लखीसराय में बासफोड जाति की स्थिति फटेहाल है । सुप मौनी और डालिया बनाकर जीवन बसर करने बाले इन बासफोडों का पूरा परिवार छठ पूजा के पहले से कारिगरी में जुट जाता है और दिन रात काफी मेहनत कर नेम धर्म लोकआस्था का महापर्व में बास की सुप को खरिददारी करने बालों की जब भीड उमडी तो एक आस जगी है कि अब मेरा दिन फिरने बाला है । महंगे दामों में बास खरीदकर कम मुनाफा लेकर सुप मौनी और डालिया बेच रहे है । खुले आसमान के नीचे गुजर बसर करने बाले इन बासफोडों की जिन्दगी नरक बनी रहती है एक तरफ बिहार सरकार महा दलितों के लिए काफी सुबिधा देने की लम्बी-चैडी भाषण देते रहते है फिर भी इन्हे कोई लाभ नही मिला है । अब - जब छठ पुजा का दिन आने से पहले आखों में चमक लौटी है । सरकार या जिला प्रशासन लाख दावा करले परन्तु इन जातियों के लिए अन्य दिनों रोटी कपडा और मकान के लिए दर-बेदर की ठोकरें खानी पडती है । बास फोडों का हाल बेहाल रहता है। बास की कराची से बनाते है छठ पूजा के लिए सुप मौनी और डालिया बाजार में कम दाम मिलते है । स्थिति फटेहाल है । फिर भी संतोष है ।
BREKING NEWS
Friday, 16 November 2012
रोटी कपडा और मकान
लखीसराय में बासफोड जाति की स्थिति फटेहाल है । सुप मौनी और डालिया बनाकर जीवन बसर करने बाले इन बासफोडों का पूरा परिवार छठ पूजा के पहले से कारिगरी में जुट जाता है और दिन रात काफी मेहनत कर नेम धर्म लोकआस्था का महापर्व में बास की सुप को खरिददारी करने बालों की जब भीड उमडी तो एक आस जगी है कि अब मेरा दिन फिरने बाला है । महंगे दामों में बास खरीदकर कम मुनाफा लेकर सुप मौनी और डालिया बेच रहे है । खुले आसमान के नीचे गुजर बसर करने बाले इन बासफोडों की जिन्दगी नरक बनी रहती है एक तरफ बिहार सरकार महा दलितों के लिए काफी सुबिधा देने की लम्बी-चैडी भाषण देते रहते है फिर भी इन्हे कोई लाभ नही मिला है । अब - जब छठ पुजा का दिन आने से पहले आखों में चमक लौटी है । सरकार या जिला प्रशासन लाख दावा करले परन्तु इन जातियों के लिए अन्य दिनों रोटी कपडा और मकान के लिए दर-बेदर की ठोकरें खानी पडती है । बास फोडों का हाल बेहाल रहता है। बास की कराची से बनाते है छठ पूजा के लिए सुप मौनी और डालिया बाजार में कम दाम मिलते है । स्थिति फटेहाल है । फिर भी संतोष है ।
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