उपार्जित छुट्टी दी जाएगी। किन्तु 90 उपार्जित छुट्टियां एकत्र हो जाने के बाद और छुट्टियां उपार्जित नहीं मानी जायेंगी। सामान्य छुट्टियों, आकस्मिक छुट्टियों और टीका छुट्टी की अवधि को काम पर व्यतीत अवधि माना जाएगा। प्रत्येक 18 मास की अवधि में एक मास की छुट्टी चिकित्सक के प्रमाण-पत्र पर दी जाएगी। यह छुट्टी आधे वेतन पर होगी। ऐसी महिला श्रमजीवी पत्रकारों को, जिनकी सेवा एक वर्ष से अधिक की हो, तीन मास तक की प्रसूति छुट्टी दी जाएगी। यह छुट्टी गर्भपात होने पर भी सुलभ की जाएगी। इसके अलावा नियोजक की इच्छा पर वर्ष में 15 दिन की आकस्मिक छुट्टी दी जाएगी।

मजदूरी की दरें: धारा 8 (1) में उपबंधित किया गया है कि केंद्रीय सरकार एक निर्धारित रीति से श्रमजीवी पत्रकारों और अन्य समाचारपत्र-कर्मचारियों के लिए मजदूरी की दरें नियत कर सकेगी और धारा 8 (2) के तहत मजदूरी कि दरों को वह ऐसे अंतरालों पर, जैसा वह ठीक समझे, समय-समय पर पुनरीक्षित कर सकेगी। दरों का निर्धारण और पुनरीक्षण कालानुपाती (टाइम वर्क) और मात्रानुपाती (पीस वर्क) दोनों प्रकार के कामों के लिए किया जा सकेगा। इसलिए धारा 9 में एक मजदूरी बोर्ड के गठन का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में मजीठिया वेतन बोर्ड लागू है और मजदूरी दरें वेतन बोर्ड की दरों से किसी तरह कम नहीं होगी नहीं तो धारा 13 के तहत अधिनियम का उल्लंघन करने के आरोप में 500 रूपए का जुर्माना अदा करना पड़ेगा।

कैसे लें शासन की मदद: शासन की मदद लेने के लिए पहले श्रमजीवी पत्रकार या मीडिया संस्थान का कर्मचारी श्रम विभाग जाकर बकायदा लिखित शिकायत कर सकता है। यदि 45 दिन में श्रम विभाग कोई कार्यवाही नहीं करता और कोर्ट में परिवाद भी दायर नहीं करता तो कोई भी कर्मचारी औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 31(3) के तहत सीधे श्रम न्यायालय में परिवाद दायर कर सकता है। इसके लिए पूर्व शिकायत की कापी भी संलग्न करना अनिवार्य है। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 25 के तहत लगातार 240 दिन से ज्यादा सेवा देना वाला कर्मचारी नियमित कर्मचारी माना जाएगा और उसकी सेवाएं संतोषजनक मानी जाती हैं। चूंकि बड़े संस्थानों में मीडियाकर्मी या पत्रकारों को बैंक के माध्यम से भुगतान होता है इसलिए किसी को यह सिद्ध करने में कोई परेषानी नहीं होगी कि वह उक्त संस्था का कर्मचारी है। खास बात यह है कि ठेकेदारी या प्लेसमेंट के कर्मचारी को भी यही वेतन दिया जाएगा और वेतन ना देने का दोषी संबंधित व्यक्ति होगा। उस पर भी इसी अधिनियम की धारा के तहत कार्यवाही होगी।