लखीसराय जिला के मुख्य बाजार में बडी बाहन की नो इंट्री लगने से बडा बाहन मालिक और ड्ाईवर काफी परेशान है। ज्ञात हो कि लखीसराय जानेसे चारों ओर जाने के लिए इसी एकलौता सडक का उपयोग करना पडता है। जिसे जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है।
1.लखीसराय से जमुई जाने के लिए
2.लखीसराय से शेखपुरा नवादा राॅची जाने के लिए
3. लखीसराय से पटना जाने के लिए
4.लखीसराय से मुंगेर और भागलपुर जाने के लिए
यही एकमात्र सडक है। सुबह 5 बजे सेरात के 9 बजे तक शहर में बडा बाहन चलाना वर्जित है। जिससे लोग परेशान है।बडा बाहन मालिक इस नो इंट्री से परेशान है। क्योंकि उसे ड्ाईवर का डेली खाना खर्चाए रोड टैक्स 1000रू0 देना पडता है। और यहां नो इंट्री के चक्कर में 12 धण्टा से लेकर 24 धण्टा तक गाडी लगा रह जाता है। जिससे राज्य सरकार ट्ोल पम्प और बाहन मालिक की काफी घटा हो रहा है। और तो और बाजार में किराना सहित अन्य समान सही समय पर नही आ पाता है जिससे महंगाई पर भी असर पड रहा है। ये सब बायपास सडक नहीं रहने के कारण रोज शहर के इकलौता सडक पर जाम की समस्या बनी रहती है। ज्ञात हो कि इस लखीसराय शहर की 15 किलोमीटर की लम्बी एकलौती सडक से होकर लोग देवघर जाने के लिए राॅची जाने के लिए शेखपूरा बरबिघा नालंदा नावादा जाने के लिए मुंगेर भागलपुर जाने के लिए पटना और बेगुसराय जाने के लिए यही एक सिंगल रास्ता है यहाॅ से बिहार के चारों तरफ जाने के लिए रास्ता आती और जाती है । इस शहर के बीचोंबीच मात्र 15 किलोमीटर का सडक अक्सर जाम रहता है जिससे आम और खास दोनों लोग प्रभावित है
एक लाख की आबादी वाले लखीसराय शहर की यातायात व्यवस्था नो इंट्री, जाम और अतिक्रमण की जाल में उलझकर कराह रही है। जिला मुख्यालय की इकलौती सड़क व चौक-चौराहों पर अतिक्रमण कारियों का कब्जा तथा शहर में वाहन पार्किंग के लिए कोई निर्धारित स्थल नहीं रहने के कारण यहां यातायात व्यवस्था और सड़कों पर सुरक्षित सफर पूरी तरह भगवान भरोसे है।
सड़क दुर्घटना का आंकड़ा
वर्ष-2010
मृत्यु- 35, घायल- 70
वर्ष 2011
मृत्यु- 65, घायल- 130
वर्ष 2012 (अबतक)
मृत्यु- 55, घायल- 150
मुख्य सड़क पर अतिक्रमण एवं भौगोलिक बनावट के कारण यातायात व्यवस्था का सुचारू ढंग से संधारण नहीं होता है। जबतक बाइपास सड़क का निर्माण नहीं होगा तबतक यातायात व्यवस्था दुरूस्त होना संभव नहीं है।
लखीसराय क्षेत्रीय विधायक विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि लखीसराय बाइपास सड़क भाया अशोकधाम से समाहरणालय तक पटना किऊल रेलखंड एवं गया.किऊल रेलखंड पर रेल उपरी पुल ;आरओबी निर्माण की स्वीकृति रेल मंत्रालय द्वारा नहीं दी गई है तथा केंद्र की यूपीए सरकार इस कार्य में बाधक बनी है। इसलिए राज्य सरकार ने अपनी राशि खर्च कर बाइपास सड़क पर आरओबी निर्माण कराने का निर्णय ले लिया है जिस पर 188 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 21.02.2006 में बायपास सडक बनाने के लिए शिलान्यास किया था । लेकिन 6 साल तक सोये रहने के बाद आम लोगों की आवाज जब उठने लगी तो फिर से बायपास बनाने की सुगबुगाहट शुरू हो गया है। बायपास सडक दो रेलवे लाईन पार होकर गुजरा है जिसके कारण रेलवे लाईन के उपर से पुल बनाने के बाद ही सम्भव हो सकेगा। अब देखना है कि अगामी लोकसभा चुनाव के पहले कार्य पुरा होता है या नहीं । लखीसराय में एकलौता लम्बा सडक रहने के कारण जाम की समस्या प्रतिदिन बनी रहती है । अजादी के बाद आज तक सभी नेताओं द्वारा केबल बायपास सडक का सपना दिखाया है लेकिन किसी भी नेता या पदाधिकारीयों का ध्यान नहीं है आये दिन रोज सप्ताहांत में सडक हादसा होता रहता है और प्रशासन मजबुरी जता कर रह जाती है
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