लखीसराय शहर का ह्दयस्थल नया बजार के बडी दुर्गा मंदिर की स्थापना सन 1893 ई0 में किया गया था । जो पुरे 119 बर्षकाल हो चुका है मंदिर की वास्तुकला 108 फीट उॅची गुबंद है और गुबंद की नक्काशी आर्कषण का केन्द्र है । मंदिर की विशेषता यह है कि जो कोई भक्त माता की दरवार में मन से माॅगता है उसकी मनोकाना पूर्ण हो जाती है । नवरात्रा में प्रतिदिन सैकडों महिलाऐं माता के दरवार में मिटटी का दिया जलाकर पुजा अर्चना करती है । आज माता सक्षात कुॅवारी कन्या और दीप में विराजमान है । ग्रंथों और पुरानी कथनानुसार आज यहाॅ प्रत्येक बर्ष के भाॅति हजारों महिलाएॅ और कुॅवारी कन्या बडी माता की दरबार में दीप जलाकर पूजा-अर्चना की। यह स्थान 119 बर्ष पुरानी मंदिर है जिसे बडी दुर्गा स्थान का शक्तिपिठ जगदम्बा के नाम से जाना जाता है तभी से यहाॅ प्रतिबर्ष माता की पूजा में भक्तों द्वारा दीप जलाने की परम्परा है ।
आरती-और जय माता दी की बोल से पूरा मंदिर भक्तिमय हो गया है आज तकरीवन 5 से 6 हजार महिलाएॅ और कुॅवारी कन्या के द्वारा माता की दरबार में दीप जलाकर पूजा-अर्चना किया है
बहीं शहर के पुराना बजार में छोटी दुर्गा मंदिर भी आस्था के प्रतिक है जो शहर के दुसरे कोने पर अवस्थित है जो संगमरमर के पत्थर मंदिर का गुबंज काफी आर्कषक है । आस्था और विश्वास के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-पाठ शुरू हो गया है शहर के बड़ी दुर्गा मंदिर, छोटी दुर्गा मंदिर, थाना चौक स्थित शिव दुर्गा मंदिर सहित अन्य मंदिरों पर विशेष अनुष्ठान की व्यवस्था की गई है। दुर्गा सप्तसती के पाठ से क्षेत्र गुंजायमान हो गया है।इस महापर्व को लेकर दुर्गा मंदिरों व देवी स्थलों में भक्तों की भीड़ उल्लास व श्रद्धा से आना शुरू हो गया है।
आरती-और जय माता दी की बोल से पूरा मंदिर भक्तिमय हो गया है आज तकरीवन 5 से 6 हजार महिलाएॅ और कुॅवारी कन्या के द्वारा माता की दरबार में दीप जलाकर पूजा-अर्चना किया है
बहीं शहर के पुराना बजार में छोटी दुर्गा मंदिर भी आस्था के प्रतिक है जो शहर के दुसरे कोने पर अवस्थित है जो संगमरमर के पत्थर मंदिर का गुबंज काफी आर्कषक है । आस्था और विश्वास के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-पाठ शुरू हो गया है शहर के बड़ी दुर्गा मंदिर, छोटी दुर्गा मंदिर, थाना चौक स्थित शिव दुर्गा मंदिर सहित अन्य मंदिरों पर विशेष अनुष्ठान की व्यवस्था की गई है। दुर्गा सप्तसती के पाठ से क्षेत्र गुंजायमान हो गया है।इस महापर्व को लेकर दुर्गा मंदिरों व देवी स्थलों में भक्तों की भीड़ उल्लास व श्रद्धा से आना शुरू हो गया है।

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