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Sunday, 10 March 2013


अशोकधाम परिसर में बेशकिमती मुर्तियों के लिए संग्रहालय का उदधाटन बिहार सरकार के धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल किया। ।  
भगवान जब अपने लीलाओं को अपने भक्तों को दिखाना चाहे है तब-तब किसी न किसी रूप में इतिहास रचा है  जैसे श्री राम ने रामायण में कई विवरण की व्याख्या सहित भाई-चारे का जो लीलाओं का विवरण किया वह इतिहास में लिखा गया है । ठीक इसी प्रकार भगवान भोलेनाथ की इच्छा जब प्रकट होकर अपने भक्तों की भक्ति भावना को जगाते हुए उनकी मनोकामना पूर्ण करने की हुई तो उन्होंनंे अशोक नामक चरवाहे को अपने भक्ति की प्रेरणा दी तब तत्पश्चात अशोक नामक चरवाहा रजौना के ग्रामीणों के साथ मिलकर खेलने के दरम्यान टीले की खुदाई कर डाला । देखते ही देखते एक अधिमुक्त काले रंग का शिवलिंग मिला । जिसे श्री गणेश चतुर्थी, वैशाख कृष्ण पक्ष संवत् 2034 तदनुसार 7 अप्रैल, 1977 ई0 हम सब कि सौभाग्य सूर्य के उदित होने का दिवस था । संसार के अन्य भागोें में, अंगकोरवाट में, अफगानिस्तान में, अमेरिका के मेक्सिकों नगर में भी शिवलिंग पाए गए है लेकिन यह काले रंग का चिकना शिवलिंग चैडा और लंबा एवं काफी भव्य कांतीमय है तुलसी रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ ने राम सहित सभीं राजकुमारों का पुत्रेष्ठी यज्ञोपवित संस्कार मंुडन के लिए इसी रास्ते से  भगवान शिव की पुजाकर श्रृंगि रिषि के यहाॅं गये थे जो श्रृंगि रिषि आश्रम लखीसराय से 9 किलोमिटर कि दुरी पर चानन प्रखंड में है इसलिए श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव का महत्त्व भी है । लेकिन अशोकधाम की महिमा न्यारी और प्यारी है । इस मंदिर के धर्मस्थल जाने के लिए लखीसराय एवं किउल स्टेशन से रिक्शा, टमटम एवं टेक्सी मिलती है । यह स्टेशन से मात्रा 6 किलोमिटर कि दुरी पर स्थित हैं । राजधानी पटना से 125 किलोमिटर पुरब राष्ट्रीय उच्च पथ ;नेशनल हाईवे 80पर से लगभग 1 किलोमीटर की दुरी पर भोलेनाथ ;अशोकधाम अवस्थित हैं ।
लखीसराय में नये सिरे से रमणिक पर्यटन स्थल  ऐतिहासिक महत्व के कारण भोजपुरी फिल्मो के निर्मता निर्देशक एवम कलाकार अक्सर सूटिंग करते देखें जाते है बिहार सरकार का उपेक्षा के कारण  लखीसराय का ऐतिहासिक धरोहर  आज अपराधियो का वसेरा बन कर रह गया है लखीसराय में नये सिरे से रमणिक पर्यटन स्थल पर जिला प्रशासन ध्यान दे और पर्यटक क्षेत्र के रूप मे बिकसित करे तो यह लखीसराय जिले का अशोक घाम बिहार का देवघर बनकर अच्छा राजस्व देने के साथ देश विदेश के मनाचित्र पर भी आ सकता है


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