लखीसराय के चानन के पहाडी इलाका में अबैध रूप से पुलिस के मिलीभगत से धडल्ले उत्खनन किया जा रहा है । पहाडों के अबैध कारोवारीयों द्वारा चोरी छिपे पहाड का पत्थर तोडकर बेचा जा रहा है ।
चानन पुलिस प्रति स0 एफ0 टी0 150 रू लेकर पहाड की खनन केलिए लुट की छुट दे रखा है ।
वन विभाग कभी. कभार पहाडी इलाका जाता है लेकिन अबैघ कारोवारीयों से अबैध रकम की बसुली के लिए जाते है और खनन विभाग नक्सलीयों के भय से निरिक्षण नहीं करते है और तो और महीना में जिला मुख्यालय के कार्यालय में नहीं के बराबर डियुटी करते है अबास मे ही समय काटकर समय बिता लेते है कुछ भी बताने से साफ इन्कार कर देते है । अफसर मंद पड गए है और अबैघ कारोवारीयों बेलगाम हो चंुका है .जिससे रोज लाखों रू का पत्थर तोडकर बेचा जा रहा है और सरकार को राजस्व की क्षति हो रही है ।चानन एवं कजरा थाना क्षेत्र थाना क्षेत्र के जंगली व पहाड़ी क्षेत्रों में पत्थर माफियों ने अवैध पत्थर खनन के नए हथकंडे अपना लिए हैं। पत्थर माफिया अब वन विभाग के अधिकारी के सहयोग एवं नक्सली.पुलिस के सरंक्षण में पहाड़ के बोल्डर ही गांव के निकट खाली सरकारी जमीन या सड़क के किनारे गिट्टी तोड़वाने का कार्य कर रहे हैं। लाखोचक पंचायत क्षेत्र के अलावा ज्वलप्पा स्थान दैता बांध रोड पर व्यापक तरीके से बोल्डर तोड़े जा रहे हैं। सिंहचक व रामसीर गांवों में तो इसे उद्योग का रूप दे दिया गया है। बताया जाता है कि पहाड़ से पत्थर खनन में वन विभाग के अलावा नक्सली से भी लेन.देन कारोबारी करते हैं। दर्जनों मजदूर पत्थर तोड़ने का काम इन जगहों पर कर रहे हैं। मजदूर पेट की भूख मिटाने के लिए अपनी झुकती काया की परवाह किए बगैर पूरे दिन पत्थर पर हथौड़ी चलाते रहते हैं। इन्हें एक स्थानीय दबंग काम देते हैं।
मजदूरों से पत्थर कारोबारी का नाम पर पूछे जाने पर चुप्पी साध ली।काम करने वाले मजदूरों ने नाम नहीं बताया कि प्रतिदिन 60.70 रुपए की कमाई मुश्किल से होती है।
मजदूरों ने बताया कि पांच मजदूर मिलकर प्रतिदिन एक ट्रैक्टर गिट्टी तैयार कर लेते हैं। जिसे पत्थर माफिया द्वारा तीन से पांच हजार रुपए में मकान या सड़क के निर्माण कार्य में बेचा जाता है।
नक्सल गतिबिधि को देखते हुए डी0 एस0 पी0 सुबोध कुमार विश्वास इन जंगलों की पहाडी वादीयों में सुरक्षा की कडे इंतजाम किया है। और पहाड माफिया और नक्सलीयों पर लगाम लगाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का जंगल से निकलते ही फिर से अबैध पहाड उत्खनन कार्य जारी हो जाता है।

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