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Thursday, 15 November 2012

बिहार में शोध की आवश्यकता


राज्य के पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह बडहिया के तालाबों में मछली पालन को बढावा देने के उददेश्य से निरिक्षण किया ! जिसमें उन्होने बताया कि किसानों को खेतों में फसल उत्पादन के साथ तालाबों में मछली पालन भी करना चाहिए. इससे उनकी आय दस गुणा अधिक होगी इस तरह मछली पालन कर लोगों की बेरोजगारी दुर होगी और लाखों रूपया की आमदनी होगा ! सही तरीके से मछली पालन में लोग लग जाए तो बिहार की राजस्व में बृद्वि होगी ।  बिहार में शोध की आवश्यकता है.  उन्होंने कहा कि पूर्व में मछली पालन का बजट पांच से सात करोड़ तक का हुआ करता था. इसे अब 700 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा से फतुहा तक के इलाके को मछली उत्पादन क्षेत्र में परिवर्तित करने की योजना है.
मंत्री ने कहा कि नहर के अलावा खेत में पोखर का निर्माण कर किसानों को मछली पालन के टिप्स दिये जाने की योजना है. इसके लिए किसानों को 40 फीसदी अनुदान दिया जायेगा. जल का भूमिगत स्त्रोत राज्य में है. यूनिट की लागत राशि एन एफ बी बी ने तीन से बढ़ा कर चार लाख कर दिया है.
इसमें किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा. एक हेक्टेयर में एक बोरिंग पर 80 प्रतिशत, डीजल पंप पर 50 प्रतिशत, तीन एचपी के चार लाख 50 हजार की लागत वाले सोलर पंप जो डेढ़ लाख लीटर पानी प्रतिदिन देते हैं पर किसानों को 90 फीसदी अनुदान दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि नये सत्र में आंध्रप्रदेश से आने वाली मछली को रोकने के साथ बिहार से मछली दूसरे प्रांतों को भेजने की योजना है.
देश के 12 राज्यों में इस पकार की योजना चल रही है. बिहार में शोध की आवश्यकता है.

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