लखीसराय : गर्मी की आहट पाते ही चापाकल व कुआं के सूख जाने से जिले के जंगली-पहाड़ी क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। लोगों के कंठ सूखने लगे हैं।
प्यास बुझाने के लिए लोगों को दो से चार किलोमीटर की दूरी तय कर पानी लाना पड़ रहा है। पीएचईडी विभाग द्वारा पेयजल की समस्या से जूझने वाले सूर्यगढ़ा प्रखंड के धबोखर, लहसोरवा, खैरा, मंझियावा, बंगाली बांध, पूनाडीह, नवकाडीह, टाली कोड़ासी, बरियासन, सूअरकोल, सिमरातरी, कानीमोह आदि एवं चानन प्रखंड के गोबरदाहा, चेरांव, बासकुंड, कछुआ, महजनमा, सतघरवा, जगुआजोर सहित 25 गांवों को चिन्हित किया है। ऐसे गांवों में टैंकर से पेयजल उपलब्ध कराया जाना है।
जिले के 25 गांवों में पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है। उक्त सभी गांवों में कम से कम दो माह तक प्रतिदिन कम से कम एक टैंकर पेयजल भेजना जरूरी है। पीएचईडी विभाग को प्रति टैंकर पानी भेजने पर कम से कम दो हजार रुपए खर्च होगा । इस तरह 25 गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाने पर प्रतिदिन पचास हजार रुपए खर्च होगा । विभागीय आदेश के बाद ही इतनी अधिक राशि खर्च की जा सकेगी।
पेयजल की समस्या के कारण
जंगली पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में जमीन के नीचे दलदल पाया जाता है। कुछ जगहों पर जमीन के नीचे पहाड़ भी मिलता है। इस कारण चापाकल व कुआं सफल नहीं हो पाता है तथा गर्मी के मौसम में पानी का सतह नीचे चले जाने पर चापाकल व कुआं सूख जाता है।
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