लखीसराय सदर अस्पाताल में कहने को तो 100 वेड है। लेकिन व्यवस्था के नामपर कुछ भी सही नहीं है। मरीजो को वेड पर विस्तर रोज बदला नहीं जाता है। मच्छरदानी नहीं है। और तो और दवा की काफी कमी है । हर मरीजों को बाजार के दवा दुकान से दवा लानी पडती है ।सदर अस्पाताल में सिविल सर्जन शशीभुषण सिंह सप्ताह में मात्र 2 दिन ही डियुटी देते है। बाकी दिन वो अपने अबासीय नर्सिंग होम में समय देते है। महिला डाक्टर का अभाव है। नर्स से ही प्रसव कार्य जैसे-तैसे निवटाया जा रहा है। फोर्थ ग्रेड का कर्मचारी मरहम पटटी और अन्य कार्य करते है। एक्सरा मशीन, खुन जांच, दांत जांच,आदि तो केबल खानापूर्ति के लिए केबल हाथी का दांत सावित हो रहा है।
स्वस्थ समाज विकसित करने तथा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद विभाग बेखबर है। स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति में सुधार होने का नाम नहीं ले रहा है। रोगी के घंटों इन्तजार के बाद भी दिन के ग्यारह बजे तक एक भी डॉक्टर नहीं आए।
प्रतीक्षा कर रहे रोगियों ने चिकित्सक की लापरवाही पर क्षोभ व्यक्त करते हुए विभाग के वरीय पदाधिकारी से चिकित्सा सुविधा में सुधार लाने की मांग की।
जबकी विगत माह में पटना से आए जांच दल ने जांच किया तो पाया कि- सदर अस्पाताल में दवाईयों की कमी पाई गई। वेडसीट और मच्छरदानी का अभाव पाया गया । बिहार सरकार के मंत्री अश्विनी चैबे ने विगत दिनों स्वास्थ्य शिविर में कहा था कि -कुछ ही दिनों में व्यवस्था में सुधार हो जाय ेगी । और अस्पाताल कर्मी को फटकार भी लगाया था । सिविल सर्जन पर कई आरोप भी लगें । फिर भी स्थिति जस की तस है।
बाईट-शशीभुषण सिंह ....सिविल सर्जन
बाईट- विनय कुमार- मरीज
बाईट-महेश कुमार- मरीज
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