लखीसराय जिला के लालीपहाडी व काली पहाडी में पानी का अभाव ....बालु-खेादकर निकालते पानी
लखीसराय जिला के लालीपहाडी व काली पहाडी में अभी से ही कुआॅ और 3 मार्ग सेक्सन के चापाकल का लेयर भाग गया है जिससे पानी का अभाव हो गया है और भयंकर जल का संकट उत्पन्न हो गया है । अब यहाॅ के लोग किउल की सुखी नदी से प्यास बुझाने के लिए पानी की व्यवस्था बालु-खेादकर चुआॅ से पानी निकालकर जीवन बचाने की संघर्ष कर रहा है लगातार दो बर्षो से सुखाड आने से भगवान भी पानी की बर्षा करना छोड दिया है जिससे यहाॅ का कॅुआ , चापाकल , और किउल नदी भी अब सुख गया है । पहले लखीसराय जिला के जंगलों और पहाडों के कन्द्राओं से पानी आ जाया करता था लेकिन अब 4 से 5 बर्षो से इस नदी में पानी का नसीव नहीं है जिससे यह नदी अब नाला बनकर रह गया है। आज भी हजारों गरीब परिवार के लोग इसी सुखी नदी से बालु को खोद-खोदकर पानी निकाल कर अपने प्यास और घर की सारी कामों को निपटाती है । पहाडी इलाका होने के कारण यहाॅ सरकारी मशीन द्वारा पानी की भी व्यवस्था नहीं हो पाता है अभी से ही सुखी नदी से बालु को खोदने के बाद भी कहीं-कहीं पानी नहीं निकल पाता है काफी बालु-खेादकर लोग सैकडों की संख्या में लालीपहाडी व काली पहाडी के लोग रोज इसी सुखी नदी से पानी के लिए जाती है
और कुछ लोग सार्वजनिक कुआॅ पर पानी के लिए नम्बर लगाकर लेते है जो कुछ घण्टो में शेष हो जाता है और पानी-पानी के लिए व्याकुल होकर कभी - कभी यहाॅ के लोग अपना दम तक तोड देते है
और जिला प्रशासन मरने बालों को कबीर अन्तेष्ठी के तहत 1500 रू0 देकर अपना पल्ला झार लेती है ।
लखीसराय नगर प्रशासन और जिला प्रशासन के द्वारा 3 बार इस इलाका के लिए टेंडर निकाल कर पानी का संकट से निजात दिलाने की प्रयास तो किया गया लेकिन प्रशासनिक लापारवाही के कारण तीनों बार टेंडर कैन्सिल हो गया और यह संकट जस की तस बनी रह गई । बर्ष 2005-2006 में 49 लाख 72 हजार रूपया का टेंडर हुआ । बर्ष 2009-2010 में 2 करोड 59 लाख रूपया का आवंटन किया गया जो टेंडर में कम राशि होने के कारण फिर कैसिल हो गया । पुन तीसरी बार 7 करोड की लागत से जल मिनार बनाने के लिए जल निगम पटना को भेजा जा चुका है जो आज तक अधर में लटका है ।
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