लखीसराय रात 11 बजे लखीसराय थाना क्षेत्र से करीब सात किलोमीटर दूर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र भेनौरा गांव में मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल की एम्बुलेंस जब पहुंची तो लोगों के आंखों से आंसू छलक पड़े। बड़े, बुजुर्ग, महिलाएं डा. जमालउद्दीन की लाश देख भौचक रह गए। हर कोई बस यही सवाल कर रहा था कि डाक्टर साहब आत्महत्या नहीं कर सकते, इनकी हत्या की गई है। स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो डाक्टर जमालउद्दीन अपनी पत्नी व बच्चे के साथ मुजफ्फरपुर में रहते थे। परिवार के अन्य सदस्य पैतृक गांव भेनौरा में ही रहते थे। एक साधारण परिवार के रहे डा. जमालउद्दीन की मौत की खबर ने पूरे गांव को झकझोर दिया। सुबह जब डा. जमालउद्दीन के घर पहुंची तो मृतक की पत्नी व बच्चे फुट-फुटकर रोते हुए बस यही गुहार लगा रहे थे कि यह आत्महत्या नहीं हत्या की गई है। पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले को बदल दिया है। तीनों बेटी तरन्नुम जमाल, अंजु जमाल एवं ताज जमाल अपने पिता के शव के पास बैठकर मां शबीना परवीन से लिपटकर रो-रो बस यही कह रही थी कि मेरे पापा आत्महत्या नहीं कर सकते हैं। इसकी जांच कर दोषी को सजा मिले। गांव वाले भी डाक्टर की मौत को हत्या बता रहे थे। पूरे मामले में डाक्टर की पत्नी व उसके परिजनों के आरोपों की गहराई से जांच की जाए तो इसकी गुत्थी सुलझ सकती है। दोपहर 12 pm डाक्टर जमालउद्दीन के शव को सम्मान पूर्वक पारंपरिक ढंग से ताबूत में रखकर भेनौरा गांव से सटे कब्रिस्तान में लाया गया। जहां उन्हें मिट्टी दी गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण व कई चिकित्सक भी मौजूद थे।
BREKING NEWS
Monday, 1 April 2013
आत्महत्या नहीं हत्या
लखीसराय रात 11 बजे लखीसराय थाना क्षेत्र से करीब सात किलोमीटर दूर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र भेनौरा गांव में मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल की एम्बुलेंस जब पहुंची तो लोगों के आंखों से आंसू छलक पड़े। बड़े, बुजुर्ग, महिलाएं डा. जमालउद्दीन की लाश देख भौचक रह गए। हर कोई बस यही सवाल कर रहा था कि डाक्टर साहब आत्महत्या नहीं कर सकते, इनकी हत्या की गई है। स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो डाक्टर जमालउद्दीन अपनी पत्नी व बच्चे के साथ मुजफ्फरपुर में रहते थे। परिवार के अन्य सदस्य पैतृक गांव भेनौरा में ही रहते थे। एक साधारण परिवार के रहे डा. जमालउद्दीन की मौत की खबर ने पूरे गांव को झकझोर दिया। सुबह जब डा. जमालउद्दीन के घर पहुंची तो मृतक की पत्नी व बच्चे फुट-फुटकर रोते हुए बस यही गुहार लगा रहे थे कि यह आत्महत्या नहीं हत्या की गई है। पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले को बदल दिया है। तीनों बेटी तरन्नुम जमाल, अंजु जमाल एवं ताज जमाल अपने पिता के शव के पास बैठकर मां शबीना परवीन से लिपटकर रो-रो बस यही कह रही थी कि मेरे पापा आत्महत्या नहीं कर सकते हैं। इसकी जांच कर दोषी को सजा मिले। गांव वाले भी डाक्टर की मौत को हत्या बता रहे थे। पूरे मामले में डाक्टर की पत्नी व उसके परिजनों के आरोपों की गहराई से जांच की जाए तो इसकी गुत्थी सुलझ सकती है। दोपहर 12 pm डाक्टर जमालउद्दीन के शव को सम्मान पूर्वक पारंपरिक ढंग से ताबूत में रखकर भेनौरा गांव से सटे कब्रिस्तान में लाया गया। जहां उन्हें मिट्टी दी गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण व कई चिकित्सक भी मौजूद थे।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment