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Thursday, 10 October 2013

जगत जननी जगदम्बा महारानी स्थान


 देवी मां बाला  त्रिपुर सुंदरी जगदम्बा
लखीसराय जिले का बडहिया थाना क्षेत्र के जगत जननी जगदम्बा महारानी स्थान में नवरात्र के अबसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाला त्रिपुर सुंदरी जगत जननी जगदम्बा का विशेष पूजा. अर्चना किया जा रहा  है। प्रेम और आस्था का नवसंवत प्रारंभ हो गया है। नवरात्र पर मंदिरों में भक्तगणों का तांता लगा रहा। माता के दरबार में मनौतियों को पूर्ण करने हेतु सुबह से भीड़ लगी रही। यहां जगदंबे अंबे वाली जय देवी मां बाला  त्रिपुर सुंदरी जगदम्बा  के नारे गूंजने लगे।श्रद्धालुओं के लिए अपने आराध्य देव की पूजा करना अंतर्मन से उस देवी या देवता का साक्षात दर्शन करने से कम नहीं होता। परिवारजनों के साथ पूरी श्रद्धा-विश्वास से पूजा आराधना की। स्वयं सप्तशती का पाठ किया ! देवी मंदिरों में मत्था टेका।
बडहिया नगरी में मां की उपासना एक और प्रमुख केंद्र है त्रिपुर सुंदरी देवी का मंदिर। यहां भक्तों को शक्ति  की उपासना का सौभाग्य भी मिलता है। नवरात्र में देवी शक्ति जागरण को विशेष अनुष्ठान होता है।मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। इन दिनों मंदिर शक्ति जागरण का विशेष अनुष्ठान चल रहा है। सप्तमी को मां का जागरण होगा जिसके साथ शक्ति जागरण का अनुष्ठान पूर्ण होगा।
    पुजारी  महाराज ने बताया कि त्रिपुर सुंदरी जीवात्मा में भी विद्यमान है। जीवात्मा में इड़ाए पिंगलाए सुषुम्णा रूप में विद्यमान है। ऐसे ही देवताओं में ब्रहमाए विष्णुए महेशए देवियों में महालक्ष्मीए महा सरस्वतीए महाकाली और प्रकृति में सद्ए चित्त और आनंद रूप में विद्यमान है। इन्हें शिव की शक्ति माना जाता है। इन्हीं से शिवलिंग ज्योर्तिमय होते हैं। महाराज ने बताया कि देवी की दशम महाविद्या की अधिष्ठात्री भी त्रिपुर सुंदरी है। देवी साधक शक्ति जागरण के लिए त्रिपुर सुंदरी की उपासना अवश्य करते हैं।मां के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। भगवती की उपासना से धनए वैभवए सुखए शांति की प्राप्ति होती है। शक्ति की देवी दुर्गा की आराधना का अपना महत्व है।
व्रत रखे लोगों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सिद्धपीठों में मां के समक्ष शीश नवाकर आशीष लिया। कुछ अखंड ज्योति जलाकर मां की आराधना में लीन हैं।
                       लखीसराय जिला के बडहिया गंगा किनारे प्रमुख धार्मिक स्थल माॅ बाला त्रिपुर सुन्दरी जगत जननी जगदम्बा की अद्भुत नवपिण्डी  आदिकाल में माता की भक्त श्रीधर ओझा ने गंगा में ध्यान के दरम्यान देवाधिदेव भगवान शिव जब आकाश मार्ग से सती की जलती हुई अवस्था में कैलाश  पर्वत ले जाने के दरम्यान उनके शरीर जला हुआ कुछ अंश गंगा में गिरा । वही तेज अग्नि स्वरूपा जगतजननी महारानी जगदम्बा को स्थापित किया किया गया । और उसी दिन से यहां प्रत्येक हिन्दु नवरात्री में महारानी स्थान में विशेष पुजा.अर्चना किया जाता है। ज्ञात हो कि शिव पुराण के अनुसार यही श्रीधर ओझा जम्मुकश्मीर में माता बैष्णों को स्थापित किये थे। आज के दिन से लगातार भक्तों की भीड बढता ही जा रहा है। बड़हिया स्थित मां बाला त्रिपुर संदरी मंदिर में काफी भीड़ सबेरे से उमड़ी। वहां दुर्गा पाठ करने वाले साधकों के अलावा पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भी भीड़ लगी रही।
बाईट...... पुजारी  महाराज

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