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Tuesday, 9 April 2013


लखीसराय में 1987 में तत्कालीन सांसद व केंद्रीय मंत्री कृष्णा शाही के प्रयास से केंद्रीय विद्यालय खुला था। स्थापना काल से ही श्री दुर्गा बालक उच्च विद्यालय के निचले भवन में विद्यालय संचालित हो रहा है। विद्यालय को स्थायी भवन एवं आधारभूत संरचना के विकास के लिए दस एकड़ भूमि की दरकार है। इतने लंबे सफर के बावजूद सत्ता के भागीदार रहे मंत्री, सांसद एवं विधायक की इच्छाशक्ति के अभाव एवं जिला प्रशासन की उदासीनता से विद्यालय के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं सकी। अब केंद्रीय विद्यालय संगठन ने विद्यालय के स्थानीय प्रबंधन को पहली कक्षा में नामांकन बंद करने का नोटिस थमा दिया है। इससे विद्यालय के भविष्य पर तलवार लटकने लगी है।

विद्यालय सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दे रखा है, बिना भूमि व भवन के कोई भी केंद्रीय विद्यालय संचालित नहीं होगा। इस कारण लखीसराय समेत राज्य के 14 केंद्रीय विद्यालयों में संगठन ने नामांकन पर रोक लगा दिया है। विद्यालय प्रबंधन ने नामांकन पर रोक लगा देने संबंधित जानकारी विद्यालय के चेयरमैन व जिलाधिकारी, लखीसराय रामरूप सिंह को दे दी है।
इस बाबत अनुमंडल पदाधिकारी विनय कुमार राय ने बताया, जमुई मार्ग में शरमा गांव स्थित मठ की जमीन स्थानीय ट्रस्टी ने केंद्रीय विद्यालय के लिए देने का प्रस्ताव दिया है। धार्मिक न्यास परिषद से स्वीकृति लेने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पूर्व भी कई स्थानों पर जमीनों का चयन किया गया था। मगर, केंद्रीय विद्यालय संगठन ने उन्हें अस्वीकार कर दिया। इस कारण जमीन उपलब्ध कराने में प्रशासन को देरी हो रही है।

लखीसराय : केंद्रीय विद्यालय लखीसराय में नए शैक्षिक सत्र में केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा नामांकन पर रोक लगाने तथा अबतक विद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण विद्यालय बंद होने की आशंका को लेकर शहर के प्रबुद्धजन, शिक्षा प्रेमी, विद्यालय के छात्र-छात्राओं में घोर निराशा है तथा हर कोई इसके लिए सरकार व प्रशासन को दोषी मान रहा है। राजनीतिक दिग्गजों का क्षेत्र रहने के बावजूद जमीन खोजने में पहल नहीं करने को लेकर लोगों में काफी क्षोभ है।

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