किऊल नदी के बालू घाट की नई बंदोबस्ती के बाद बालू उठाव को लेकर लखीसराय व जमुई जिले की सीमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दोनों जिले के सीमांकन को लेकर दोनों जिलों के खनिज विकास पदाधिकारी के नेतृत्व में अंचलाधिकारी, अंचल निरीक्षक एवं अंचल अमीन के द्वारा पुलिस अभिरक्षा में मापी का कार्य शुरू किया गया। जिसमें किऊल नदी स्थित भलूई घाट से मंझवे गांव स्थित जमुई-लखीसराय मुख्य सड़क तक की पैमाइस की गई।
जिलाधिकारी रामरूप सिंह की अध्यक्षता में क्रय समिति की बैठक में विभाग द्वारा तय निर्देश और शर्त के तहत निविदा प्रक्रिया में एक मात्र वीडर के रूप में बड़हिया के सुजीत कुमार के नाम किऊल नदी बालू घाट की बंदोबस्ती (1.04.2013 से 31.12.2013 तक के लिए) किऊल नदी बालू घाट की बंदोबस्ती सुरक्षित राशि से बीस फीसद बढ़ाकर छह करोड़ 81 लाख 93 हजार 735 रुपए में की गई। वीडर द्वारा बंदोबस्ती के लिए विभाग द्वारा तय अग्रधन राशि के रूप में 68 लाख 20 हजार रुपये की राशि जमा की गई।
लखीसराय शहर के बालू घाट के किनारे की रैयती जमीन कभी भी लाल हो सकती है। ऐसी स्थिति बालू एवं मिट्टी खनन को अवैध करार देते हुए जिला प्रशासन द्वारा खनन पर पूर्णत: रोक लगा दिए जाने के कारण उत्पन्न हुई है। बालू घाट से सात ट्रैक्टर को जब्त कर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। प्रशासन की इस सख्ती से एवं रैयती जमीन से खनन पर प्रतिबंध लगाने के बाद रैयत किसानों एवं मजदूरों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि एक साजिश के तहत प्रशासन यह कार्रवाई की है। सूत्र बताते हैं कि किशनपुर बालू घाट पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के पीछे कुछ सफेदपोश लोगों के हाथ हैं। बालू घाट की रैयती जमीन कभी भी लाल हो सकती है। रैयत किसानों का आक्रोश भीतर ही भीतर सुलग रहा है। किसानों की मानें तो रैयती जमीन पर बालू का फैलाव बढ़ जाने एवं उपजाऊ भूमि बंजर हो जाने के बाद रैयत मिट्टी व बालू काटकर उसे बेचकर अपना जीवनयापन करने लगे। रोजी-रोटी की जुगाड़ नहीं होने पर पेट की ज्वाला चिंगारी बनकर कहीं फूट पड़ी तो प्रशासन के लिए भी चुनौती होगी। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
लखीसराय के नोनगढ़ गांव स्थित किऊल नदी के बालू घाट पर तैनात मुंशी सुनील यादव पर पूर्व विधायक व उनके गुर्गो ने जानलेवा हमला , बेरहमी से पीट कर अधमरा कर उसके पास मौजूद 2.35 लाख रुपये लूट लिए। हलसी थाना क्षेत्र के नोनगढ़ गांव स्थित किऊल नदी के बालू घाट पर तैनात मुंशी सुनील यादव पर पूर्व विधायक व उनके गुर्गो ने रात जानलेवा हमला किया। उसे बेरहमी से पीट कर अधमरा कर दिया। उसके पास मौजूद 2.35 लाख रुपये लूट लिए। दो करोड़ की रंगदारी भी मांगी। घटना का कारण वर्चस्व की लड़ाई बताया जा रहा है। हमलावर बालू घाट को चलने न देने की धमकी देकर वाहनों पर सवार होकर भाग गए। इसमें सूर्यगढ़ा के पूर्व विधायक व राजद के जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव समेत राजू गुप्ता व एक अन्य समेत 20-25 अज्ञात हमलावरों को अभियुक्त बनाया गया है। घटना के बाद बालू घाट को लेकर छिड़ी जंग और बढ़ने के आसार हैं। घटना का कारण वर्चस्व की लड़ाई बताया जा रहा है।
V.0 1..सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व राजद विधायक प्रहलाद यादव का कहना है ...बालू घाट के संवेदक के साथ मारपीट करने, 2.35 लाख रुपये लूटने एवं दो करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप बेबुनियाद और सत्य से परे है। यह राजनीति से प्रेरित होकर छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास है।
सत्ता पक्ष के लोगों ने उनके दामन पर दाग लगाने की साजिश रची है। उन्हें लखीसराय के बालू घाट अथवा उससे जुड़े लोगों से कोई मतलब भी नहीं है। उन्होंने कहा, वे हाल ही में गंभीर बीमारी का इलाज कराकर लौटे हैं। डॉक्टर की सलाह पर पूर्ण रूप से बेड रेस्ट पर हैं। इस बात को जिले के लोग अच्छी तरह से जानते हैं। ऐसे में उनके द्वारा नोनगढ़ बालू घाट पर जाकर मारपीट, लूट और रंगदारी मांगी जाना हास्यास्पद बात है
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