लखीसराय जिला में आज कल लगातार परिवहन विभाग की लापारवाही के कारण सवारी गाडी पर ओवरलोडिंग यात्रीयों को ढो रहा है।
लखीसराय जिला अंतर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ 80 हो या राजकीय पथ, हर तरफ लापरवाही एवं परिवहन नियमों की अनदेखी के बीच वाहनों की तेज रफ्तार के कारण लोगों की अकाल मृत्यु हो रही है। बावजूद इसके लोग हादसे व मौत के इस सफर से सबक नहीं ले रहे हैं। स्थिति यह है कि हर सड़क दुर्घटना में मौत के बाद मुआवजे व वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने की मांग को लेकर लोग सड़क जाम करते हैं। यह सिलसिला जिले में एक ट्रेंड का रूप ले चुका है। सवाल यह है कि सवारी वाहनों की छत पर, वाहनों के पीछे और अगल-बगल लटक कर सफर करने एवं बेपरवाह रफ्तार से बाइक व अन्य वाहन चलाने की आदत कब जाएगी। आखिर कब तक हम सुधरेंगे?
सिर्फ प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने से क्या सड़क दुर्घटना रूक जाएगी?
यह गंभीर सवाल एक समस्या का रूप ले चुका है।
जिला मुख्यालय स्थित लखीसराय रेलवे स्टेशन परिसर में जीआरपी व आरपीएफ की मौन सहमति से चल रहे अवैध वाहन स्टैंड, विद्यापीठ चौक स्टैंड, जिला मुख्यालय के पास कचहरी रोड स्थित बस स्टैंड पर वाहनों पर यात्री जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं। यह नजारा मुख्यालय की सड़क पर 24 घंटे देखने को मिलता है। इन सवारी वाहनों पर ओवरलोडिंग के लिए जितना जिम्मेदार वाहन चालक हैं उससे कहीं ज्यादा दोषी वाहनों की छतों पर चढ़कर व लटक कर सफर करने वाले लोग हैं। जिन्हें न तो अपनी जान की परवाह है न नियम कानून की। हकीकत यही है कि हर कोई सिर्फ मूकदर्शक की भूमिका में नजर आता है या यूं कहें कि सभी हादसे का इंतजार करते हैं। सड़क दुर्घटना में किसी की मौत के बाद सिर्फ अफसोस की जाती है। पुलिस जाम हटाने और लाश ढोने में व्यस्त रहती है। वहीं दूसरी ओर हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी जुगाड़ गाड़ी का परिचालन जारी है जो पूरे जिले की यातायात व्यवस्था पर भारी है। सुदूर ग्रामीण अंचलों से भेड़ बकरी की तरह आदमी को लादकर सड़कों पर मौत की सवारी कर रही यह जुगाड़ गाड़ी हर समय हादसे को निमंत्रण देती है।
कुल मिलाकर जब तक आमलोग नहीं सुधरेंगे तब तक सिस्टम भी नहीं सुधरेगा और इसी तरह हादसे के सफर में निर्दोषों की मौत होती रहेगी। चालू वर्ष के दस माह में जिले में अबतक सड़क दुर्घटना में 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 200 से अधिक लोग जख्मी हुए हैं।
बाईट- अमरेन्द्र प्र0 सिंह


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