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Tuesday, 9 April 2013

किताब-कॉपी के नाम पर लूट...


लखीसराय के सैकडों निजी शिक्षण संस्थान शहर के चैधरी प्रकाशन , पोपुलर बुक स्टोर, भारत बुक स्टोर , सोनु बुक स्टोर, विधार्थी बुक स्टोर की मनमानी कमीशन के अधार पर स्कुलों का  किताव और कापी में अप्रत्याशित मुल्य रखकर मालामाल हो रहे है। बहीं अविभावक का जेब कट रही है। उनसेकिताब.कॉपी के नाम पर लूट  किया जा रहा है।  जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस पर चुप्पी साध रखा है। बालिका बिघापीठ, डी0ए0भी0, संत जोसेफ स्कुल, केजे0एफ0 स्कुल, संत मैरी, डुन एकेडमी , मदर इन्टर नेशनल,  एसिवो पब्लिक स्कुल जैसे सरीखे स्कुल के प्रचार्य के द्वारा अविभावकों का शोषण और दोहण किया जा रहा है।
प्राइवेट स्कूल प्रबंधनए प्रकाशक और किताब दुकानदार मिल कर नर्सरी से लेकर प्लस टू तक की किताब.कॉपियों में छात्र.छात्रओंध् अभिभावकों को लूट रहे हैंण् कुछ अपवाद को छोड़ देंए तो इन तीनों का बड़ा गिरोह सक्रिय हैण्स्कूल तय करता है कि किस वर्ग में कौन.सी किताब चलेगीण् बच्चों को किस दुकान से किताब खरीदनी हैए
यह भी स्कूल तय करता हैण् प्रकाशक स्कूल प्रबंधन से सौदा करते हैं और अपने प्रकाशन की किताब की अनुशंसा स्कूल से करवाते हैंण् ऐसे प्रकाशक किताब की कीमत लागत से कई गुना अधिक रखते हैंण् कोर्स में अपनी किताब चलवाने के लिए प्रकाशक स्कूल प्रबंधन को हिस्सा भी देते हैंण्
इतना ही नहींए स्कूल बच्चों को किताब और कॉपियों के लिस्ट के साथ किताब दुकान का नाम भी थमा देता हैण् किताब का दाम तो अधिक होता ही हैए कॉपियों की कीमत भी बाजार से ज्यादा वसूली जाती हैण् अगर कोई अभिभावक सिर्फ किताब लेना चाहता हैए तो दुकानदार या तो किताब नहीं देते हैं या बाद में आइयेगाए कह कर टाल देते हैंण् लिस्ट में किताब ध् कॉपियों के साथ.साथ इन्हें कवर करने के लिए बुक कवरए नेम चार्ट भी रहता हैण् यानी इन चीजों को भी उन्हीं दुकानों से अधिक दाम में खरीदने के लिए मजबूर किया जाता हैण्
20 से 40 फीसदी तक कमीशन
इस धंधे से प्रकाशकए स्कूल प्रबंधन और दुकानदार पैसा कमा रहे हैंण् अभिभावक लाचार हैंण् खबर यह भी है कि दुकानदारों को प्रकाशक 20 से 40 फीसदी या कभी.कभी इससे भी अधिक कमीशन दे रहे हैंण् इसके बावजूद प्रकाशक को मोटा मुनाफा हो रहा हैए क्योंकि जिस किताब की लागत 100 होनी चाहिएए उसका मूल्य 180 रुपये प्रिंट किया जाता हैण् 48 पेज की पतली से एक पुस्तक की कीमत 75 रुपये रखी गयी हैण् बाजार के जानकार बताते हैं कि इसकी लागत अधिक से अधिक 20 रुपये होनी चाहिएण् जिस एनसीइआरटी पुस्तक की कीमत 45 रुपये हैए अन्य प्रकाशक एनसीइआरटी पैटर्न पर आधारित लिख कर उसे 160 से 180 रुपये में बेचते हैंण् दुकानदार भी एनसीइआरटी की पुस्तक बेचने से बचते हैंए क्योंकि इसमें कमीशन बहुत कम मिलता हैण्
कॉपियों की बिक्री में भी मनमानी
कॉपियों की बिक्री में भी मनमानी की जा रही हैण् ब्रांडेड कंपनी की कॉपी के नाम पर 20 रुपये की कॉपियों को 30 रुपये में बेचा जा रहा हैण् एक आंकड़े के अनुसारए सिर्फ रांची के किताब दुकानदार स्कूली किताबों ;अन्य किताब अलग हैंद्ध और कॉपियों से लगभग 12 करोड़ रुपये कमीशन से कमाते हैंण् यह राशि इससे अधिक भी हो सकती हैए क्योंकि किताबों की कीमत लागत से बहुत ज्यादा हैण् नर्सरी और प्रेप के बच्चों की किताब के लिए 1500 रुपये तक लिये जा रहे हैंण् क्लास थ्री से क्लास सिक्स तक के बच्चों की किताबध्कॉपी की कीमत ढाई से तीनध्साढ़े तीन हजार रुपये तक हैण्
नहीं देते किताब का लिस्ट
राजधानी के अधिकतर स्कूल किताब का लिस्ट नहीं देतेण् किताब के लिस्ट के बदले अभिभावकों को दुकान के नाम का परचा देते हैंण् जिस दुकान से स्कूल की सेटिंग होती हैए उसे छोड़ कर दूसरी दुकान से किताब नहीं मिलतीण् अभिभावक चाह कर भी दूसरी दुकान से किताब नहीं ले सकतेण्
प्रति वर्ष कुछ न कुछ बदल देते किताब में
स्कूल प्रति वर्ष किताब बदल देते हैंण् अगर पूरी किताब नहीं भी बदली गयी तो भी कुछ अध्याय में बदलाव कर देते हैंए ताकि बच्चे पुरानी किताब का उपयोग नहीं कर सकेण्
परची पर करोड़ों का कारोबार
किताब के करोड़ों के कारोबार का कोई हिसाब.किताब नहीं होताण् अधिकतर दुकानदार किताब क्रय का रसीद नहीं देते हैंण् रसीद मांगने पर तरह.तरह का बहाना करते हैंण् कुछ दुकानदार तो रसीद मांगने पर किताब नहीं देने की बात कहते हैंण्
एनसीइआरटी की किताब नहीं
स्कूल सीबीएसइ पाठ्यक्रम के अनुरूप पठन.पाठन की बात करते हैंए पर एनसीइआरटी की किताब के बदले निजी प्रकाशक की किताब से बच्चों को पढ़ाते हैंण् कक्षा एक में दर्जन भर से अधिक किताब बच्चों को दिये जा जा रहे हैंए जबकि एनसीइआरटी के अनुरूप कक्षा एक में बच्चों को तीन से चार किताब ही पढ़ाना हैण्

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