लखीसराय थाना की पुलिस के गिरफत में है भगवान। दर्जनों बेशकिमती मुर्तियों को थाना के बाहर रख दिया गया है । जिनकी कभी पुजा-पाठ तक नहीं होती है । कहने को तो यह चोरों से बरामद की गई है यहां इसे लेजाने बाला कोई जमानतदार तक नहीं है । इसे ना तो थाना का मालखाना नसीव हुआ और नहीं कोई मंदिर । मजबुरी बस लखीसराय थाना की पहरेदारी करते है भगवान । रहना है तो कुछ करना ही पडेगा । लखीसराय में पालकालीन वेशकीमती मूर्तियों की अनदेखी हो रही है लखीसराय में 18वीं सदी के पालवंश कालिन सैकडों बेशकिमती काले पत्थर से बना देवी-देवताओं की मुर्ति जहाॅ -तहाॅ बिखरी पडी है।इस शहर में एक अदद् संग्रहालय तक नहीं है । नतीजतन समय-समय पर इस शहर और जिले के अन्य हिस्सों से मिलनेवाली दुर्लभ मूर्तियाॅ जहाॅ-तहाॅ विखरी पडी है । ऐसी मूर्तियों में से कई तो चोरी भी हो चुकी है ।लखीसराय शहर के साथ ही इस जिले के कई अन्य ग्राम ऐतिहासिक अवशेषों से भरे पडे है । बौद्व, सनातन,एवं जैन धर्म के संगम स्थल के रूप में अपने प्राचीन अवशेष और स्मृति पाषाण चिन्हों से अलंकृत इस शहर के रजौनाएवं चैकी ग्राम अपनी ऐतिहासिकता को आज भी स्पष्ट कर रहे है । वर्ष 1977 ई0 में चैकी ग्राम से प्राप्त विशाल शिवलिंग अब यहाॅ सुप्रसिद्व श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर का रूप ले चुका है ।इन ग्रामों में से समय-समय पर प्राप्त असंख्य दुर्लभ मूर्तियों में से कई चोरी का शिकार हो चुकी है । और इस चोरी के मामले लखीसराय थाना में दर्ज है । जो मूर्तियाॅ बची हुई है उनमें से कुछ को मंदिर कमिटी ने सहेजकर सुरक्षित कर रखा है । तो कुछ अब जहाॅ -तहाॅ बिखरी पडी हैं । शहर का कवैया मुहल्ला,कालीपहाडी,लाली पहाडी,बालगुदर ग्राम,एवं जिले के कई अन्य ग्राम भी इतिहास के सुनहरे पन्नों में कैद हैं। यहाॅ से भी यदा-कदा बेशकीमतीमूर्तियाॅ मिलती रही है । इनमें से किसी को भी सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है ।
लखीसराय के ऐतिहासिकता को देखते हुए बर्ष 1981 में यहाॅ एक किराये के मकान में संग्रहालय की स्थापना की गई थी । दो बर्षों के बाद इसे यहाॅ से हटाकर जमुई ले जाया गया । राज्य के कला और संस्कृति विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार लखीसराय संग्रहालय कर्मियों के वेतन, किराये एवं अन्य मद में विभाग द्वारा प्रति वर्ष चार लाख रूपयों से अधिक की राशि मुहैया करायी जा रही है । विभागीय अधिकारी लखीसराय में जमीन या कोई भवन उपलब्ध कराये जाने के लिए समय -समय पर जिले के आलाधिकारीयों से सम्पर्क साधते रहे है , ताकि यहाॅ संग्रहालय चालू किया जा सकें , परन्तु अभीतक यह संभव न हो पाने के कारण प्राचीन दुर्लभ मूर्तियां जहां-तहां राम भरोसे बिखरी पडी है । लखीसराय राजा इंद्रदमन के शासन काल में बसाया गया लखीसराय अपनी धरोहरों को बचाये रखने में भी अक्षम साबित हो रहा है. यहां के प्रबुद्धजनों ने पुरातत्व विभाग व जिला प्रशासन से धरोहरों को बचाने की गुहार लगायी है.
यहां उत्तर में गंगा नदी, पूरब में किऊल नदी, पश्चिम उत्तर कोने पर हरूहर नदी स्थित है. बाबा श्रृंगी ¬षि धाम से निकले मोरवे, महावीर की जन्मभूमि लछुवाड़ के जंगलों से निकली सोमे नदी, भूरहा नदी, बड़हिया टाल के 14 सोते और लखीसराय के 52 तालाब हैं.
लखीसराय जिले के पौराणिक स्थलों का स्थाई रूप से नामकरण या पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोई पहल राजनीतिक या प्रशासनिक तौर पर नहीं की जा रही है.
नहीं है संग्रहालय
यहां बर्बाद हो रही मूर्तियों के लिए एक संग्रहालय तक नहीं है. इस शहर को मुंगेर जिला से 03 जुलाई 1994 को बिहार सरकार की अधिसूचना जिला पुनर्गठन शाखा संख्या 123 के तहत जिला बनाया गया
V.O1-- जिले में संग्रहालय की स्थापना के संबंध में ने बताया कि -फिलहाल जिला प्रशासन के पास इसका कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है । उन्होने बताया की, जहाॅ-तहाॅ पडी मूर्तियों की सुरक्षा के प्रबंध जिला प्रशासन करेगा
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