LAKHISARAI se
Ranjit Kumar ki Report
Slug.. Aastha ka Kalus
Feed from ftp
Date..07.10.2013
Anchor Link... आज जगतजननी जगदम्बा की 3sra पूजा है ! शारदीय नवरात्र शनिवार से शुरू हो गया। प्रथम दिन देवी के शैलपुत्री रूप की पूजा-अर्चना की गई। इस दिन पूजा पंडालों, मंदिरों एवं घरों में कलश की स्थापना की गई। अब नौ दिनों तक दुर्गा सप्तसती के पाठ से क्षेत्र गुंजायमान होगा। 14 अक्टूबर को विजयादशमी है। पूजा को लेकर विभिन्न पूजा समिति एवं घरों में शक्ति की देवी की आराधना पहले ही दिन चरम पर रही।
लखीसराय जिला के सुदुरवर्ती इलाका गोविन्दबिगहा शाम टोला में एक व्यक्ति अपने सीना पर कलश स्थापन कर अनवरत माता की ध्यान में है पुरे गाॅव में इस आस्था की कलश स्थापना की खुब चर्चा है स्वंय तारणी भगत जो अपने छाती पर कलश स्थापना कर रखा है उनका कहना है कि मुझे माता जगतजननी जगदम्बा और खप्परबाली काली सपने में आती थी और मुझ से खुन माॅगती थी एक दिन माॅ ने कहा कि तुम अपने छाती पर नवरात्रा करों तुम्हारा और इस गाॅव का कल्याण होगा । और तब से मै प्रण लिया और कलश स्थपना कर लिया है । आस्था और विश्वास ने भक्ति को एक नया अयाम दिया है । और भक्त माता के नामपर भुखे-प्यासे अपने छातीपर कलश स्थापना कर रखा है ।
बहीं शहर के बडी दुर्गा स्थान और छोटी दुर्गा स्थान में पारंम्परिक तरीके से वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ जगतजननी जगदम्बा की पुजा पाठ शुरू है। लोग आस्था और विश्वास के साथ माता की दरवार में हाजिरी लगा रहे है। जबकी मुर्तिकार माता की अन्तिम रूप को संवारने जुटा है।
बाईट- तारणी भगत
Ranjit Kumar ki Report
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Date..07.10.2013
Anchor Link... आज जगतजननी जगदम्बा की 3sra पूजा है ! शारदीय नवरात्र शनिवार से शुरू हो गया। प्रथम दिन देवी के शैलपुत्री रूप की पूजा-अर्चना की गई। इस दिन पूजा पंडालों, मंदिरों एवं घरों में कलश की स्थापना की गई। अब नौ दिनों तक दुर्गा सप्तसती के पाठ से क्षेत्र गुंजायमान होगा। 14 अक्टूबर को विजयादशमी है। पूजा को लेकर विभिन्न पूजा समिति एवं घरों में शक्ति की देवी की आराधना पहले ही दिन चरम पर रही।
लखीसराय जिला के सुदुरवर्ती इलाका गोविन्दबिगहा शाम टोला में एक व्यक्ति अपने सीना पर कलश स्थापन कर अनवरत माता की ध्यान में है पुरे गाॅव में इस आस्था की कलश स्थापना की खुब चर्चा है स्वंय तारणी भगत जो अपने छाती पर कलश स्थापना कर रखा है उनका कहना है कि मुझे माता जगतजननी जगदम्बा और खप्परबाली काली सपने में आती थी और मुझ से खुन माॅगती थी एक दिन माॅ ने कहा कि तुम अपने छाती पर नवरात्रा करों तुम्हारा और इस गाॅव का कल्याण होगा । और तब से मै प्रण लिया और कलश स्थपना कर लिया है । आस्था और विश्वास ने भक्ति को एक नया अयाम दिया है । और भक्त माता के नामपर भुखे-प्यासे अपने छातीपर कलश स्थापना कर रखा है ।
बहीं शहर के बडी दुर्गा स्थान और छोटी दुर्गा स्थान में पारंम्परिक तरीके से वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ जगतजननी जगदम्बा की पुजा पाठ शुरू है। लोग आस्था और विश्वास के साथ माता की दरवार में हाजिरी लगा रहे है। जबकी मुर्तिकार माता की अन्तिम रूप को संवारने जुटा है।
बाईट- तारणी भगत

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