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Friday, 18 October 2013

फर्जी प्रमाण पत्र पर आंगनबाड़ी सेविका की बहाली

लखीसराय जिला के हलसी के सीडीपीओ विन्दु कुमारी दर्जनों सेविका और सहायिका की बहाली में घोर अनियमितता की है। और तो और पोषाहार में कटौती कर भी प्रत्येक माह सभी सेविका से 1500 रू0 नजायज तरीके से लेती है।
 



जब हलसी की रूबी देवी के आंगनवाडी केन्द्र पर मिडिया ने सर्वेक्षण किया तो पाया कि सेविका रूबी देवी फर्जी सर्टीफिकेट पर आंगनबाडी में बहाली हुई है। इनके केन्द्र पर बच्चों की संख्या की भी कमी है। पोषाहार में केवल खिचडी खिलाया जाता है। उसमें चोखा भी नहीं दिया जा रहा है। एक तरफ सरकार बच्चों को पोष्टिक अहार देने की बात कर रही है। लेकिन यहां तो रूपयों की लुट की छुट है। किसी तरह से आंगनवाडी केवल खानापूर्ति हो रही है।
हलसी प्रखंड के ककरौड़ी की चंपा कुमारी ने शिकायत की कि सीडीपीओ हलसी ने रुपए लेकर फर्जी प्रमाण पत्र पर सेविका रूबी देवी की बहाली कर ली है। डीएम ने मामले की जांच का आदेश दिया।
 


गरीब बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को कूपोषण से बचाने हेतु बाल विकास परियोजना द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र लूट.खसोट का अडडा बनता जा रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा उचित देखभाल के अभाव में यह केन्द्र अपने मूल उद्देश्यों से भटक गया जिसके कारण गरीबों के सेवार्थ सरकार द्वारा भेजा गया पैसा एवं अन्य सामग्री किसी दूसरे के जेब में चला जाता है। बताते चलें कि 80 पंचायतों के बीच कुल 240 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं लेकिन जमीनी हकीकत है कि इसमें मात्र दस फीसदी केन्द्र ही चलता है। बाकी नब्बे फीसदी केन्द्र बंद ही रहता है। ये अलग बात है कि कागज में 100 प्रतिशत केन्द्र सुचारु ढंग से संचालित होते हैं। प्रभारी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की लापरवाही तो कभी.कभी जिला मुख्यालयों में भी दिखाई दी जाती है। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच कैसे किया जाता होगा। जबकि नियमानुसार प्रतिमाह जांच रिपोर्ट सरकार को दिया जाता है तो गांव देहात में स्थित केन्द्रों पर कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जाता है। ऐसे में गरीब व कुपोषण के शिकार बच्चों एवं महिलाओं का भला कैसे होगा।विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में भ्रष्टाचार चरम पर है। विभागीय अधिकारियों की जेब गर्म कर पोषाहार एवं टेकहोम राशन में अनियमितता बरतकर आंगनबाड़ी सेविका अपनी तिजोरी भरने में जुटी हुई हैं एक भी आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच प्रतिवेदन जिला मुख्यालय को नहीं दिया जा रहा है। जो सीडीपीओ की स्वेच्छाचारिता का द्योतक है।

 

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