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Sunday, 28 September 2014

दुर्गा का अवतार



दुर्गा सप्तशती के अनुसार, प्राचीनकाल में महिषासुर ने लोगों पर अत्याचार प्रारंभ कर दिया। इंद्रपुरी तथा देवलोक पर अधिकार के पश्चात महिषासुर ने ऋषि-मुनियों व संतों पर अत्यार शुरू कर दिए।
महिषासुर के अत्याचारों से त्रस्त होकर त्रिदेवों ने दैत्यों पर बड़ा क्रोध किया। उसी क्षण एक तेजपुंज निकला। भगवान शंकर के तेज से उस शक्ति दुर्गा का मुख बना। यमराज के तेज से केश बने। संध्या के तेज से भौंहें निकलीं। अग्नि के तेज से तीनों नेत्र, वायु के तेज से कान, प्रजापति के तेज से दांत। इसी प्रकार अन्यान्य देवताओं के तेज से उस कल्याणमयी देवी का आविर्भाव हुआ।

अनेक देवताओं ने अपने आयुध भवानी को भेंट किए। भव्य तेजोमय रूप के साथ भवानी ने महिषासुर की समस्त सेना को ध्वस्त कर दिया एवं महिषासुर का वध कर दिया। महिषासुर के अतिरिक्त धूर्मलोचन, चंड-मुंड, रक्तबीज, शुंभ-निशुंभ का जगदंबा ने वध किया।
मार्कण्डेय पुराण का अंश है
श्री दुर्गा सप्तशती
अठारह पुराणों में मार्कण्डेय पुराण का सातवां स्थान है। इसकी श्लोक संख्या 6,439 है। इस दृष्टि से मार्कण्डेय पुराण आकार में सबसे छोटा है। इसके वक्ता मार्कण्डेय ऋषि थे, जो मृकुंडु ऋषि के पुत्र थे। मार्कण्डेय जन्म से अल्पायु थे, किंतु वह भगवान के परम भक्त थे। शिवजी और विष्णु भगवान की आराधना से इन्हें दीर्घायु होने का वर प्राप्त हुआ। इस पुराण को मार्कण्डेय मुनि ने ब्रह्मा जी से प्राप्त किया था। सदियों पहले इस पुराण की रचना विंध्य पर्वत पर हुई थी। इसके अध्याय 1 से 42 तक के वक्ता पक्षी थे। इन पक्षियों के नाम क्रमश: पिंगाक्षं, विरोध, सुमुख और सुपुत्र थे, जो शास्त्रों में निपुण और तत्वज्ञानी थे। इसके अध्याय 43 से अंत तक वक्ता-श्रोता मार्कण्डेय ऋषि और क्रोष्टिक हैं। इसके 4 प्रकरण अति महत्वपूर्ण हैं, जिनके नाम हैं-
भुवनकोश, हरिश्चंद्रोपाख्यान, मदालसा चरित और देवी माहात्म्य। इसके हरिश्चंद्रोपाख्यान प्रकरण में राजा हरिश्चंद्र के जीवन से जुडे करुण प्रसंगों का बडा ही मार्मिक चित्रण किया गया है। मार्कण्डेय पुराण में अनेक विद्याओं का भी उल्लेख है। जिनमें अनुलोपन, स्वेच्छारूपधारिणी, पद्यिनी और रक्षोघ्न विद्या प्रमुख है। इस पुराण में जीवन के कई गूढ रहस्य छिपे हैं।
इसकी मुख्य रचना देवी महात्म्य है, जो दुर्गा सप्तशती के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्र के अवसर पर हर घर में इसका पाठ किया जाता है।

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